जनवरी 2022 से योजना में तेजी लाई गई
शहरी जनसंख्या के गरीबी रेखा के नीचे के 31 प्रतिशत लोगों को मनरेगा की तरह 100 दिन का रोजगार देने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई थी. दिसंबर 2021 तक योजना की प्रगति काफी धीमी थी. 16 महीने में कई निकाय जॉब कार्ड और रोजगार देने में टारगेट से 75 फीसदी पीछे चल रहे थे. आवेदन करने की जानकारी नहीं होने के कारण कई जरूरतमंद योजना से वंचित थे. जनवरी 2022 से योजना में तेजी लाई गई. नगरीय प्रशासन निदेशालय की ओर से राज्य के सभी 50 नगर निकायों में शिविर लगाकर मजदूरों को योजना की जानकारी दी गई और उनसे आवेदन कराया गया. अब धीरे-धीरे इस योजना से शहरी मजदूर आत्मनिर्भर और सशक्त हो रहे हैं.आवेदक बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने के भी हकदार
श्रमिकों को सुरक्षित रोजगार देने के अलावा इस योजना का दूसरा लक्ष्य ये है कि इसके माध्यम से प्रदेश की संपदा को और बेहतर और सशक्त किया जा सके. टिकाऊ रोड, कैनाल, तालाब, कुआं, इमारतें, पार्क का निर्माण और पौधे लगाने जैसे बहुउयोगी कार्य भी इसके तहत हो रहे हैं. योजना के तहत निर्धारित श्रेणियों में कार्य उपलब्ध नहीं हो पाने पर आवेदक बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने के भी हकदार हैं. इसे भी पढ़ें - बीजेपी">https://lagatar.in/bjp-asked-nitish-is-rjds-corruption-over-now-why-cheated/">बीजेपीने नीतीश से पूछा, क्या अब खत्म हो गया राजद का भ्रष्टाचार, क्यों दिया धोखा [wpse_comments_template]

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