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कांग्रेस का पीएम मोदी पर तंज, पॉपकॉर्न पर Tax लगाने के बजाय अर्थव्यवस्था पर ध्यान दे सरकार

NewDelhi : सरकार(मोदी) पॉपकॉर्न पर कर लगाने के बजाय अर्थव्यवस्था की जटिलताओं से निपटने पर ध्यान केंद्रित करे तथा कर एवं जांच एजेंसियों के आतंक को खत्म किया जाये. यह सलाह कांग्रेस ने दी है. कांग्रेस ने शुक्रवार को दावा किया कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में वृद्धि धीमी हो गयी है. कांग्रेस ने इस गहरे आर्थिक संकट का संकेत करार दिया. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान में कहा, दिसंबर, 2024 के ताजा आंकड़ों के हवाले से कहा, पिछले महीने जीएसटी संग्रह साढ़े तीन साल में दूसरी बार सबसे धीमी गति से बढ़ा है. कहा कि रिफंड के समायोजन के बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह घटकर 3.3 प्रतिशत रह गया है, जो वित्त वर्ष 2025 में सबसे कम है. यह कई मोर्चों को लेकर गंभीर खबर है.

जयराम  रमेश ने राजस्व संग्रह में गिरावट की ओर इशारा किया

जयराम रमेश को अनुसार मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में सरकार ने जीएसटी संग्रह में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जबकि बजट अनुमान में 11 प्रतिशत की वृद्धि की बात कही गयी थी. रमेश ने कहा कि राजस्व संग्रह में गिरावट सरकार के लिए मनरेगा जैसे सामाजिक कल्याण के कार्यक्रमों में और कटौती करने की वजह नहीं हो सकती है, वह भी ऐसे समय में जब ग्रामीण मजदूरी स्थिर रही है और खपत में कमी आयी है. कहा क पिछले महीने के शुद्ध संग्रह में इस नरमी के एक हिस्से के रूप में करदाताओं को रिफंड में 45.3 प्रतिशत की वृद्धि के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है .

35,132 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी की पहचान हुई  

कांग्रेस महासचिव के अनुसार कुछ हद तक यह सही भी है, लेकिन उन्होंने इस रिफंड के एक महत्वपूर्ण भाग के धोखाधड़ी से भरा होने की आशंका जताई. उन्होंने जीएसटी प्रणाली की जटिलता के कारण, विशेष रूप से खामियों से भरे सॉफ्टवेयर सिस्टम के साथ मिल जाने पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की गुंजाइश की ओर इशारा किया. कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी विशेष रूप से आम बात है, केवल 12 प्रतिशत की वसूली दर के बीच, 35,132 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी की पहचान हुई है

2024 के दौरान जीडीपी वृद्धि दर घटकर मात्र 5.4 प्रतिशत रह गयी थी

जीएसटी संग्रह से जुड़ी यह गिरावट एक गहरे आर्थिक संकट के बुनियादी मुद्दे को भी प्रतिबिंबित करती है. श्री रमेश ने कहा कि सितंबर, 2024 के दौरान जीडीपी वृद्धि दर घटकर मात्र 5.4 प्रतिशत रह गयी थी, जो 5.4 प्रतिशत की समान रूप से कमज़ोर निजी निवेश वृद्धि के बराबर थी. उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे साक्ष्यों से पता चलता है कि कमरतोड़ महंगाई और बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी के बीच, पिछले दस वर्षों में ग्रामीण मजदूरी स्थिर हो गयी है. भारत कम खपत, कम निवेश, कम विकास, कम मजदूरी के खतरनाक चक्र में फंसा हुआ है . उन्होंने तंज कसा कि सरकारी तंत्र अपना ध्यान पॉपकॉर्न पर कर लगाने से हटाये और अर्थव्यवस्था की जटिलताओं से निपटने पर ध्यान केंद्रित करे. मांग की कि एक माह बाद पेश होने वाले केंद्रीय बजट में गरीबों को आय सहायता और मध्यम वर्ग के लिए कर राहत प्रदान की जानी चाहिए.

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