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धर्म के नाम पर प्रताड़ना के खिलाफ ईसाई समुदाय ने निकाला मौन जुलूस

  • छत्तीसगढ़ की घटना के खिलाफ रांची में मौन जुलूस.
  • राजधानी की सड़कों पर ईसाई समुदाय का फूटा गुस्सा.
  • मौन जुलूस में बड़ी संख्या में महिला पुरुष ने भाग लिया.

Ranchi : छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर ननों और आदिवासी युवकों-युवतियों को धर्म परिवर्तन के झूठे आरोप में जेल भेजे जाने के विरोध में रविवार को ईसाई समुदाय ने रांची में मौन जुलूस निकाला. मौन जुलूस का आयोजन ऑल चर्चेज कमेटी के बैनर तले किया गया था. इसमें ईसाई समुदाय के लोगों ने एकजुटता दिखायी. 

 

मौन जुलूस में ईसाई समुदाय के लोगों ने पैदल मार्च किया. सरकार व प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया. इस दौरान लोगों में छत्तीसगढ़ सरकार के खिलाफ आक्रोश दिखा.

 

मौन जुलूस की शुरुआत दोपहर करीब 1.00 बजे जीईएल चर्च परिसर से हुई. जुलूस से पहले मार्शल केरकेट्टा ने प्रार्थना की. इसके बाद मौन जुलूस निकला. लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लिए थे. जुलूस मेन रोड, अल्बर्ट एक्का चौक से गुजरते हुए राजभवन के बाहर पहुंचा.

 

राजभवन के बाहर जुलूस सभा में तब्दील हो गया. जहां ईसाई धर्मगुरुओं ने अपनी बात रखी. ईसाई धर्म गुरुओं ने सरकार से मांग किया कि मानवाधिकार की रक्षा की जाये. और अल्पसंख्यकों को न्याय मिले.

 

आर्चबिशप विंसेंट आईंद ने सभा में कहा कि भारत विविधता का देश है, लेकिन कुछ राज्यों में अल्पसंख्यकों के अधिकार को कुचला जा रहा हैं. आज का मोन जूलीस मानवाधिकार और न्याय की रक्षा के लिए है.

 

जीईएल चर्च के मॉडरेटर मार्शल केरकेट्टा ने अपने भाषण में घटना को धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि हम शिक्षा और स्वास्थ्य के जरिए समाजसेवा करते हैं, फिर भी तिरस्कार झेलना पड़ता है. अब ऐसी घटनाएं बर्दाश्त नहीं होंगी.

 

सीएनआई चर्च के बिशप बीबी बास्के ने कहा कि यदि दुबारा ऐसी घटनाएं हुईं तो पूरा कलीसिया एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करेगा. एनडब्ल्यूजीईएल चर्च के बिशप निस्तार कुजूर ने कहा कि स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता हमारा मौलिक अधिकार है. सरकार शांति, न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करे.

 

ऑल चर्चेज कमिटी के सचिव जोलजस कुजूर, सभापति कुलदीप तिर्की और समन्वयक सुनील खलखो समेत अन्य वक्ताओं ने सभा में कहा कि संविधान विरोधी घटनाओं को रोका जाए और निर्दोषों को न्याय मिले. अल्पसंख्यक समुदाय का अधिकार पर हमला हुआ तो होगा संघर्ष और तेज होगा.  रैली में शामिल लोगों का कहना था कि यदि अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन जारी रहा तो यह संघर्ष और व्यापक रूप लेगा.

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