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CM कहते रहे- नहीं है ऑक्सीजन की कमी, हकीकत- न व्यवस्था सुधरी, न बढ़े रिफिलिंग प्लांट और सिलेंडर

  • राज्य के बोकारो, जमशेदपुर और ओरमांझी में भरपूर था ऑक्सीजन, एक साल पहले आयी आपदा से भी नहीं सीखे स्वास्थ्य मंत्री
  • मेडिकल व्यवस्था में बिगड़ती व्यवस्था को देख आखिर में स्वयं मुख्यमंत्री ने संभाली कमान

Ranchi : प्रदेश में बढ़ते कोरोना मरीजों के बीच सबसे बड़ी समस्या अगर कोई हुई है, तो वह ऑक्सीजन युक्त बेड और वेंटिलेटर बढ़ाने के साथ अमृतरूपी मेडिकल ऑक्सीजन आपूर्ति को सामान्य रखना. बीते 15 दिनों की स्थिति को देखें, तो संक्रमित मरीजों के परिजनों को सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ा है. सूबे के मुखिया हेमंत सोरेन कह रहे हैं कि प्रदेश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है. अगर ऐसी बात है, तो क्यों आज परिजन लगातार आरोप लगा रहे हैं कि ऑक्सीजन की कमी से वे जूझ रहे हैं. देखा जाए, तो इसका एक प्रमुख कारण विभागीय मंत्री बन्ना गुप्ता द्वारा सटीक तैयारी नहीं कर पाना है. आपदा के एक साल की अवधि में भी बन्ना गुप्ता न ही न व्यवस्था सुधार पाये, न ही बढ़ा पाए रिफिलिंग प्लांट और सिलेंडर.

एक साल पहले फैली महामारी से भी सीख नहीं ले पाये बन्ना गुप्ता

सीएम के बयान पर अगर गौर फरमायें, तो वाकई ऑक्सीजन की कमी वाली बात सत्य है. प्रदेश में बोकारो, जमशेदुपर व राजधानी स्थित ओरमांझी में ही ऑक्सीजन का उत्पादन इतना है कि आज रांची के विभिन्न अस्पतालों में संक्रमित मरीजों को आसानी से ऑक्सीजन मिल पाता. फिर भी बीते एक साल से पहले प्रदेश में कोरोना संकट की जो महामारी फैली थी, उससे भी सीख लेकर भी स्वास्थ्य मंत्री ने कोई विशेष तैयारी नहीं की. कई बार तो मेडिकल व्यवस्था में सुधार कार्य में बन्ना गुप्ता नदारद रहे, अंततः स्वंय मुख्यमंत्री ने कमान संभाली.

कमी को देख सरकार ने केंद्र से की 17,000 ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग

बता दें कि यहां के प्लांटों से ऑक्सीजन लिक्विड के रूप में दूसरे राज्य जा रहे हैं, लेकिन राज्य में फिर भी अस्पतालों को मांग के अनुरूप ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है. इस कारण प्रदेश में ऑक्सीजन सिलेंडर की भारी कमी है. हालांकि इसे देखते हुए बीते दिनों ही राज्य सरकार ने केंद्र से 17,000 सिलेंडर की मांग की है.

बोकारो में बने प्लांट से तो कई राज्य हो रहे लाभान्वित

केवल बोकारो की बात करें, तो यहां स्थित बोकारो स्टील प्लांट से देश के कई राज्यों में ऑक्सीजन में सप्लाई हो रहा है. बोकारो का ऑक्सीजन फिलहाल देश के दूसरे राज्य बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र को भी भेजा जा रहा है. यह आपूर्ति सेल की पाटर्नर कंपनी ऑइनोक्स एयर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से किया जा रहा है. लेकिन झारखंड इसका लाभ लेने से इसलिए अछूता रहा क्योंकि विभाग एक साल में भी ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी को दूर नहीं पाया.

जमशेदपुर के लिंडसे प्लांट की क्षमता करीब 300 टन लिक्विड ऑक्सीजन की

जमशेदुपर स्थित दो प्लांट लिंडसे इंडिया और एयर वाटर में ऑक्सीजन का उत्पादन काफी मात्रा में होता है. यहां से बिहार, हरियाणा, उत्तरप्रदेश तक ऑक्सजीन की आपूर्ति की जाती है. मंगलवार से दिल्ली के लिए भी ऑक्सीजन भेजना शुरू हुआ है. वहीं सूबे के स्वास्थ्य मंत्री का विधानसभा क्षेत्र भी पास ही स्थित है.लेकिन विभागीय मंत्री इस प्लांट का फायदा रांची में इलाजरत संक्रमित मरीजों के लिए नहीं करा सके. बता दें कि लिंडे प्लांट से ही प्रतिदिन 300 टन लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन क्षमता है.

1000 जंबो सिलेंडर रिफिल करने की क्षमता है ओरमांझी के दो प्लांटों की

राजधानी के विकास एवं ओरमांझी स्थित ऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण किया. यहां स्थित छोटानागपुर इंडस्ट्रियल गैस प्लांट में प्रति घंटे 36 जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिल करने की क्षमता है. तो वहीं ओरमांझी स्थित एसके इंडस्ट्रियल गैसेस की क्षमता प्रतिदिन 900 से 1000 जंबो सिलेंडर की. लेकिन फिर भी स्वास्थ्य विभाग इन प्लांट का सही उपयोग नहीं कर पाया. इसका भी एक कारण ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी ही है.

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