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झारखंड में जेनेटिक काउंसलिंग पर हुआ सम्मेलन

Ranchi : जेनेटिक काउंसलिंग बोर्ड-इंडिया (बीजेजीसीआई) ने हाल ही में झारखंड में अपना दसवां वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया. इस सम्मेलन का मुख्य विषय जनजातीय और समुदायों के लिए जेनेटिक डायग्नोस्टिक्स और परामर्श को आगे बढ़ाना था. झारखंड को इस सम्मेलन के लिए सबसे अच्छा राज्य चुना गया, क्योंकि यहां कई समुदाय एक साथ रहते हैं और जनजातीय संस्कृति बहुत जीवंत है.

 

बीजेजीसीआई के अध्यक्ष डॉ. पी.एन. हसन ने जेनेटिक काउंसलर की शिक्षा, जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं को एक करने पर जोर दिया. जिला सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने सम्मेलन में बीजेजीसीआई का स्वागत किया. यह सम्मेलन जेनेटिक काउंसलर, आदिवासी समुदायों और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच संबंध बनाने का एक अच्छा मौका था.

 

यह सम्मेलन झारखंड में पहली बार आयोजित किया गया था. वैज्ञानिक और आनुवंशिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अजय महकाल ने सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों के लिए जेनेटिक काउंसलिंग की आवश्यकता पर जोर दिया.तीन दिवसीय इस सम्मेलन में 45 विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिसमें से 5 विशेषज्ञ विदेशों से थे. इसमें 2 वर्कशॉप और 8 वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए. यह सम्मेलन ऑनलाइन और व्यक्तिगत रूप से दोनों तरीकों से आयोजित किया गया था.

 

सम्मेलन का उद्देश्य मरीजों, परिवारों और समुदायों को जेनेटिक काउंसलर से जोड़ने का था. पिछले साल, स्वास्थ्य सेवा कौशल भारत परिषद (एचएसएससी) ने आनुवंशिक परामर्शदाताओं को स्वास्थ्य पेशेवरों के रूप में मान्यता दी थी. इस साल स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों को भी मंजूरी दी है. एचएसएससी ने 20 जेनेटिक काउंसलर को प्रशिक्षित करने की भी मंजूरी दी है.

 

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