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कोयलांचल में नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व की शुरुआत, घाटों पर गूंजे छठ गीत और श्रद्धा के स्वर

  • धनबाद से निरसा तक घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
  • प्रशासन ने किए सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम

​Dhanbad :  कोयलांचल में लोक आस्था का महापर्व छठ आज नहाय-खाय के साथ पूरे उत्साह और भक्ति भाव से शुरू हो गया है. धनबाद, झरिया, सिंदरी, गोविंदपुर, बलियापुर, निरसा और आसपास के इलाकों में व्रतियों ने नदी, तालाबों और जलाशयों में स्नान कर सूर्य देव की आराधना कर इस पवित्र और अनुशासित व्रत की शुरुआत की.

 

​छठ पर्व का पहला दिन नहाय-खाय

छठ महापर्व का पहला दिन नहाय-खाय है. इस दिन का खास महत्व और मान्यता है. इस दिन व्रती  स्नान कर शरीर और मन को पवित्र कर व्रत की शुरूआत करती है. नहाय खाय के दिन ही छठ में चढ़ने वाला खास प्रसाद (ठेकुआ) के लिए गेंहू को धोकर सुखाया जाता है.

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व्रती खाती हैं सात्विक भोजन

छठ पूजा में सफाई और शुद्धा का विशेष ध्यान रखा जाता है. इस दिन से घर में लहसुन-प्याज नहीं बनता है. नहाय खाय में व्रती कद्दु-भात और चना दाल का सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं. यह खाना घी में बनाया जाता है. इस दिन खाना बनाने में सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है.

 

इस खाने को सबसे पहले व्रती खाती हैं. उसके बाद घर के सभी लोग इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. इस दिन से व्रती जमीन में सोती हैं. यह चरण व्रती को सांसारिक मोह से हटकर पूरी तरह ईश्वर भक्ति और आत्मसंयम के मार्ग पर अग्रसर करता है.

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मन्नत पूरी होने पर कर रहीं छठ व्रत : ऋतु 

​इस अवसर पर झरिया स्थित लाल बंगला दामोदर नदी स्नान करने पहुंची श्रद्धालु ऋतु ने कहा कि आस्था का महापर्व छठ अब बिहार और झारखंड में ही नहीं, पूरे देश में मनाया जाता है. काफी महत्व से छठ पूजा का. उन्होंने कहा कि छठी मंईयां सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं. वह भी पहली बार अपने पति की मन्नत पूरी होने पर छठ व्रत कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने सूर्य देव से परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की कामना की.

 

​चार दिनों का अनुशासित उत्सव

छठ पूजा का यह पर्व पूरी सादगी, शुद्धता और अनुशासन के साथ चार दिनों तक मनाया जाता है.

  • - 25 अक्टूबर (शनिवार) : नहाय-खाय के दिन सात्विक भोजन के साथ व्रत की शुरुआत
  • - 26 अक्टूबर (रविवार) :  खरना के दिन दिनभर निर्जला उपवास, शाम को गुड़-चावल की खीर, रोटी और केले का प्रसाद
  • - 27 अक्टूबर (सोमवार) : अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पण (डूबते सूर्य की पूजा)
  • -  28 अक्टूबर (मंगलवार) : उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन

 

​प्रकृति और सादगी का गहरा संदेश

​छठ पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जल, अन्न और सूर्य जैसे जीवन के आधार तत्वों की पूजा कर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और आभार प्रकट करने का पर्व है.  नहाय-खाय के दिन का सादा भोजन हमें सादगी और आत्मसंयम का महत्वपूर्ण संदेश देता है.

 

​छठ घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम

छठ महापर्व को देखते हुए धनबाद जिला प्रशासन , नगर निगम और सामाजिक संस्थाएं छठ घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के लिए तेजी से काम कर रही हैं. प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घाटों पर गोताखोर, एंबुलेंस और पुलिस बल की तैनाती की है.

 

 

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