- नो एंट्री, वसूली और लापरवाही का खेल
- क्या हादसे के बाद ही जागेगा प्रशासन ?
Chatra : जिले के चतरा-डोभी मुख्य मार्ग एनएच-22 के लरकुआ मोड़ इलाके में इन दिनों ट्रक चालकों की मनमानी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण रोजाना भीषण जाम की स्थिति बन रही है.
डीएवी स्कूल से लेकर सेरेगड़ा जंगल और संघरी घाटी तक वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. सबसे अधिक दिक्कत शादी-विवाह जैसे आयोजनों में जा रहे लोगों को हो रही है. कई बार दूल्हे की गाड़ी घंटों जंगल में जाम में फंसी रह जाती है.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रक चालक सड़क पर ही बेतरतीब ढंग से वाहन खड़ा कर आराम करने लगते हैं, जिससे सड़क संकरी हो जाती है और आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है.
विपरीत दिशा से आने वाले बड़े वाहनों के कारण छोटे चारपहिया वाहन पूरी तरह फंस जाते हैं. स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब कुछ ट्रक चालक शराब के नशे में वाहन हटाने के बजाय लोगों से उलझ जाते हैं और बदसलूकी पर उतर आते हैं. इससे कभी भी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने पुलिस पेट्रोलिंग और पीसीआर टीम की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं. आरोप है कि घाटी क्षेत्र में रात के समय नियमित गश्त नहीं होती और पीसीआर में तैनात कर्मी सड़क किनारे वाहन खड़ा कर आराम करते नजर आते हैं, जिससे ट्रक चालकों का मनोबल बढ़ता जा रहा है.
वहीं, नगर पालिका के टैक्स संग्रह केंद्रों पर भी अनियमितता के आरोप लगे हैं. नो एंट्री खुलने के बाद बैरिकेड लगाकर नियमों के विरुद्ध वाहनों को रोककर वसूली की जा रही है, जिससे सिंगल लेन सड़क पर जाम और गंभीर हो जाता है.
हेरु नदी, सिमरिया रोड और पाराडीह स्थित केंद्रों पर भी यही स्थिति देखी जा रही है. इसके अलावा अनफिट और परमिट फेल ट्रकों की आवाजाही ने खतरे को और बढ़ा दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई बड़ा हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
हालांकि परिवहन विभाग का कहना है कि अनफिट और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ जल्द विशेष अभियान चलाया जाएगा. पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर जाम की समस्या को नियंत्रित करने का आश्वासन भी दिया गया है.
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