Ranchi : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं को भी नहीं बख्शा. कांग्रेस पार्टी हमेशा से ही महिला सशक्तिकरण और महिला बिल को संसद से पारित किए जाने की पक्षधर रही है. मगर आम चुनावों को देखते हुए महिला बिल पारित कराने की याद भाजपा को आ गई. महिलाओं को अगर अधिकार और भागीदारी दिलाने की मंशा भाजपा को होती, तो 2010 में राज्यसभा से पारित बिल को ही लोकसभा में लेकर भाजपा को जाना चाहिए था. अगर बिल की ही चर्चा करें तो महिला आरक्षण के पूर्व जनगणना और परिसीमन का होना अनिवार्य है, जो वर्तमान परिस्थिति में 2029 के पूर्व संभव ही नहीं है. हमारी नेत्री सोनिया गांधी ने सदन में नारी शक्ति वंदन अधीनियम-2023 का पूर्ण समर्थन करते हुए यह साफ कर दिया कि कांग्रेस पार्टी ही वो पार्टी है, जो वास्तव में महिला सशक्तिकरण की बात या उसको लागू करने को लेकर काम करती रही है.
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13 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद और इंतजार क्यों
उन्होंने बिल के संबंध में बताया कि स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी तय करने वाला संविधान संशोधन स्व राजीव गांधी द्वारा ही लाया गया था, जो सिर्फ सात वोटों से गिर गया था. बाद में कांग्रेस की सरकार ही ने पूर्व प्रधानमंत्री पीबी निरसिम्हा राव के नेतृत्व में इस बिल को पारित कराया था और इसी संशोधन का परिणाम है कि देश भर के स्थानीय निकायों में 15 लाख निर्वाचित महिला नेत्री मौजूद हैं. कांग्रेस पार्टी नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पूर्णतया समर्थन करती है और इस बिल के पारित होने से हमें बेहद प्रसन्नता है. परंतु इसके साथ ही पार्टी चिंतित भी है कि महिला शक्ति विगत 13 वर्षों से राजनीतिक जिम्मेदारी का इंतजार कर रही है. उन्हें और इंतजार करने को कहा जा रहा है. आधी आबादी के साथ सरकार का यह बर्ताव सर्वथा अनुचित है.एनडीए सरकार में ओबीसी की उपेक्षा- आलमगीर
कांग्रेस विधायक दल के नेता सह ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मांग है कि यह बिल अविलंब अमल में लाया जाए. साथ ही जातीय जनगणना कराकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं ओबीसी महिलाओं के आरक्षण की व्यवस्था की जाए. हमारे नेता राहुल गांधी ने भी महिला आरक्षण विधेयक में महिलाओं के लिए आरक्षित प्रस्तावित 33 प्रतिशत सीटों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कोटा निर्धारित करने की मांग की है. उन्होंने आंकड़ा रखते हुए यह बताया कि किस प्रकार से वर्तमान स्थिति में भारत सरकार के 90 सचिवों में से केवल 3 व्यक्ति ओबीसी के हैं और भारत के बजट का 5 प्रतिशत नियंत्रित करते हैं, इससे साफ पता चलता है कि ओबीसी का प्रतिनिधित्व कितना कम है और वर्तमान की भाजपा नीत एनडीए सरकार का ओबीसी को लेकर किस प्रकार से असंवेदनशील रवैया है. राहुल गांधी ने भी जातिगत जनगणना पर बल देते हुए यूपीए सरकार के द्वारा जातिगत जनगणना के आंकड़ों को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए. आलम ने कहा कि सरकार जिन चीजों से सबका ध्यान भटकाना पसंद करती है, उनमें से एक है अडानी प्रकरण. दूसरा महत्वपूर्ण विषय है जाति जनगणना. जैसे ही विपक्ष जाति जनगणना का मुद्दा उठाता है, भाजपा एक नई व्याकुलता पैदा करने की कोशिश करती है. ताकि ओबीसी, पिछड़ा वर्ग, समुदाय और भारत के लोग दूसरी तरफ देखें. इसे भी पढ़ें – झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-youth-state-committee-of-jdu-expanded-in-charge-of-the-district-appointed/">झारखंडयुवा जदयू की प्रदेश कमेटी का विस्तार, नियुक्त किए गए जिले के प्रभारी [wpse_comments_template]
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