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शिक्षा व स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाकर चीन आज इस मुकाम तक पहुंचा

2000 में जहां शिक्षा में चीन का बजट मात्र 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, वह 2025 में बढ़कर 800 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है और स्वास्थ्य में यह बजट 54 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 1400 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया है. इस प्रकार इन 25 वर्षों में चीन ने अपनी शिक्षा में 26 गुणा तो स्वास्थ्य में लगभग 25 गुणा संसाधनों में वृद्धि की है. परिणाम स्वरूप आज विश्व के 10 शीर्ष शोध संस्थानों में 9 चीन के हैं और एक अमेरिका का. इस प्रकार चीन के चातुर्दिक विकास की कहानी से यह तथ्य साबित होता है कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति उस राष्ट्र के मानव संसाधन की उन्नति किए बगैर संभव नहीं.
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Pramod Sah

 

21 वीं सदी में अपनी विकास यात्रा से जिन राष्ट्रों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है उनमें सबसे महत्वपूर्ण है, चीन. चीन में किंग राजवंश 1644 से 1912 तक भ्रष्टाचार प्रशासनिक अक्षमता, निरंकुशता का प्रतीक था. जिसमें फ्रांस, इंग्लैंड, जापान ने चीन पर अलग-अलग तरीके से दबाव बनाया था. तब चीन की उपस्थिति एक शर्मिंदा राष्ट्र के रूप में दर्ज रही, जिसके बंदरगाहों पर विदेशियों का कब्जा था और चीन एक लैंडलॉक्ड कंट्री के रूप में जाना जाता था.

 

हालांकि चीन के पास शंघाई, निंगबो, शोनजोन जैसे बड़े बंदरगाह थे, जो सभी विदेशी कब्जों में थे, इसलिए 1949 में कम्युनिस्ट क्रांति के तुरंत बाद चीन ने अपने बंदरगाहों का राष्ट्रीयकरण किया और अपनी लैंडलॉक्ड कंट्री की पहचान को बदलने के लिए और बंदरगाहों के जरिए दुनिया तक व्यापार बढ़ाने के प्रयास किए.

 

बंदरगाहों का  विस्तार करते हुए चीन ने 2013 से प्रभावी अपने वन रोड वन बेल्ट इनिशिएटिव के तहत पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह, श्रीलंका के हंबन टोटा, अफ्रीका के जिबूती और ग्रीस के पीरियस बंदरगाह के साथ ही बंग्लादेश और भूटान में भी हवाई अड्डों का विस्तार कर रहा है. इस प्रकार बंदरगाहों यानी समुद्री मार्ग से चीन ने अपना अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क स्थापित कर लिया है. बंदरगाहों के विस्तार की रणनीति ने चीन को विश्व व्यापार का प्रमुख खिलाड़ी बना दिया है.

 

वर्ष 2000 में चीन का कुल व्यापार 474.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसमें निर्यात 249.2 बिलियन डॉलर और आयात 225.1 बिलियन डॉलर था. जो 2024 में बढ़कर 6300 बिलियन अमेरिकी डॉलर के करीब पहुंच गया. इसमें निर्यात लगभग 3600 बिलियन डॉलर और आयात लगभग 2700 बिलियन डॉलर हो गया. इस अवधि में चीन के निर्यात में लगभग 14 गुना और आयात में लगभग 11 गुना की वृद्धि हुई है.

 

इसी अवधि में अमेरिका का व्यापार 2040 बिलियन डॉलर से बढ़कर 5380 बिलियन डॉलर हुआ, यह वृद्धि मात्र 167 प्रतिशत है. अमेरिका के व्यापार की इस वृद्धि के अनुपात में चीन की वृद्धि 8 गुना अधिक हुई और व्यापार में इस वृद्धि ने चीन को विश्व मंच पर एक ताकत के रूप में स्थापित कर दिया. चीन अब दुनिया की फैक्ट्री है और दुनिया चीन का बाजार, चीन ने अपनी आक्रामक व्यापार विस्तार की रणनीति के कारण एक दिशा नहीं बल्कि हर दिशा में तरक्की की है.

 

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में चीन की मोनोपोली है तो वहीं आयुद्ध बाजार में भी चीन अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है. शस्त्र बाजार में चीन के शस्त्र किसी भी परंपरागत शस्त्र निर्यातक देश फ्रांस अमेरिका आदि के मुकाबले एक तिहाई कीमत में उपलब्ध हैं और उनकी क्षमता अभी दुनिया जानती नहीं है. अपने प्रदर्शन से वह आश्चर्यचकित कर रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के राफेल के मुकाबले एक तिहाई कीमत का J-10 फाइटर काफी प्रभावी साबित हुआ तो वही पांचवीं पीढ़ी का J-35 शब्द भेदी और दृष्टि ओझल क्षमता से परिपूर्ण है.

 

चीन के CH-5 ड्रोन और HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम ने विश्व शस्त्र बाजार को काफी प्रभावित किया है. ताजा ईरान-इजरायल युद्ध में ईरान जिस मजबूती से इजराइल का मुकाबला कर रहा है, उसके पीछे भी चीन के शस्त्र बाजार की ताकत है. विश्व आयुद्ध बाजार में अचानक चीन की भागीदारी 2021 में 5.02% जर्मनी के बाद पांचवें नंबर पर पहुंच गई थी. अब यह भागीदारी में कभी भी बढकर अमेरिका की बराबरी भी कर सकता है.
 

अमेरिका ने अपने चौतरफा विकास यात्रा का आधार अपने मानव संसाधन के विकास को ही बनाया है. उसने 2000 से 2025 के मध्य सबसे अधिक प्राथमिकता अपने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को दी है. 2000 में जहां शिक्षा में चीन का बजट मात्र 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, वह 2025 में बढ़कर 800 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है और स्वास्थ्य में यह बजट 54 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 1400 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया है. 

 

इस प्रकार इन 25 वर्षों में चीन ने अपनी शिक्षा में 26 गुणा तो स्वास्थ्य में लगभग 25 गुणा संसाधनों में वृद्धि की है. परिणाम स्वरूप आज विश्व के 10 शीर्ष शोध संस्थानों में 9 चीन के हैं और एक अमेरिका का. इस प्रकार चीन के चातुर्दिक विकास की कहानी से यह तथ्य साबित होता है कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति उस राष्ट्र के मानव संसाधन की उन्नति किए बगैर संभव नहीं.

 

डिस्क्लेमर : यह लेखक के निजी विचार हैं.

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