Ranchi: राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा ईसाई आदिवासियों द्वारा प्रायोजित है. यह बात आदिवासी सामाजिक नेता लक्ष्मी नारायण मुंडा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही. उन्होंने कहा कि सरना आदिवासियों के ऊपर सरना प्रार्थना स्थापित की जा सके और ईसाई और सरना के बुनियादी अंतर्विरोध को छिपाया जा सके. आगे कहा कि जब से सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह कहा गया है कि जो आदिवासी अपनी परंपरा, संस्कृति, रीति रिवाज, रुढ़ीवादी प्रथा को मानता है, वही आदिवासी हो सकता है. इसलिए षड्यंत्र के तहत सरना प्रार्थना सभा को पूरे आदिवासी सरना समुदाय में स्थापित कर सरना और ईसाई के अंतर को छिपाने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है. आज सरना प्रार्थना सभा सरना समुदाय के बीच चर्च का अनुसरण कर सारे क्रियाकलाप को थोपने काम किया जा रहा है. यही समूह अपने आदिवासी समुदाय के लोगों की जमीन हड़पकर, लूटकर, कब्जा किए हुए है, जो बदस्तूर आज भी जारी है. यही लोग राज्य की आदिवासियों की भाषा, संस्कृति, परंपरा,कर्मकांड को अपने जातीय हितों के अनुरूप काम कर रही है. सरना प्रार्थना सभा का पूरा कंसेप्ट चर्च का अनुसरण है. इसमें प्रकृति का पूजने से लेकर याद करने में चर्च के क्रियाकलाप कर्मकांड की पूरी तरह नकल की जाती है. इसे भी पढ़ें- रांचीः">https://lagatar.in/ranchi-kalash-yatra-on-monday-5100-women-will-be-involved/">रांचीः
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ईसाई आदिवासियों ने प्रायोजित की है राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा: लक्ष्मी नारायण मुंडा
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