Ranchi : भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि छ्त्तीसगढ़ के शराब कंसलटेंट, सप्लायरों और झारखंड के उत्पाद विभाग ने मिलकर झारखंड के सरकारी राजस्व को 450 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा पहुंचाया है. इस बारे में कई बार मुख्यमंत्री को पत्राचार करने के बाद भी उनके द्वारा कोई कार्रवाई न करना साफ बता रहा है कि इस घोटाले में मुख्यमंत्री भी दोषी पदाधिकारियों के साथ समान रूप से भागीदार और हिस्सेदार हैं. गुरुवार को प्रेस वार्ता कर उन्होंने मांग की है कि जिन अफसरों की मिलीभगत से राज्य को 450 करोड़ रुपए के राजस्व की क्षति हुई है, उन पर एफआईआर दर्ज हो. सीएम कार्रवाई नहीं करेंगे तो ऊपर की एजेंसी तो जांच करेगी ही. मरांडी ने कहा कि सारा मामला छुपा और दबा रहा. झारखंड सरकार तब सक्रिय हुई, जब छत्तीसगढ़ में ईडी का छापा पड़ा और कई सुराग मिले. झारखंड सरकार के उत्पाद विभाग के सचिव और आयुक्त को नोटिस दिया गया, तब जाकर मामले में हड़कंप मच गया.
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दो पत्र लिखकर सरकार को आगाह किया था
मरांडी ने कहा कि उन्होंने 18 और 19 अप्रैल 2022 को लगातार दो पत्र लिखकर सरकार को आगाह किया था. 9 दिसंबर 2022 को भी पत्र लिखा. 19 अप्रैल को लिखे पत्र में साफ तौर पर कहा गया था कि पहले जो टेंडर हुआ था, उसमें से इनकी चहेती कंपनी, जिनसे सरकार के अधिकारी, दलाल, बिचौलियों ने डील कर रखी थी, उन लोगों के मनमाफिक टेंडर नहीं होने के कारण सरकार को दुबारा टेंडर निकालना पड़ा. हम जब सरकार को पत्र के माध्यम से राज्य में व्याप्त गड़बड़ियों को लेकर सचेत करते हैं, तो उस पर कार्रवाई के बजाय हमें पत्रवीर की उपाधि दी जाती है. सरकार और मुख्यमंत्री को लगातार सचेत करने के बाद भी कहीं कोई कार्रवाई और सुनवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करती है. स्वाभाविक है, जब मुख्यमंत्री मामलों पर संज्ञान नहीं लेंगे, तो उन्हें भी इसकी सजा देर -सबेर भुगतनी ही पड़ेगी. प्रेसवार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, प्रवक्ता सरोज सिंह, सह प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह भी उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें – एनटीपीसी">https://lagatar.in/ntpc-84-youths-who-took-skill-development-training-got-placement/">एनटीपीसी: कौशल विकास प्रशिक्षण लेने वाले 84 युवाओं को मिला प्लेसमेंट [wpse_comments_template]
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