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झारखंड में विकास मद का सिविल डिपोजिट में जमा राशि 10 साल में तीन गुणा बढ़कर 9827 करोड़ हुआ

Ranchi: राज्य में विकास योजनाओं का 9827 करोड़ रुपये सिविल डिपोजिट में पड़ा है. सरकार द्वारा विकास योजनाओ के लिए निर्धारित राशि खर्च नहीं कर पाने की स्थिति में उसे ट्रेजरी से निकाल कर सिविल डिपोजिट में रख दिया जाता है. इससे हर वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में सिविल डिपोजिट में रखी गयी राशि बजट के लेखा-जोखा में खर्च दिखायी जाती है. लेकिन वास्तव में संबंधित वित्तीय वर्ष के दौरान वह राशि खर्च नहीं होती है.

राज्य सरकार हर वित्तीय वर्ष के लिए विधानसभा से पारित बजट में विभिन्न प्रकार की विकास योजनाओं के लिए राशि खर्च करने के लिए राशि का प्रावधान करती है. बजटीय प्रावधान के आलोक में योजनाओं की स्वीकृति और राशि खर्च करने के लिए आवंटन आदेश जारी किया जाता है. विकास योजनाओं के लिए निर्धारित राशि को उसी वित्तीय वर्ष के अंत तक खर्च करने का नियम है. पूरी राशि खर्च नहीं होने की स्थिति में विकास योजना के लिए बची हुई राशि सरेंडर करने का प्रावधान है. 

 

 

इसके बाद अगले वित्तीय वर्ष के दौरान बजट में संबंधित योजनाओं के लिए राशि का प्रावधान कर खर्च करने का नियम है. लेकिन राज्य सरकार वित्तीय वर्ष के अंत में विकास योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से बची हुई राशि को सरेंडर करने के बदले ट्रेजरी से निकाल कर सिविल डिपोजिट में रख देती है. 

साथ ही बाद में संबंधित विकास योजनाओं पर सिविल डिपोजिट से निकाल कर खर्च करती है. ऐसा करना झारखंड ट्रेजरी कोड के नियमों के खिलाफ है. महालेखाकार द्वारा विकास मद का पैसा सिविल डिपोजिट में रखने पर आपत्ति दर्ज करायी जाती रही है.

 

 

इसके बावजूद सरकार सरेंडर के बढ़े हुए आंकड़ों से बचने के लिए विकास योजनाओं की बची हुई राशि सिविल डिपोजिट में रखती है. वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 साल के दौरान सिविल डिपोजिट में रखी हुई राशि में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है. 

विभागीय आंकडों के अनुसार वित्तीय वर्ष एक अप्रैल 2015 के सिविल डिपोजिट में 3158 करोड़ रुपये था. 2015-16 में सरकार ने विकास मद का 1618 करोड़ रुपये सिविल डिपोडिट में रखा. साथ ही 1393 करोड़ रुपये निकाल कर खर्च किया. इस तरह वित्तीय वर्ष 2015-16 के अंत में सिविल डिपोजिट मे जमा राशि 3158 करोड़ रुपये से बढ़ कर 3384 करोड़ रुपये हो गयी. 

इसके बाद के वित्तीय वर्षों के दौरान भी सरकार ने जिस वित्तीय वर्ष में जितनी राशि सिविल डिपोडिट में रखा उससे कम राशि निकाल कर खर्च की. इससे सिविल जिपोडिट में जमा राशि लगातार बढ़ती गयी. वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंत में सिविल डिपोजिट में जमा राशि बढ़ कर 9827 करोड़ रुपये हो गयी. यह वित्तीय वर्ष में 2015-16 में सिविल जिपोडिट में पड़ी राशि के मुकबले करीब तीन गुना है.

 

सिविल डिपोजिट में बढ़ती राशि (करोड़ में)

वित्तीय वर्ष बची राशि
2015-16 3384
2016-17 4149
2017-18 5154
2018-19 5420
2019-20 7339
2020-21 7819
2021-22 7843
2022-23 8192
2023-24 9314
2024-25 9827

 

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