पांच वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी, अब एमए डिग्री की मांग
इसी बीच न्यायालय से आदेश पारित होने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी गई, जिसके कारण इनकी नियुक्ति नहीं हो पाई. पिछले पांच वर्षों तक अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाकर संघर्ष किया. कंटेम्प्ट केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कंडिका दो के अनुपालन में संस्कृत एवं अन्य विषयों के कुल 155 ऐसे अभ्यर्थी, जिन्हें सिर्फ नियुक्ति पत्र देना शेष था, उनकी मेधा सूची स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा वेबसाइट में अपलोड किया गया. समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित कर फिर से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया. लेकिन 22 से 24 फरवरी 2023 तक उपस्थित अभ्यर्थियों को एक प्रपत्र दिया गया और एमए की डिग्री की मांग की गई.सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त करने का आदेश दिया है
अभ्यर्थियो का कहना है कि पिछले पांच वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हमें नियुक्त करने का आदेश दिया है. लेकिन विज्ञापन की शर्तों के विरुद्ध हमसे स्नातकोत्तर की डिग्री की मांग की जा रही है, जो सरासर गलत है. हमारे मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है, अभ्यर्थी अमित पांडे ने कहा कि हमलोग निराश एवं हताश हो चुके हैं. कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा भी समाप्त हो चुकी है. सरकार से मांग है कि जो भी अभ्यर्थी स्नातक उत्तीर्ण हैं, उनकी नियुक्ति विज्ञापन के आधार पर ही की जानी चाहिए. हम तमाम अधिकारियों से मिल कर अपनी पीड़ा बता चुके हैं. लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. हम मुख्यमंत्री से मिलना चाह रहे हैं, लेकिन हमें मिलने नहीं दिया जा रहा. इसे भी पढ़ें – स्वास्थ्य">https://lagatar.in/nhm-contract-workers-strike-ends-after-talks-with-health-minister-they-were-agitating-in-front-of-raj-bhavan-for-38-days/">स्वास्थ्यमंत्री से वार्ता के बाद एनएचएम अनुबंध कर्मियों की हड़ताल समाप्त, 38 दिनों से राजभवन के समक्ष थे आंदोलनरत [wpse_comments_template]

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