Ranchi : झारखंड की राजनीति में मंगलवार का दिन पूरी तरह एक ही बात पर फोकस रहा कि क्या राज्य में सत्तारूढ़ जेएमएम- कांग्रेस की गठबंधन सरकार में अनबन हो गई है. अनबन का कारण बना राज्यसभा चुनाव में जेएमएम का अपना प्रत्याशी उतारना और जेएमएम प्रत्याशी महुआ माजी के नामांकन में कांग्रेस के किसी भी नेताओं का उपस्थित नहीं होना. कांग्रेस इस बार राज्यसभा की एक सीट की उम्मीद लगाए बैठी थी, लेकिन इस उम्मीद पर जेएमएम ने पानी फेर दिया. उसके बाद प्रदेश मुख्यालय में दिनभर झारखंड कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने विधायकों और संगठन के लोगों से 1-2-1 बैठक कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली. बाद में मीडिया में खबर आयी कि कांग्रेस के कई विधायकों ने हेमंत सोरेन के मंत्रिमंडल से वापसी कर सरकार को बाहर से समर्थन देने का सुझाव दिया है. इससे यह लगने लगा कि सरकार में अंर्तकलह अब दिख सकता है. हालांकि इन बातों पर विराम प्रभारी अविनाश पांडे ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर लगा दिया है. मंगलवार को मुख्यमंत्री के आवास पर अविनाश पांडे ने विधायक दल के नेता आलमगीर आलम और प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के साथ हेमंत सोरेन से मुलाकात की.

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मीडिया में नाराजगी की बात आयी, लेकिन सरकार के अंदर सब कुछ सही है : अविनाश पांडे
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए झारखंड कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात को काफी अच्छा बताया. साथ ही एक बार फिर कहा कि वे मंगलवार सुबह से ही कह रहे हैं कि विधायकों में सरकार को लेकर कोई नाराजगी नहीं है. मीडिया में यह बात आई है, लेकिन सरकार के अंदर सबकुछ सही है. जहां तक राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी देने की बात है, तो हमारी उम्मीद थी कि इस बार गठबंधन के सभी सहयोगी आपसी समन्वय से एक संयुक्त प्रत्याशी को उतारते. हालांकि सच्चाई यह भी है कि जेएमएम के पास अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल है.
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