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रांची डीसी रहते छवि रंजन ने बदल दी थी 10 साल पुरानी व्यवस्था, हिनू रजिस्ट्रार को 4 माह रांची सब रजिस्ट्रार के प्रभार में रखा

Vinit Upadhyay Ranchi :  रांची डीसी रहते हुए आईएएस छवि रंजन ने कई विभागों में मनमानी की है. उनके संदिग्ध कार्यों और विवादास्पद निर्णयों के खुलासे अब एक-एक करके हो रहे हैं. रंजन की छवि सबसे ज्यादा खराब हुई जमीन से. जमीन से संबंधित मामलों को लेकर किरकिरी हुई और उनके जेल जाने का कारण भी जमीन के कागजात में हेराफेरी ही बना. ईडी की अब तक की जांच में यह बात सामने आयी है कि जालसाजी कर बनाये गये विवादित जमीन के दस्तावेज के सहारे छवि रंजन और उनकी टीम के खिलाड़ियों ने शहर के कई इलाकों की बेशकीमती जमीन पर न सिर्फ कब्जा किया, बल्कि फर्जीवाड़ा कर जमीन की बेखौफ खरीद-बिक्री भी की गयी. जमीन के कागजात में हेराफेरी का खेल सिर्फ चंद दिनों में नहीं हुआ, बल्कि इसके लिए लंबी तैयारी की गयी. इस कड़ी में छवि रंजन ने डीसी रहते अपने मनमाफिक काम करने-कराने के लिए एक दशक से चले आ रहे पूर्व के उपायुक्तों के आदेश को दरकिनार कर हिनू के तत्कालीन रजिस्ट्रार घासीराम पिंगुआ को रांची (सदर) रजिस्ट्री ऑफिस का प्रभार दे दिया.

जितने दिनों तक छवि डीसी रहे, व्यवस्था बदल कर रखी

पूर्व से चली आ रही व्यवस्था के मुताबिक, रांची (सदर) रजिस्ट्री कार्यालय में नियुक्त रजिस्ट्रार (निबंधन अधिकारी) अगर किसी कारणवश अवकाश पर चले जाते हैं या फिर यह पद रिक्त रहता है, तो उस स्थिति में मोरहाबादी रजिस्ट्री कार्यालय के रजिस्ट्रार को रांची कार्यालय का पदभार लेते हुए रजिस्ट्री से संबंधित कार्यों को करने का आदेश वर्ष 2012 में जारी किया गया था. जिसका अनुपालन छवि रंजन के डीसी बनने के पहले और बाद तक होता रहा है. लेकिन जितने दिनों तक छवि रंजन डीसी रहे, उन्होंने अपनी मर्जी से व्यवस्था बदल दी. उन्होंने तत्कालीन रजिस्ट्रार अविनाश कुमार के हटने के बाद हिनू में पदस्थापित घासी राम पिंगुआ को रांची रजिस्ट्री कार्यालय (सदर) का चार्ज दे दिया. बाद में घासीराम पिंगुआ की नियुक्ति नियमित रूप से इसी कार्यालय में विभाग के आदेश से कर दी गयी. 27.02. 2019 से लेकर 03.02.2021 तक अविनाश कुमार रांची जिला अवर निबंधक के पद पर रहे. इसके बाद जब उन्हें हटाया गया तब 04.02.2021 से लेकर 27.06.2021 तक हिनू में पदस्थापित अवर निबंधक घासीराम पिंगुआ को तत्कालीन डीसी छवि रंजन ने रांची जिला अवर निबंधक का प्रभार दे दिया. करीब 4 महीने तक प्रभार में रहने के बाद राज्य सरकार ने 28.06.2021 को घासीराम को जिला अवर निबंधक बनाने का नोटिफिकेशन जारी किया.

4 महीने के प्रभार में छवि ने करवाए जमीन के दो बड़े खेल

रांची डीसी रहते हुए छवि रंजन ने एक दशक पुराने आदेश को दरकिनार रख कर जिस अवधि में मोरहाबादी रजिस्ट्रार की जगह हिनू रजिस्ट्रार को प्रभार में रखा, उस अवधि में शहर के दो बेशकीमती भूखंड बजरा मौजा के खाता नं. 140 और चेशायर होम रोड के खाता नं. 37 की खरीद-बिक्री के खेल हुए. विवादित भूमि की रजिस्ट्री करने के लिए छवि रंजन ने काफी दबाव बनाया था. छवि रंजन के गलत कागजात के आधार पर विवादित जमीन की रजिस्ट्री का दबाव बनाते रहे, जिसे देखते हुए ही तत्कालीन रजिस्ट्रार ने सेना के कब्जे वाली जमीन की डीड में नोटिंग कर दी थी.

बजरा मौजा की जमीन में बाउंड्री करायी, 83 साल की रसीद कटवा दी

पिस्का मोड़ से कटहल मोड़ जाने वाली फोर लेन सड़क के बगल की खाता नंबर 140 की 7 एकड़ 16 डिसमिल की जमीन है. ईडी ने अदालत को बताया है कि इस जमीन की बाउंड्री के लिए पूर्व डीसी ने पुलिस की तैनाती का आदेश दिया. साथ ही डीसी ने इस जमीन की 83 साल की रसीद काटने का आदेश जारी कर दिया. जमीन की खरीद-बिक्री 8 जून 2021 को चार अलग-अलग डीड के माध्यम से हुई थी.

चेशायर होम रोड की जमीन के म्यूटेशन के बदले ली सुविधाएं

ईडी ने अदालत को बताया है कि चेशायर होम रोड की भूमि की खरीद -बिक्री और म्यूटेशन में बड़ी साजिश रची गयी है. ईडी का आरोप है कि कोलकाता के दस्तावेज के आधार पर इस जमीन की खरीद-बिक्री हुई है. इसमें प्रेम प्रकाश, पुनीत भार्गव और व्यवसायी विष्णु अग्रवाल की भूमिका है. इन्होंने कारोबारी विष्णु अग्रवाल को जमीन बेच दी थी. खाता नंबर 37 की भूमि की खरीद-बिक्री एक अप्रैल 2021 को हुई थी और म्यूटेशन 12 मई 2021 को हुआ. रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन पर ईडी का आरोप है कि उन्होंने इस भूखंड के म्यूटेशन कराया और इसके बदले विष्णु अग्रवाल से सुविधाएं लीं.  

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