New delhi : लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल ( LAC) पर सेना की वापसी का हल तलाशने और भारत के साथ अच्छे संबंध बहाल करने के उद्देश्य से चीन के विदेश मंत्री वांग यी इस महीने के आखिरी हफ्ते दिल्ली आ रहे हैं. वांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्रिक्स शिखर बैठक में हिस्सेदारी के लिए बीजिंग आने का न्योता देंगे.जानकारों के अनुसार यूक्रेन-रुस युद्ध का असर विश्व राजनीति पर देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि रुस के दबाव का असर है कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीनी सेना की वापसी हो सकती है. पिछले साल फरवरी पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर पर सेनाओं की आमने-सामने की तैनाती हुई थी. इसे भी पढ़ें-जी">https://lagatar.in/effect-of-g23-pressure-sonia-calls-azad-to-meet-rahul-has-met-hooda/">जी
23 के दबाव का असर : सोनिया ने आजाद को मिलने के लिये बुलाया, हुड्डा से मिल चुके हैं राहुल भारत ने चीन के सामने LAC पर मई 2020 के पहले की स्थिति बहाल करने की शर्त रखी है और चीन इसके लिए तैयार भी हो चुका है. सूत्रों का मानना है कि अगर भारत सहमत हुआ तो ब्रिक्स की तैयारी बैठक के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर जाएंगे.LAC के मुद्दे पर भारत साफ कर चुका है कि बैठक में मोदी की हिस्सेदारी सरहद पर तनाव खत्म करने पर ही हो सकती है. इसलिए चीन अब नरम पड़ चुका है, इस वजह से मास्को एग्रीमेंट लागू कर इस समस्या को सुलझाया जा सकता है. इसे भी पढ़ें-विधायकों">https://lagatar.in/three-categories-of-mlas-know-whom-the-media-is-looking-for-who-are-journalists-and-who-are-karmaveer/">विधायकों
की तीन केटेगरी: जानिये किन्हें ढूंढता है मीडिया, कौन ढूंढते हैं पत्रकार और कौन हैं कर्मवीर ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका की हिस्सेदारी वाला ब्रिक्स फोरम भारत और चीन के बीच तनातनी खत्म करने का माध्यम बन रहा है. 2017 में ब्रिक्स बैठक से पहले डोकलाम में तनातनी खत्म हुई थी. चीन का एजेंडा साफ है. वह रूस के साथ रहते हुए अपने व्यापारिक हित भी साधना चाहता है. [wpse_comments_template]
23 के दबाव का असर : सोनिया ने आजाद को मिलने के लिये बुलाया, हुड्डा से मिल चुके हैं राहुल भारत ने चीन के सामने LAC पर मई 2020 के पहले की स्थिति बहाल करने की शर्त रखी है और चीन इसके लिए तैयार भी हो चुका है. सूत्रों का मानना है कि अगर भारत सहमत हुआ तो ब्रिक्स की तैयारी बैठक के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर जाएंगे.LAC के मुद्दे पर भारत साफ कर चुका है कि बैठक में मोदी की हिस्सेदारी सरहद पर तनाव खत्म करने पर ही हो सकती है. इसलिए चीन अब नरम पड़ चुका है, इस वजह से मास्को एग्रीमेंट लागू कर इस समस्या को सुलझाया जा सकता है. इसे भी पढ़ें-विधायकों">https://lagatar.in/three-categories-of-mlas-know-whom-the-media-is-looking-for-who-are-journalists-and-who-are-karmaveer/">विधायकों
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