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बच्चों पर मंडराने लगा MIS-C (मल्टी सिस्टम इन्फ्लामेट्री सिंड्रोम) का खतरा, 2 से 18 साल के बच्चे हो सकते हैं प्रभावित

 

Saurav Shukla

- कावासाकी बीमारी से मिलता जुलता है MIS-C

- खून की नली को करता है प्रभावित

- हार्ट अटैक का खतरा अधिक

Ranchi: देश और राज्य में कोरोना की दूसरी लहर ने तबाही मचा रखी है. झारखंड में हर दिन हजारों की संख्या में कोरोना के संक्रमित मरीज मिले. वहीं सैकड़ों लोगों की मौत भी हर रोज हुई है. अब कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना व्यक्त की जा रही है. माना जा रहा है कि इसकी चपेट में सबसे अधिक बच्चे आएंगे. तीसरी लहर बच्चों को प्रभावित करेगी. पोस्ट कोविड के बाद मल्टी सिस्टम इन्फ्लामेट्री सिंड्रोम इन चिल्ड्रन (MIS-C) से कमोबेश शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करता है. खास कर खून की नली को सबसे अधिक प्रभावित करता है. जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. इसमें बच्चों को तेज बुखार आता है. 4-5 दिन तक बुखार कंट्रोल नहीं होता है. आंखों के अंदर लाली, दस्त के अलावा शरीर के सभी अंगों पर इसका प्रभाव दिखता है.

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डॉ राजेश कुमार, निदेशक, बालपन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल

प्रारंभिक चरण में बीमारी के पकड़ आने पर इलाज संभव

बालपन चाइल्ड हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ राजेश कुमार ने बताया कि कोरोना होने के दो से चार हफ्ते के बीच यह लक्षण देखा जा रहा है. यह एक पोस्ट वायरल कॉम्प्लिकेशन है. समय पर बीमारी के पकड़ में आ जाने पर इलाज संभव है. इलाज के लिए इंट्रा वेनस इम्मयूनो ग्लोबलिन (IVIG) के अलावा स्टेरॉइड का इस्तेमाल किया जाता है. पहले भी ऐसी बीमारी देखी गयी है जिसे कावासाकी के नाम से जाना जाता था. MIS-C भी इसी बीमारी से मिलता जुलता है. इलाज भी कावासाकी से मिलता जुलता है.

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12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को करेगा प्रभावित

डॉ राजेश ने कहा कि कोरोना की पहली लहर ने बुजुर्गों को प्रभावित किया. तो दूसरी लहर ने व्यस्क लोगों को प्रभावित किया. इसी से अनुमान लगाया जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेगी. हालांकि चिकित्सक मानते हैं कि छोटे बच्चों को यह लहर ज्यादा गंभीर रूप से प्रभावित नहीं करेगी. 12 साल से अधिक उम्र के बच्चे ज्यादा प्रभावित होंगे. ACE-1 और ACE-2 रिसेप्टर कोशिका के अंदर होता है उसी के माध्यम से वायरस शरीर के अंदर जाता है.

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