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MSME की आड़ में कोयला घोटाला! 170 करोड़ के नुकसान का आरोप, ED जांच की मांग

झारखंड में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) को कोयला आपूर्ति नीति की आड़ में बड़े पैमाने पर घोटाले का आरोप लगा. इससे संबंधित शिकायती पत्र वित्त विभाग को भेजा गया है. इसमें विभागीय स्तर के अलावा ED से जांच कराने का अनुरोध किया गया है.
 
  • वित्त,उद्योग, खान विभाग और MSME इकाइयों कि मिलीभगत से घोटाले का अंजाम देने का आरोप

Ranchi: झारखंड में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) को कोयला आपूर्ति नीति की आड़ में बड़े पैमाने पर घोटाले का आरोप लगा. इससे संबंधित शिकायती पत्र वित्त विभाग को भेजा गया है. इसमें विभागीय स्तर के अलावा ED से जांच कराने का अनुरोध किया गया है.


उद्योगों को कोयला आपूर्ति नीति में घोटाले का आरोप लगाते हुए विश्वनाथ झा ने एक शिकायती पत्र भेजा है. इसमें कहा गया है कि कुछ MSME इकाइयों ने कोयले की वास्तविक खपत और उत्पादन के आंकड़ों में हेराफेरी कर इस घोटाले को अंजाम दिया है. शिकायती पत्र में विभागीय पोर्टल के आंकड़ों का हवाला देते हुए इस घोटाले से सरकार को हुए आर्थिक नुकसान का ब्योरा पेश किया गया है.

 

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शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक कई MSME इकाइयों का गहन ऑडिट नहीं कराया गया. आरोप है कि वर्ष 2021 के बाद संबंधित इकाईयों का कोई प्रभावी निरीक्षण नहीं हुआ, जिससे अनियमितताओं को बढ़ावा मिला.

 

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शिकायत में यह भी कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिन 13 इकाईयों को कोयला आवंटित किया गया, उनमें से केवल कुछ इकाईयों ने ही कोयले की बुकिंग कराई, जबकि शेष इकाइयों के आंकड़ों पर सवाल खड़े किए गए हैं. शिकायतकर्ता ने इसे डेटा में हेरफेर और नीतियों के दुरुपयोग का मामला बताया है.


सबसे गंभीर आरोप राजस्व नुकसान को लेकर लगाया गया है. शिकायत के अनुसार, वर्ष 2025-26 में 4.46 लाख मीट्रिक टन कोयले की बुकिंग का लक्ष्य था, लेकिन मात्र 58,850 मीट्रिक टन की ही बुकिंग हुई. इसके चलते सीसीएल को लगभग 101 करोड़ रुपये, झारखंड सरकार को 38 करोड़ रुपये और जीएसटी मद में 26 करोड़ रुपये सहित करीब 170 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का दावा किया गया है.


शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में वैध माइनिंग चालान के बिना कोयले का परिवहन किया गया, जो झारखंड खनिज परिवहन नियमों का उल्लंघन है.


शिकायतकर्ता ने वित्त विभाग, खान विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है. साथ ही संबंधित अधिकारियों और दोषी MSME इकाईयों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है ताकि भविष्य में सरकार को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके.

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