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चीन का हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा से पीछे हटने से इनकार,भारत को जितना हासिल हुआ, उतने से खुश रहने की नसीहत

NewDelhi : भारत और चीन के बीच तनाव बरकरार है. लद्दाख स्थित एलएसी पर तनाव का करने की जद्दोजहद अब भी जारी है. इस बीच खबर आयी है कि कुछ दिन पहले ही पैंगोंग सो छोड़ने के बाद एलएसी पर टकराव वाली और जगहें चरणबद्ध तरीके से छोड़ने का वादा करने वाला चीन  हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा से पीछे हटने को तैयार नहीं हो.  जान लें कि 15 दिन बाद भारत और चीन के बीच लद्दाख पर शुरू हुए तनाव को एक साल पूरे हो जायेंगे

9 अप्रैल को भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई

द संडे एक्सप्रेस के अनुसार 9 अप्रैल को भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी. सूत्रों के अनुसार  चीनी सेना ने हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा के अलावा डेपसांग प्लेन्स से भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. चीन के साथ विवाद सुलझाने में शामिल रहे एक सूत्र के अनुसार चीन ने पहले हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा के पैट्रोलिंग पॉइंट 15 और पैट्रोलिंग पॉइंट-17ए से सेना पीछे हटाने पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में उसने  इनकार कर दिया. हाल में दोनों सेनाओं के बीच जो बात हुई है, उसमें चीन ने कहा है कि भारत को जो कुछ हासिल हुआ है, उसे उससे खुश होना चाहिए.

पीपी-15 और पीपी-17ए पर चीनी सेना की प्लाटून तैनात है

जानकारी के अनुसार पीपी-15 और पीपी-17ए पर चीनी सेना की प्लाटून तैनात है.  यह पहले की कंपनी की तैनाती से कुछ कम संख्या है. भारतीय सेना के एक प्लाटून में 30-32 जवान होते हैं,  जबकि कंपनी में 100 से 120 सैनिक होते हैं. सूत्रों के अनुसार इन जगहों पर आवाजाही के लिए सड़कों की जरूरत नहीं पड़ती. यहां पत्थर के रास्तों पर भी चला जा सकता है और यहां पलटवार की क्षमता भी काफी तेज है. सूत्र ने यह भी कहा कि चीनी सेना भारतीय सीमा के काफी अंदर हैं.

 पैंगोंग सो से चीनी सेना ने फरवरी में लौटने का ऐलान कर दिया था

 पैंगोंग सो से चीनी सेना ने फरवरी में ही लौटने का ऐलान कर दिया था. तबसे तनाव वाले फिंगर-4 इलाके से लेकर फिंगर-8 तक के इलाके में दोनों ही सेनाओं की गश्त बंद है. बताया गया है कि भारत फिंगर-8 तक पहुंचने में कभी सफल ही नहीं हो पाया है, जिसे वह तनाव से दो-तीन साल पहले तक असल एलएसी मानता रहा है. साथ ही   डेपसांग प्लेन्स पर स्थिति दोनों देशों के बीच तनाव से पहले ही बिगड़ी हुई है.

 यहां भारतीय सेना 2013 के बाद से ही पारंपरिक गश्त सीमा तक नहीं पहुंच पायी है. डेपसांग का मुद्दा हाल ही में सैन्य कमांडरों की बातचीत में जोड़ा गया है. सूत्र का कहना है कि लद्दाख में चीन से तनाव के दौरान डेपसांग में कुछ भी नहीं हुआ था. यहां चीनी सेना गश्त वाले इलाकों में आकर सेना को रोक देती है.

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