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चतरा : रेंजर को दोबारा एक्सटेंशन देने के प्रस्ताव पर समाजसेवियों की आपत्ति, PCCF को पत्र लिखा

चतरा जिले में वन विभाग के एक अधिकारी को नियमविरुद्ध दोबारा सेवा विस्तार दिए जाने के लिए सरकार को भेजी गयी डीएफओ की अनुशंसा पर विवाद गहराता जा रहा है. समाजसेवियों ने इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक, झारखंड सरकार को पत्र लिखकर अनुशंसा पत्र की प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
 
  • स्वास्थ्य, नियम और 10 साल की पोस्टिंग पर विवाद 
  • सूर्यभूषण के सेवा विस्तार अनुशंसा प्रक्रिया की भी जांच की मांग तेज

 Chatra : चतरा जिले में वन विभाग के एक अधिकारी को नियमविरुद्ध दोबारा सेवा विस्तार दिए जाने के लिए सरकार को भेजी गयी डीएफओ की अनुशंसा पर विवाद गहराता जा रहा है.

 

समाजसेवियों ने इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक, झारखंड सरकार को पत्र लिखकर अनुशंसा पत्र की प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

 

समाजसेवियों द्वारा भेजे गयेए पत्र में कहा गया है कि दक्षिणी वन प्रमंडल चतरा के वन क्षेत्र पदाधिकारी (रेंजर) सूर्यभूषण कुमार मूल सेवा काल 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने के साथ लगभग एक वर्ष पूर्व रिटायर्ड हो चुके थे. इसके बावजूद उन्हें पहले ही एक वर्ष का सेवा विस्तार सरकार द्वारा दिया जा चुका है और अब पुनः दोबारा विस्तार दिये जाने की नियमविरुद्ध पटकथा लिखी जा रही है.

 

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सूर्यभूषण कुमार गंभीर हृदय रोग से ग्रसित रहे हैं और उनके हार्ट का ऑपरेशन हो चुका है, साथ ही उनके शरीर में स्टेंट भी लगा है. ऐसे में वे जंगली इलाकों व अन्य फील्ड में कार्य करने योग्य नहीं हैं. उनकी शारीरिक क्षमता को लेकर समाजसेवीयों नें गंभीर सवाल उठाए हैं,

 

कहा है कि सरकार के निर्देशों के अनुसार वन विभाग पूरी तरह फील्ड आधारित विभाग है, जहां अधिकारियों और कर्मियों में पूर्ण शारीरिक फिटनेस की आवश्यकता है. इसके अलावा समाजसेवियों ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारी लगभग 10 वर्षों से एक ही क्षेत्र चतरा वन प्रमंडल अंतर्गत चतरा सदर, सिमरिया, पीरी, हंटरगंज और प्रतापपुर रेंज में पदस्थापित रहे हैं.

 

यह सामान्य प्रशासनिक नियमों और सरकार की स्थानांतरण नीति के विपरीत है. लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहने से रेंजर के साथ-साथ विभाग के पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. समाजसेवियों ने अपने पत्र में रेंजर के सेवा विस्तार से जुड़े सभी पहलुओं, दस्तावेजों, मेडिकल फिटनेस, सेवा अभिलेख और विभागीय आवश्यकता की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है  

 

साथ ही नियमों के अनुरूप पुनः बीमार (अस्वस्थ) व्यक्ति को सेवा विस्तार नहीं देने और किसी भी तरह की अनियमितता पाये जाने पर कार्रवाई करने की भी अपील की गयी है. आरोप है कि रेंजर ने मेडिकल फिटनेस में हृदय रोग और ऑपरेशन का जिक्र नहीं किया है.

 

आरोप है कि फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाकर डीएफओ और सीएफ को विश्वास में लेकर सरकार और विभाग को गुमराह करते हुए अनुशंसा पत्र भेजवाया है. इस पत्र की प्रतिलिपि राज्य के कई वरीय अधिकारियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजी गयी है, जिससे मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो सके.

 

समाजसेवियों नें पत्र कि प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव, वन सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF), अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) उत्तरी वन प्रमंडल चतरा, वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) दक्षिणी वन प्रमंडल चतरा व उपायुक्त चतरा के अलावे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भारत सरकार को भी भेजी है.

 

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