- कोल्हान इलाके से ही चंपाई सोरेन ने तय किया है झारखंड के मुख्यमंत्री तक का सफर
- कोल्हान की दोनों सीटों पर होंगे झामुमो उम्मीदवार
- सिंहभूम से जोबा मांझी को चुनावी मैदान में उतारा है
Ravi Bharti Ranchi : कोल्हान की दोनों लोकसभा सीटें जमशेदपुर और सिंहभूम में झामुमो की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. इसकी वजह यह है कि सीएम चंपाई सोरेन ने कोल्हान इलाके से ही मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया है. चंपाई सोरेन के लिए कोल्हान लिटमस टेस्ट की तरह होगा. अब जब कोल्हान की दोनों लोकसभा सीटें झामुमो के कोटे में गई है, तो दोनों सीट पर जीत दिलाने की जिम्मेदारी, तो कोल्हान के टाइगर कहे जाने वाले मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन पर ही होगी. बता दें कि सिंहभूम सीट से झामुमो ने हेमंत सरकार में मंत्री रह चुकीं जोबा मांझी को चुनावी मैदान में उतारा है. इस सीट पर निवर्तमान सांसद गीता कोड़ा भाजपा की प्रत्याशी हैं. वहीं, जमशेदपुर सीट की बात करें, तो वर्तमान सांसद विद्युत वरण महतो को भाजपा ने तीसरी बार मौका दिया है. जबकि, झामुमो की ओर से अबतक प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की गई है.
क्या है जमशेदपुर लोकसभा सीट की खासियत
जमशेदपुर लोकसभा सीट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लगातार दो बार से अधिक कोई प्रत्याशी अबतक नहीं जीता है. पहले लोकसभा चुनाव में जमशेदपुर सीट का अस्तित्व नहीं था. 1951-52 के चुनाव में इस सीट का नाम मानभूम साउथ सह धालभूम था. 1957 के चुनाव में जमशेदपुर लोकसभा सीट अस्तित्व में आई. इस सीट से सर्वाधिक छह बार भाजपा ने जीत हासिल की. इसके बाद कांग्रेस और झामुमो का दबदबा रहा. वर्ष 2019 के चुनाव में इस सीट से एक और रिकॉर्ड जुड़ गया. वर्ष 1962 से लेकर अबतक के चुनावी इतिहास में जमशेदपुर लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी विद्युत वरण महतो की जीत सबसे बड़ी थी. उन्होंने तीन लाख 1033 मतों से रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी. विद्युत को कुल छह लाख 76 हजार 894 मत मिले, जबकि गठबंधन के झामुमो प्रत्याशी चंपाई सोरेन को तीन लाख 75 हजार 861 मत मिले थे.
जमशेदपुर लोकसभा सीट से जीतने वाले प्रत्याशी
वर्ष सांसद पार्टी 1962 - उदयकर मिश्रा भाकपा 1967 - एससी प्रसाद कांग्रेस 1971 - सरदार स्वर्ण सिंह कांग्रेस 1977 - रुद्र प्रताप षाड़ंगी बीएलडी 1980 - रुद्रप्रताप षाड़ंगी जेएनपी 1984 - गोपेश्वर कांग्रेस 1989 - शैलेंद्र महतो झामुमो 1991 - शैलेंद्र महतो झामुमो 1996 - नीतीश भारद्वाज भाजपा 1998 - आभा महतो भाजपा 1999 - आभा महतो भाजपा 2004 - सुनील कुमार महतो झामुमो 2009 - अर्जुन मुंडा भाजपा 2014 - विद्युत वरण महतो भाजपा 2019 - विद्युत वरण महतो भाजपा
सिंहभूम सीट पर भी झामुमो की प्रतिष्ठा दांव पर
सिंहभूम लोकसभा सीट पर भी झामुमो की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस की गीता कोड़ा ने जीत दर्ज की थी. गीता कोड़ा को कुल 49.8 फीसदी वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 40.9 फीसदी मत प्राप्त हुए थे. 2024 की तैयारी में एक बार फिर सिंहभूम में राजनीतिक सरगर्मी तेज हुई है. लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही निवर्तमान सांसद गीता कोड़ा ने कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया था. इस बार भाजपा ने गीता कोड़ा को उम्मीदवार बनाया है और गठबंधन में सिंहभूम सीट झामुमो के खाते में गयी है.
दल-बदल कर सिंहभूम सीट जीतते रहे बागुन सुंब्रई
वर्ष 1957 में जब झारखंड, बिहार का ही हिस्सा था, तो सिंहभूम लोकसभा सीट से झारखंड पार्टी के प्रत्याशी शंभू चरण गोडसोरा ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी सिदिया हेंब्रम को हराया था. इस सीट पर सबसे ज्यादा बागुन सुंब्रई ने पांच बार जीत दर्ज की. वह वर्ष 1977 से लगातार चार बार सांसद चुने गये. हालांकि, वह दल-बदल कर टिकट पाने में भी माहिर थे. वर्ष 1977 में झारखंड पार्टी, 1980 में जनता पार्टी और 1984 व 1989 में कांग्रेस की टिकट पर सांसद बने. इसके बाद 2004 में एक बार फिर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत कर बागुन सुंब्रई संसद भवन पहुंचे थे.
सिंहभूम सीट पर किसने कब जीत हासिल की
वर्ष - सांसद - पार्टी 1957 - शंभू चरण गोडसोरा झारखंड पार्टी 1962 - हरिचरण सोय झारखंड पार्टी 1967 - कोलाई बिरुआ निर्दलीय 1971 - मोरन सिंह पूर्ति झारखंड पार्टी 1977 - बागुन सुंब्रई झारखंड पार्टी 1980 - बागुन सुंब्रई जनता पार्टी 1984 - बागुन सुंब्रई कांग्रेस 1989 - बागुन सुंब्रई कांग्रेस 1991 - कृष्णा मरांडी झामुमो 1996 - चंद्रसेन सिंकू भाजपा 1998 - विजय सिंह सोय कांग्रेस 1999 - लक्ष्मण गिलुआ भाजपा 2004 - बागुन सुंब्रई कांग्रेस 2009 - मधु कोड़ा निर्दलीय 2014 - लक्ष्मण गिलुआ भाजपा 2019 - गीता कोड़ा कांग्रेस [wpse_comments_template]
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