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धनबाद : 16 साल से अधूरा पड़ा है 40 करोड़ का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

  • रात में असामाजिक तत्वों का अड्डा और दिन में पशुओं का चारागाह बन चुका है भवन
  • 2008 में गोविंदपुर के अंबोना मोड़, प्रधानखंता, टुंडी और निरसा में बन रहा था हेल्थ सेंटर
  • दो वर्षों बाद चारों को स्वास्थ्य विभाग ने प्रदूषित व वीरान स्थान में बनने की बात कह रोका
Raja Gupta Dhanbad : देश की कोयला राजधानी धनबाद में स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाने के लिए वर्ष 2008 में चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए योजना बनायी गई. ताकि धनबाद के लोगों को वर्तमान स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा अन्य केंद्रों से भी चिकित्सा सेवा मिल सके. चारों स्वास्थ्य केंद्र का शिलान्यास भी किया गया. टेंडर निकाल कर अस्पताल बनाने के लिए काम भी शुरू किया, लेकिन दो वर्ष के भीतर ही काम को रोक दिया गया. ठेकेदारों को बिल भी भुगतान कर दिया गया, लेकिन धनबादवासियों को अस्पताल नहीं मिला. 16 साल से 40 करोड़ का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधूरा पड़ा हुआ है, जो आज की तारीख में खंडहर में तब्दील हो रहा है. भवन रात में असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है और दिन में पशुओं का चारागाह बन जाता है. जानकारों का कहना है कि 2008 में गोविंदपुर के अंबोना मोड़, बलियापुर के प्रधानखंता, टुंडी और निरसा में हेल्थ सेंटर बन रहा था. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो वर्षों बाद चारों स्वास्थ्य केंद्र को प्रदूषित व वीरान स्थान में बनने की बात कह रोक दिया.

नेताओं, अधिकारियों व ठेकेदारों पर मोटी रकम हड़पने का आरोप

जबकि नियमत: विभाग की ओर से स्थल का निरीक्षण करने और नक्शा बनने के बाद ही स्वास्थ्य केंद्र बनाने की अनुशंसा की जाती है. फिर मुख्यालय से सहमति मिलने के बाद ही भवन बनाने के लिए योजना को धरातल पर उतारा जाता है. लोगों का कहना है कि धनबाद में चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने के नाम पर 40 करोड़ का घोटाला हुआ है. जनता के टैक्स के रुपये को नेताओं, अधिकारियों व ठेकेदारों के हड़प लिया. आम जनता वोट देकर नेताओं को चुनाव में जीत दिलाते हैं. ताकि उन्हें सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके, लेकिन यहां नेता व अधिकारी मिलकर जनता को सुविधा दिलाने के नाम पर लूटने में लगे हैं. लोगों को सुविधा कम और निराशा अधिक हाथ लगती है.

दरवाजा और खिड़कियां हो गई चोरी

लोगों का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन तो खंडहर हो रहा है, लेकिन वहां के दरवाजा व खिड़की चोर चोरी कर ले गए. स्वास्थ्य केंद्र के आसपास जंगल-झाड़ उग आए हैं. 16 साल में स्वास्थ्य विभाग के सिविल सर्जन न तो निर्माणाधीन अस्पताल को देखने गए और न ही किसी वरीय या कनीय अधिकारियों ने जांच की. अस्पताल के बारे में कोई भी आधिकारिक बयान देने के लिए कोई तैयार नहीं है. सभी कहते हैं कि मामला 2008 है. जो लोग उस समय अधिकारी थे, वे अब रिटायर्ड हो चुके हैं. विभाग की ओर से कभी इस मामले की जांच तक नहीं की गई है. इसे भी पढ़ें : सिंहभूम">https://lagatar.in/joba-manjhi-showed-strength-after-nomination-in-singhbhum/">सिंहभूम

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