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CJI ने कहा- जज को दूसरों की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए, न्यायाधीशों के प्रति आम लोगों में गलत धारणा बनी हुई है

Vinit Upadhyay Ranchi: भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा है कि सोशल मीडिया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया जीरो एकाउंटेबिलिटी के तहत काम कर रहे हैं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया अदालतों के आदेश को तोड़-मरोड़कर देश की न्यायपालिका की छवि गलत तरीके से पेश करते हैं. इससे देशभर के न्यायाधीशों के आदेश पर कई सवाल खड़े होने लगते हैं. रांची की ज्यूडिशियल अकादमी में जस्टिस एसबी सिन्हा मेमोरियल लेक्चर को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया खास कर सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संयम रखें. सोशल मीडिया को ज्यूडिशियरी की स्वतंत्रता पर भी ध्यान देना होगा. कहा कि हम लोग एक गाइडिंग फैक्टर के रूप में किसी मामले को नहीं सुलझा सकते. मीडिया ऐसे मामलों को भी उछालता है. यह हानिकारक (डेट्रीमेंटल) होता है. हमलोगों को समाज में लोकतंत्र की भावनाओं को देखते हुए काम करना पड़ता है. भारत के मुख्य न्यायाधीश ने आज प्रमंडलीय न्यायालय चांडिल और नगर उंटारी का उद्घाटन करते हुए अपने विचार रखे. इस क्रम में उन्होंने प्रोजेक्ट शिशू के तहत छात्रवृति का वितरण भी किया.

प्रैक्टिस ऑफ लॉ के तहत सबकी भागीदारी सुनिश्चित किया जाना जरूरी 

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमलोग एक क्राइसिस सोसाइटी में रह रहे हैं. न्याय के लिए हमें भटकना पड़ रहा है. न्यायिक अधिकारियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. रोल ऑफ जज भी बड़ी बात है. कहा कि रोल ऑफ जज की भूमिका काफी बदल रही है. समाज से न्यायपालिका को काफी उम्मीदें हैं. CJI के अनुसार सुलभ न्याय सबकी बराबरी, प्रैक्टिस ऑफ लॉ के तहत सबकी भागीदारी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है. सामाजिक आर्थिक कंडीशन पर सब कुछ निर्भर है. एक सपोर्ट सिस्टम जरूरी है. पिछड़े इलाकों में न्याय जरूरी है. उनका कहना था कि 70 के दशक में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में काफी बदलाव हुआ है.

सेक्शन ऑफ सोसाइटी में जज का चयन करना काफी कठिन हो रहा है

हमारी पिछली भूमिका भी बिल्कुल अलग रही है. हम जब पढ़ाई कर रहे थे, तब सातवीं कक्षा में अंग्रेजी का विषय पढ़ा. मैजिस्ट्रेट कोर्ट विजयवाड़ा में और फिर हैदराबाद उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस शुरू की. सुप्रीम कोर्ट में कई बार याचिका फाइल की. एडवोकेट जनरल भी बना. इस क्रम में कहा कि मैं राजनीति में आना चाहता था. मेरी यात्रा प्राकृतिक रही है. मैंने अपना कैरियर बनाया. आर्टिकल ऑफ जस्टिस डिस्प्यूट्स में भाग लिया. सामाजिक दायित्वों का निर्वाह्न किया. कहा कि समाज और न्यायपालिका के नजरिये में काफी बदलाव हो रहे हैं. सेक्शन ऑफ सोसाइटी में जज का चयन करना काफी कठिन हो रहा है. इसका पर्सेप्शन अलग बन गया है.

हमें सक्सेसफुल लीगल कैरियर की जरूरत है.

मुख्य न्यायाधीश का कहना था कि हमें सक्सेसफुल लीगल कैरियर की जरूरत है. इसके लिए हमें आगे बढ़ना है. एक जज को हमेशा दूसरे की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए. समाज में हो रहे बदलावों पर ध्यान दिया चाहिए. जजों का दायित्व अधिक है. जिस तरह कोर्ट में मामले लंबित हैं, ऐसे में याचिकाकर्ताओं को हमेशा न्याय की आस लगी रहती है. हमें मानसिक और भौतिक स्ट्रेंग्थ से न्याय देना पड़ता है. एपेक्स कोर्ट के जज से भी त्वरित न्याय की आशा रहती है. यह हमारे ऊपर बड़ा भारी दायित्व है.

जजों के प्रति आम लोगों में गलत धारणा बनी हुई है

श्री रमना का कहना था कि जज के प्रति आम लोगों में गलत धारणा बनी हुई है. लोग मानते हैं कि जज सिर्फ 10 से चार तक काम करते हैं. काफी विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं. कहा कि हमने हैदराबाद में अपने कार्यकाल में देखा है कि कैसे लोगों की आकाक्षाएं प्रभावित होती है. हम वीकेंड में भी काम करते रहते थे. हम लोग अपनी पार्टियां भी नहीं मना पाते थे. जिस तरह कोर्ट में मामले लंबित हैं, उनका निबटारा कोर्ट का प्रारंभिक दायित्व है. हमलोग हमेशा पेपर बुक्स पढ़ते हैं, न्याय की पूर्व के दस्तावेज भी ढूंढ़ते हैं. लंबित जजमेंट देखते हैं. कभी कभी हम आवश्यक पारिवारिक इंगेजमेंट को भी मिस करते हैं.

सामाजिक दायित्वों से जज भाग नहीं सकते 

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमलोगों पर यह आरोप लगता है कि काफी संख्या में न्यायालय में मामले लंबित हैं. इसके लिए हमें आधारभूत संरचना विकसित करनी होगी, ताकि जज फूल पोटेंशियल में काम कर सकें. CJI का कहना था कि सामाजिक दायित्वों से जज भाग नहीं सकते हैं. फ्रैजाइल ज्यूडिशियरी के लिए हमारे पास आधारभूत संरचना नहीं है. ज्यूडिशियरी को भविष्य की चुनौतियों के लिए लंबी अवधि की योजना बनानी होगी. जज और ज्यूडिशियरी को एक यूनिफार्म सिस्टम विकसित करना होगा. इसमें नौकरशाही को भी आगे आना होगा. मल्टी डिसिप्लीनरी एक्शन मोड में काम करना होगा. सस्टेनेबल मेथड ऑफ जस्टिस की अवधारणा लागू करनी होगी. भविष्य की चुनौतियों को भी देखना होगा.

प्रिंट मीडिया के पास डिग्री ऑफ एकाउंटेबिलिटी है

न्यायपालिका के भरोसे यह अकेले संभव नहीं है  प्रिंट मीडिया के पास डिग्री ऑफ एकाउंटेबिलिटी है. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पास जीरो एकाउंटेबिलिटी है. मीडिया के एकाउंटेबिलिटी पर कोई रेग्यूलेशन नहीं है. मीडिया पर सरकार ही रोक लगाती है. सोशल मीडिया से कहा कि वह ज्यूडिशियरी की लिबर्टी को अनावश्यक रूप से उछालने का काम बंद करें. सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपनी आवाज का उपयोग लोगों को शिक्षित करने, उन्हें दिशा दिखाने के लिए करे. हमें अपने ज्यूडिशियरी को मजबूत करना है. एक जज जो दशकों तक कई हार्ड क्रीमिनल के खिलाफ आदेश देता है, सेवानिवृति के बाद उन्हें उसी समाज में आना पड़ता है . रिटायरमेंट के बाद उन्हें उन कनविक्टेड लोगों से जूझना पड़ता है, जिनके खिलाफ एक जज ने कई आदेश पारित किये. जज भी इसी समाज का हिस्सा हैं. कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत झारखंड के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन ने किया. कार्यक्रम में झारखंड हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश शामिल थे. इससे पूर्व सीजेआई को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इस अवसर पर रांची के उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा, वरीय पुलिस अधीक्षक किशोर कौशल, एसडीओ समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे. [wpse_comments_template]

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