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झारखंड में गायब हो जाते हैं बच्चे, प्राथमिकी तक दर्ज नहीं होती

Ranchi (Shruti prakash singh) : झारखंड में वर्षों से बच्चों के गायब होने का सिलसिला जारी है. कई मामलों में तो बच्चे के गायब होने का एफआईआर तक दर्ज नहीं होती है. इस सिलसिले में  खूंटी चाइल्ड वेलफेयर कमिटी की चेयरपर्सन तनुश्री सरकार से बुधवार को कहा कि खूंटी जिले के साथ ही पूरे राज्य में ह्यूमन ट्रैफिकिंग और चाइल्ड ट्रैफिकिंग का मामला बहुत ही गंभीर है. अप्रैल से आज तक लगभग 20- 22 बच्चों का रेस्क्यू सीडब्ल्यूसी ने खुद किया है. उसमें से सिर्फ दो बच्चों की ही एफआईआर कॉपी मिली है. सोचने वाली बात ये है कि जब 20 से अधिक बच्चे गायब हुए, तो इसकी एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई. तनुश्री सरकार ने बताया कि उनका कार्यकाल खूंटी जिले में छह अप्रैल 2022 से शुरू हुआ. इससे पहले वह रांची सीडब्ल्यूसी की मेंबर थी. उसके पश्चात हजारीबाग जिले में उन्होंने सीडब्ल्यूसी चेयरपर्सन के तौर पर काम किया. अभी चार महीने से खूंटी जिले के सीडब्ल्यूसी की कमान संभाल रही हैं.

परिवार खूद तस्करों के जरिये बच्चों को झारखंड से बाहर भेजता है

तनुश्री बताती हैं कि जब रेस्क्यू किये गए बच्चों से पूछताछ करती है तो बहुत आसानी से पता चलता है कि यह मामला मानव तस्करी का है. उनके अनुभव के हिसाब से जब उन्होंने बच्चो के परिवार वालों से बात की, तो पता चला कि जो इंसान तस्कर है, वो असल मामले में उनके लिए भगवान है. तो कहीं न कहीं परिवार खुद ही तस्कर के साथ मिल कर बच्चों को झारखंड से बाहर भेजता है. बाद में पता लगता है कि बच्चों के साथ गलत हो रहा है. अब या तो वह देह व्यापार का मामला होता है या फिर चाइल्ड लेबर का. इसे भी पढ़ें -लेक्चरर">https://lagatar.in/sahibganj-police-found-the-missing-youth-pretending-to-be-death/">लेक्चरर

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बंगाल के बाद सबसे ज्यादा ट्रैफिकिंग झारखंड से ही होती

तनुश्री सरकार ने बताया कि उन्होंने बच्चों की शिक्षा के लिए, परिवार को जागरूक करने के लिए कई चीजें की हैं. जिससे लोग खुद आगे बढ़ कर सामने आएं. देश में बंगाल के बाद सबसे ज्यादा ट्रैफिकिंग झारखंड से ही होती है. और सबसे ज्यादा खूंटी जिले का मामला होता है. बीते 20 जून को भी पंजाब से 43 बच्च रेस्क्यू किये गए थे. जो सारे झारखंड के थे. इनमें से 21 बच्चे खूंटी जिले के थे. ऐसे कई मामले आये दिन सामने आते रहते हैं. तनुश्री सरकार ने बताया कि ट्रैफकिंग या मजदूरी के पीछे सबसे बड़ी वजह गरीबी, जागरूकता की कमी है. कहा कि आदिवासी समुदाय एक बहुत सरल समुदाय है, जिसका कोई भी बहुत गलत फायदा उठा सकता है. और वही तस्कर करते हैं. कई केसेस तो ऐसे भी देखने को मिले हैं कि जो बच्चा मानव तस्कर का शिकार होता है, कुछ साल बाद वही तस्करी करने लगता है. उनका ब्रेन वाश किया जाता है. बहला फुसला कर परिवार से बच्चों को ले जाते हैं और फिर उन बच्चों का गलत इस्तमाल किया जाता है.

आदिवासी समुदाय को मिलती है सरकारी मदद

सरकार से कुछ मदद मिली या नहीं इस पर तनुश्री ने बताया कि वर्तमान सरकार आदिवासी समुदाय को काफी आगे बढ़ाये हुए है. सरकार अच्छा काम कर रही है. वर्तमान सरकार बहुत सारी योजनाएं दे रही है, जिससे कि आर्थिक रूप से समाज को लाभ मिल रहा है. इसे भी पढ़ें - लेक्चरर">https://lagatar.in/no-rule-to-give-points-on-the-basis-of-naac-grading-in-lecturer-appointment-suraj-kumar/">लेक्चरर

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