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थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को नहीं मिल रहा पर्याप्त ब्लड, पलामू में बढ़ी चिंता

जिले में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है. नियमित रक्त की जरूरत होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त ब्लड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. इससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार पलामू जिले में करीब 150 बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित हैं, लेकिन इनमें से मात्र 60 से 70 बच्चों को ही समय पर रक्त मिल पा रहा है.
 

Rewti Raman 

Medininagar: जिले में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है. नियमित रक्त की जरूरत होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त ब्लड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. इससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार पलामू जिले में करीब 150 बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित हैं, लेकिन इनमें से मात्र 60 से 70 बच्चों को ही समय पर रक्त मिल पा रहा है.

 

बाकी बच्चों को ब्लड की कमी के कारण इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. चाईबासा में बीते अक्टूबर पांच थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाने के बाद एचआईवी पॉजीटिव हो गए थे. इसके बाद सरकार ने संज्ञान लेते हुए ब्लड  सैंपल की जांच हेतु इसे रिम्स भेजने आदेश निर्गत किया था.

 

नियमित ब्लड नहीं मिलने से बढ़ रहा खतरा

थैलेसीमिया के मरीजों को हर 15 से 20 दिन में रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है. ऐसे में ब्लड की कमी उनके जीवन के लिए गंभीर खतरा बन रही है. परिजनों का कहना है कि कई बार ब्लड के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है. ब्लड की कमी की एक बड़ी वजह NAT टेस्ट की अनिवार्यता भी है.

 

यह आधुनिक जांच पद्धति ब्लड में मौजूद संक्रमण जैसे HIV, हेपेटाइटिस बी और सी को शुरुआती अवस्था में ही पकड़ने में सक्षम है, जिससे मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया जा सके. सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के तहत ब्लड बैंक में एकत्रित हर यूनिट रक्त की जांच NAT पद्धति से करना आवश्यक कर दिया गया है.

 

पूरे राज्य में NAT जांच हेतु रिम्स ही विकल्प

हालांकि पलामू जिले में NAT टेस्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है. पूरे झारखंड में यह सुविधा केवल रिम्स में ही मौजूद है. ऐसे में ब्लड सैंपल को जांच के लिए बाहर भेजना पड़ता है, जिससे समय में देरी होती है और कई बार आपात स्थिति में मरीजों को समय पर ब्लड नहीं मिल पाता. वहीं, NAT मशीन की कीमत करीब 25 लाख रुपए होने के कारण जिला स्तर पर इसकी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है.

 

जागरूकता के अभाव में नहीं मिल रहे डोनर

इस संबंध में सीनियर लैब तकनीशियन मो. अनवर आलम ने बताया कि लोगों में रक्तदान को लेकर जागरूकता की कमी भी एक बड़ी समस्या है. कई लोग डर या भ्रांतियों के कारण रक्तदान करने से कतराते हैं, जिससे ब्लड बैंक में पर्याप्त स्टॉक नहीं हो पाता. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिले में NAT टेस्ट की सुविधा शुरू की जाए और व्यापक स्तर पर रक्तदान जागरूकता अभियान चलाया जाए, तो थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को बड़ी राहत मिल सकती है.

 

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