- - कभी मेंटेनेंस तो कभी लोड शेडिंग, उमस भरी गर्मी में शहरवासियों का हाल बेहाल.
- - स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों पर भी पड़ रहा प्रतिकूल असर, लोगों में पनप रहा आक्रोश.
Chatra: उमस भरी गर्मी के बीच चतरा जिले में बिजली की अनियमित आपूर्ति ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. शहरवासियों का आरोप है कि दिन-रात बिजली की आंख-मिचौली ने उनकी दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दी है. कई इलाकों में 24 घंटे में बमुश्किल कुछ घंटे ही निर्बाध बिजली मिल पा रही है, जबकि बार-बार होने वाले पावर कट से घरेलू कामकाज, कारोबार और पानी की व्यवस्था के अलावे बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है.
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लोगों का कहना है कि कभी मेंटेनेंस तो कभी लोड शेडिंग के नाम पर बिजली बाधित की जा रही है. सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर है कि बिजली कटने के दौरान ही मेंटेनेंस कार्य क्यों नहीं पूरा कर लिया जाता. उपभोक्ताओं का आरोप है कि मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली बाधित रहने के बाद आपूर्ति बहाल होते ही पुनः लोड शेडिंग अथवा तकनीकी खराबी के नाम पर बिजली काट दी जा रही है.
बढ़ रहा आक्रोश
विद्युत उपभोक्ताओं का आरोप है कि लगातार बिजली कटौती ने उमस भरी गर्मी में जीना मुश्किल कर दिया है. घरों में पंखे व कूलर बंद रहने से बुजुर्गों, बच्चों और आम परिवारों को परेशानी हो रही है. बिजली पर निर्भर दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. लोगों का आरोप है कि बिजली कब आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई भरोसा नहीं है. मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली बंद रहती है और बिजली आने के बाद फिर लोड शेडिंग शुरू हो जाती है. जनता आखिर अपनी परेशानी किससे कहे ?
लोगों का यह भी कहना है कि स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच बिजली की अनियमितता से सरकारी एवं गैर-सरकारी स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं. क्योंकि कार्यक्रमों में शामिल होने वाले बच्चे व कलाकार तैयारी को अंतिम रूप नहीं दे पा रहे हैं. लोगों का आरोप है कि जवाबदेह अधिकारी अपने आवास में 24 घंटे जनरेटर की सुविधा भोग रहे हैं. ऐसे में उन्हें शहर में पावर कट की समस्या और उससे उत्पन्न हो रहे परेशानियों का अंदाजा कैसे होगा.
व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन
बिजली संकट को लेकर स्थानीय समाजसेवियों और उपभोक्ताओं में भी नाराजगी बढ़ रही है. उनका कहना है कि आम जनता को घंटों बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेही तय करनी चाहिए. समाजसेवियों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी है कि यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो बड़े अधिकारियों के आवासों में चलने वाले जनरेटर सिस्टम के खिलाफ भी विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा.
समाजसेवियों ने कहा कि शहर में बिजली संकट लोगों को परेशान कर रहा है तो ग्रामीण इलाकों की स्थिति क्या होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. समाजसेवियों ने बिजली विभाग से बिजली कटौती का स्पष्ट शेड्यूल जारी करने, मेंटेनेंस कार्य की पूर्व सूचना देनें और लोड शेडिंग की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है. ऐसे में अब देखना होगा कि बिजली विभाग और जिला प्रशासन इस बढ़ते आक्रोश के बीच व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाती है.
सप्लाई शॉर्टेज और तकनीकी समस्या
हालांकि इस बाबत विद्युत आपूर्ति प्रमंडल, चतरा के अधिकारी जिले में बिजली संकट के पीछे उपलब्ध बिजली और मांग के बीच अंतर, लंबी ट्रांसमिशन लाइन तथा बार-बार लाइन ट्रिपिंग जैसी तकनीकी समस्याओं को प्रमुख कारण बता रहे है. लगातार बिजली कटौती को विभाग ने आवश्यक मेंटेनेंस कार्य से जोड़ते हुए बेहतर और सुचारु बिजली आपूर्ति के लिए जरूरी बताया है.

