Lagatar Desk : ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पदक खाता खुल गया है. बिहार के रहने वाले पैरा-एथलीट झंडू कुमार ने पावरलिफ्टिंग की हेवीवेट कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है.
24 जुलाई से शुरू हुए शुरुआती मुकाबलों में भारत को सफलता नहीं मिली. लेकिन दिन के अंतिम पावरलिफ्टिंग इवेंट में झंडू कुमार ने भारत की झोली में पहला पदक डालकर देश को गौरान्वित किया है,
पीएम मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झंडू कुमार की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पुरुषों के हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में कांस्य पदक जीतकर झंडू कुमार ने भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पदकों का खाता खोला है.
प्रधानमंत्री ने इस को उपलब्धि झंडू की असाधारण ताकत, अटूट संकल्प और वर्षों की अनुशासित मेहनत का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि हर चुनौती का सामना करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर झंडू कुमार ने पूरे देश का सम्मान बढ़ाया है और लाखों भारतीयों को प्रेरित किया है.
PM Modi (@narendramodi) posts, "A spectacular performance by Jhandu Kumar, who has opened India’s medal tally at the #CWG2026 by winning a Bronze in the Men’s Heavyweight Para Powerlifting event! Congratulations to him. His achievement is a powerful reflection of immense… pic.twitter.com/aBLU1qaNxG
— Press Trust of India (@PTI_News) July 25, 2026
ऐसा रहा मुकाबला
झंडू कुमार ने प्रतियोगिता की शुरुआत शानदार अंदाज में की. नेशनल रिकॉर्डधारी झंडू ने ग्रुप-बी के मुकाबले में पहले प्रयास में 181 किलोग्राम वजन उठाकर 124.7 अंक हासिल किए. दूसरे प्रयास में उन्होंने 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया और अपना स्कोर बढ़ाकर 130.9 अंक कर लिया.
तीसरे प्रयास में उन्होंने 196 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन इसमें सफल नहीं हो सके. इसके बावजूद उनके 130.9 अंक उन्हें लंबे समय तक शीर्ष स्थान पर पहले स्थान पर बनाए रखा.
हालांकि, ग्रुप-ए के मुकाबलों में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 132.8 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता. जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग 131 अंकों के साथ रजत पदक जीतने में सफल रहे. झंडू कुमार तीसरे स्थान पर रहे और कांस्य पदक अपने नाम किया.
संघर्षों से भरी रही है झंडू की जिंदगी
झंडू कुमार की यह सफलता किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है और उनकी यह जीत बेहद प्रेरणादायक है. बिहार के हरनौट निवासी झंडू कुमार को मात्र पांच वर्ष की उम्र में पोलियो हो गया था, जिससे उनके दोनों पैर खराब हो गए.
आर्थिक तंगी के बीच परिवार की मदद के लिए उन्होंने सब्जी बेचने और ई-रिक्शा चलाने तक का काम किया. इस बीच एक खेल अधिकारी की सलाह पर उन्होंने पैरा पावरलिफ्टिंग शुरू की. लेकिन गरीबी इतनी थी कि नेशनल गेम्स में हिस्सा लेने के लिए उन्हें अपना ई-रिक्शा तक बेचना पड़ गया था.
तमाम परेशानियों और संघर्षों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे. आज झंडू कुमार ने अपनी मेहनत के दम पर कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतकर न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.
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