Ranchi: झारखंड में आतंक, रंगदारी और संगठित अपराध का बड़ा चेहरा रहे दो कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू और सुजीत सिन्हा का चैप्टर क्लोज हो चुका है. दोनों की अलग-अलग पुलिस मुठभेड़ों में मौत के बाद राज्य में अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान की चर्चा तेज हो गई है. आम लोगों और कारोबारियों के बीच यह उम्मीद भी बढ़ी है कि अब झारखंड में अपराध का ग्राफ गिरेगा और लोग अमन-चैन के साथ जीवन जी सकेंगे.
राज्य सरकार लगातार संगठित अपराध, रंगदारी और गैंगवार पर सख्त कार्रवाई की बात करती रही है. हाल के दिनों में पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में भी यह चर्चा है कि झारखंड में अपराधियों के खिलाफ 'योगी मॉडल' जैसी सख्त रणनीति अपनाई जा रही है. हालांकि सरकार की ओर से इस तरह की किसी आधिकारिक नीति की घोषणा नहीं की गई है.
कुछ साल पहले छत्तीसगढ़ से रिमांड के बाद लौट रहे गैंगस्टर अमन साहू की पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र में पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई थी. पुलिस के अनुसार, उसे छुड़ाने की कोशिश के दौरान हुई जवाबी कार्रवाई में अमन साहू मारा गया.
वहीं रविवार देर रात साहिबगंज जेल से धनबाद जेल शिफ्ट किए जा रहे सुजीत सिन्हा का भी चैप्टर क्लोज हो गया. पुलिस के मुताबिक, उसे छुड़ाने और उसके भागने के प्रयास के दौरान हुई मुठभेड़ में वह मारा गया.
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गैंगस्टर अमन साहू: रंगदारी का बड़ा नेटवर्क
रांची के बुढ़मू का रहने वाला अमन साहू झारखंड के सबसे चर्चित गैंगस्टरों में शामिल था. उसने कोयला कारोबारियों, ठेकेदारों और व्यवसायियों से रंगदारी वसूलकर अपना नेटवर्क खड़ा किया. रामगढ़, हजारीबाग, चतरा, रांची और कोयलांचल के अलावा छत्तीसगढ़ तक उसके गिरोह का असर था. जेल में रहते हुए भी वह अपने गुर्गों के जरिए नेटवर्क संचालित करता था. 11 मार्च 2025 को पलामू के चैनपुर में पुलिस कार्रवाई के दौरान उसकी मौत हो गई.
गैंगस्टर सुजीत सिन्हा: अपराध की दुनिया का पुराना चेहरा
सुजीत सिन्हा पलामू, गढ़वा, लातेहार, रांची और धनबाद में सक्रिय एक कुख्यात गैंगस्टर था. हत्या, रंगदारी, लेवी वसूली और आर्म्स एक्ट समेत उसके खिलाफ 75 से अधिक मामले दर्ज थे. अमन साहू के साथ मिलकर उसने संगठित रंगदारी का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया. जेल में रहने के बावजूद वह अपने गिरोह को निर्देश देता रहा. हाल ही में जेल शिफ्टिंग के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में उसकी मौत हो गई.
अब किसकी बारी?
अमन साहू और सुजीत सिन्हा के चैप्टर क्लोज होने के बाद अब झारखंड पुलिस की नजर राज्य में सक्रिय अन्य संगठित अपराधियों पर है. पुलिस खुफिया इनपुट के आधार पर कई गैंग और उनके सरगनाओं की गतिविधियों पर निगरानी रख रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब झारखंड पुलिस के टारगेट पर तीसरा बड़ा गैंगस्टर कौन होगा?
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