National News : मानवाधिकार और पानी का अधिकार एक सिक्के के दो पहलू हैं. CJI सूर्य कांत ने आज यह बात कही. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने जीवन के लिए पानी की अनिवार्य आवश्यकता और मौलिक अधिकारों के साथ इसके गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया.
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— ANI (@ANI) October 12, 2026
CJI राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 33वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. कार्यक्रम का मुख्य विषय Water as the Elixir of Life: Advancing Human Dignity through the Right to Water था.
अपने संबोधन के क्रम में CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब भी संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो अदालतों को उसमें हस्तक्षेप करना चाहिए. उन्होंने मानवाधिकार आयोग को शिकायतों की जांच करने और व्यवस्था की कमियों को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया.
CJI ने कहा कि संसद ने 33 साल पहले मानवाधिकारों की गरिमा की रक्षा के लिए इस आयोग का गठन किया था. यह पीड़ितों के लिए एक भरोसेमंद ठिकाना बन गया है. उन्होंने आयोग के महासचिव गोयल के हवाले से बताया कि आयोग में 24 लाख से ज़्यादा मामले दर्ज किये गये हैं. 23 लाख से ज़्यादा मामलों का निपटारा किया गया है. निपटारे की दर 98 प्रतिशत से ज़्यादा रही है.
खबरों के अनुसार सम्मेलन के तकनीकी सत्र में जल निकायों के संरक्षण, पीने के पानी के स्रोतों की सुरक्षा और सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित व सतत पानी की पहुंच सुनिश्चित करने आदि मानवाधिकार के पहलुओं पर मंथन किया गया. कार्यक्रम में NHRC के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वीरामा सुब्रमणियन सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे.
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