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आदिवासी विकास का दावा : 2,025 करोड़ का प्रस्ताव केंद्र नहीं भेज सकी सरकार

Kaushal Anand
Ranchi : राज्य की हेमंत सरकार आदिवासी विकास का दावा करती रही है, मगर उसके ही आदिवासी कल्याण विभाग ने महत्वपूर्ण आदिवासी योजना से जुड़े 2,025 करोड़ का प्रस्ताव तक केंद्र को नहीं भेजा है. जबकि कल्याण विभाग के तहत संचालित झारखंड ट्राइबल डेवलमेंट सोसायटी (जेटीडीएस) मार्च 2022 में इससे जुड़े प्रस्ताव को बनाकर विभाग को भेज चुका है. इस प्रस्ताव को लेकर राज्य योजना प्राधिकृत समिति और वित्त विभाग की भी सहमति मिल चुकी है. मगर विभाग से अब तक सारी औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद भी इसे न तो कैबिनेट में लाया गया और न ही अनुपूरक बजट में ही इसे शामिल किया गया. इससे समझा जा सकता है कि झारखंड सरकार का आदिवासी कल्याण मंत्रालय आदिवासियों के विकास के प्रति कितना गंभीर है.
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यह है योजना-प्रस्ताव और इसके लाभ

-केंद्र सरकार का जनजातीय मंत्रालय ट्राइबल जिलों में आदिवासियों को रोजगार देने के उद्देश्य से विभिन्न राज्यों के लिए आठ वर्षीय दो योजना तैयार की, जो विभिन्न स्टेट में अलग-अगल नाम से संचालित है. झारखंड के लिए पहली योजना का नाम झारखंड ट्राइबल इंपावरमेंट एंड लाइवलीहुड प्रोजेक्ट फेज-2(जेटीईएलपी) और ट्राइबल लाइवलीहुड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट.
-इसमें पहले प्रोजेक्ट के लिए पूरी राशि 1880 करोड़ की है. जिसमें राज्य सरकार हिस्सेदारी महज 4.14 प्रतिशत है. बाकी राशि केंद्र सरकार विभिन्न स्रोत से प्रदान करेगी. इसमें 48 फीसदी बाह्य स्रोत, 10 प्रतिशत केंद्र सरकार, 4.14 प्रतिशत राज्य सरकार और बाकी अन्य योजना के माध्यम से इसकी राशि मिलेगी. इस योजना के तहत टीएसपी (ट्राइबल सबप्लान ) जिलों में आजीविका, पशुधन, जमीन में सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध कराना व वनोपज के माध्यम से आदिवासियों की आमदनी बढ़ाना है. इसमें लाभुकों को केवल 10 प्रतिशत अंशदान देना है.
-इसी तरह ट्राइबल लाइवलीहुड प्रोजेक्ट के तहत कुल 145 करोड़ की योजना है. इसमें भी राज्य सरकार की हिस्सेदारी या अंशदान केवल 4 प्रतिशत ही है. बाकी राशि केंद्र सरकार का जनजातीय मंत्रालय विभिन्न स्रोतों से देगी. इस योजना के लाने के पीछे केंद्र सरकार की मंशा कोरोना के दौरान आर्थिक स्थिति से बदहाल टीएसपी जिले में रबी-खरीफ एवं अन्य मौसमी खेती करवाना. पशुधन के माध्यम से आमदनी बढ़ाना और उनके खेतों में सिंचाई की व्यवस्था करना ताकि आदिवासी अपने पैरों पर पुन: खड़ा हो सके.
-जेटीडीएस मार्च 2022 में ही मंत्रालय को भेज चुका प्रस्ताव. मगर अब तक झारखंड सरकार का जनजातीय मंत्रालय इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेज नहीं पाया है. जबकि इस प्रस्ताव को राज्य योजना प्राधिकृत समिति और वित्त विभाग की भी मंजूरी मिल चुकी है. मगर अब तक न तो इसे कैबिनेट से मंजूरी दी गयी है और ही इसे शीकालीन सत्र में पेश अनुपूरक बजट में ही शामिल किया जा सका. जबकि अब सरकार फरवरी-मार्च में वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट तैयार में जुट जाएगी. अगर इन दो महीने में इसे केंद्र को भेज दिया जाता है तो ही इसकी राशि केंद्र से मिल पाएगी.
-ओडिशा और छत्तीसगढ़ आदि राज्य केंद्र से इस योजना का राशि ले चुके हैं. जबकि झारखंड अब तक इसे भेज भी नहीं सकी है.
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इतने आदिवासी परिवार लाभ से हो जाएंगे वंचित

अगर इस मद की राशि नहीं मिली तो झारखंड के 14 टीएसपी जिले के 135 प्रखंड के 12 लाख आदिवासी परिवार इससे मिलने वाले लाभ से वंचित हो जाएंगे. इतना जिस उद्देश्य के लिए कल्याण विभाग के तहत चलने वाली जेटीडीएस (झारखंड ट्राइबल डेवलपमेंट सोसायटी) का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता दिखा रहा है. इस संस्था में कई अफसर आउटसोर्स के आधार रखे गए हैं. राशि नहीं मिलने पर इनके वेतन तक के लाले पड़ जाएंगे.
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