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चुनाव चिह्न को लेकर टकराव : उगता सूरज और त्रिशूल पर शिंदे गुट ने भी ठोका दावा

New Delhi : शिवसेना के दोनों धड़ों एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच तनातनी बढ़ गई है. दोनों खेमों ने चुनाव आयोग को अपनी-अपनी पसंद के वैकल्पिक नाम और चिह्न बताये हैं. शिंदे गुट ने पहले गदा, तलवार और तुरही का विकल्प अपने नए चुनाव चिन्ह के तौर पर चुनाव आयोग के सामने प्रस्तुत किए थे. हालांकि अब जानकारी सामने आई है कि शिंदे गुट ने ठाकरे समूह की तरह ही उगता सूरज और त्रिशूल के निशान पर दावा किया है. इस वजह से अब दोनों खेमों में घमासान बढ़ने की उम्मीद है. निर्वाचन आयोग ने दोनों गुटों से 10 अक्टूबर 2022 तक अपनी नई पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह का सुझाव देने के लिए कहा था. इसी के तहत दोनों गुटों ने नाम और चुनाव चिन्ह आयोग को बताए हैं.
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फैसला चुनाव आयोग को करना है

उद्धव ठाकरे समूह ने चुनाव चिह्न के लिए तीन विकल्प चुने हैं. ठाकरे गुट त्रिशूल, उगता सूरज और मशाल को आगामी अंधेरी पूर्व उपचुनाव में अपना निशान बनाना चाहता है. सूत्रों के मुताबिक इसमें से उगते सूरज और त्रिशूल के प्रतीकों पर शिंदे गुट ने भी दावा किया है. मुंबई के अंधेरी उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख 14 अक्टूबर है. खबर है कि केवल चिह्न ही नहीं, बल्कि शिंदे गुट और ठाकरे गुट के बीच नाम को लेकर भी टकराव हो रहा. दोनों गुटों अपना अस्थायी नाम ‘शिवसेना- बालासाहेब ठाकरे’ रखना चाहते हैं. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्रीय चुनाव आयोग किसको कौन सा चुनाव चिह्न व नाम देता है.

आयोग ने शिवसेना के चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया है

गौरतलब हो कि शिवसेना में फूट के बाद उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट ने पार्टी के निशान ‘धनुष और बाण’ और पार्टी पर दावा किया है. इसके चलते शनिवार को चुनाव आयोग ने शिवसेना के चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया और शिवसेना के नाम के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी. इसके बाद अब दोनों गुटों को अलग-अलग वैकल्पिक नाम व निशान का उपयोग करना होगा. जिसका आवंटन निर्वाचन आयोग द्वारा किया जायेगा. इस संबंध में आयोग ने शिवसेना के दोनों धड़ों से उनकी पसंद का नाम और चुनाव चिह्न का विकल्प बताने के लिए कहा था.

उद्धव गुट ने किया हाईकोर्ट का रुख

इस बीच चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ उद्धव ठाकरे गुट ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. उद्धव गुट का कहना है कि चुनाव आयोग ने बिना किसी सुनवाई के ही पार्टी के नाम और सिंबल को फ्रीज कर दिया. उद्धव गुट के नेता और राज्यसभा सदस्य अनिल देसाई ने कहा है कि हमारी याचिका का आधार है कि चुनाव आयोग ने हमें चुनाव चिह्न और नाम तय करने को लेकर समुचित समय और अवसर नहीं दिया है. आयोग ने शिवसेना के नाम और सिंबल के इस्तेमाल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है.
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