Ranchi : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने लोकसभा में लाए गए Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2025 को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बदलावों के जरिए राज्यों के संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने और खनिज संसाधनों पर केंद्र का नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.
कमलेश ने कहा कि जिस राज्य की भूमि से खनिज निकलते हैं, वहां के लोगों और सरकार की उस संसाधन पर हिस्सेदारी और अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए. उनके मुताबिक खनिज संपदा पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में राज्यों की भूमिका कम करना देश के संघीय ढांचे की भावना के विपरीत है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि विधेयक से बड़े औद्योगिक और कॉरपोरेट समूहों के लिए खनन क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ सकती हैं. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधन सार्वजनिक संपत्ति हैं और उनका इस्तेमाल कुछ चुनिंदा कंपनियों के हित में नहीं होना चाहिए.
उन्होंने विशेष रूप से झारखंड का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में खनन गतिविधियों का सीधा संबंध आदिवासी समुदायों, स्थानीय आबादी और जल-जंगल-जमीन से है. ऐसे में ग्राम सभाओं की भूमिका, स्थानीय लोगों के अधिकार और उनकी भागीदारी को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं किया जाना चाहिए.
कमलेश ने पर्यावरणीय मुद्दों पर भी सरकार से स्पष्ट नीति की मांग की. उन्होंने कहा कि खनन परियोजनाओं को मंजूरी देते समय पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों की सहमति और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास एवं अधिकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
उन्होंने खनिजों की नीलामी और राजस्व वितरण की प्रस्तावित व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. कमलेश ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि नए प्रावधानों से राज्यों की आय पर क्या प्रभाव पड़ेगा और खनिज संपदा से होने वाली कमाई में राज्य और स्थानीय समुदायों की उचित भागीदारी किस तरह सुनिश्चित की जाएगी.
कांग्रेस नेता ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता देश के लिए जरूरी हैं, लेकिन इसका रास्ता राज्यों के अधिकारों को कम करके नहीं निकाला जा सकता. उन्होंने कहा कि विकास की ऐसी नीति होनी चाहिए जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ स्थानीय हित, पर्यावरण और संघीय व्यवस्था भी सुरक्षित रहे.
कमलेश ने कहा कि कांग्रेस केंद्र सरकार की इस नीति का राजनीतिक और लोकतांत्रिक स्तर पर विरोध करेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी आगे भी मजबूती से आवाज उठाती रहेगी.
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