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कांग्रेस की पांच सीटों पर हार : आरोप-प्रत्यारोप, शिकायतों का दौर शुरू

Ranchi : चुनावी माहौल और गठबंधन की ताकत फेवर में होने के बावजूद कांग्रेस को लोकसभा की पांच सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा. प्रदेश नेतृत्व भले ही पिछले चुनाव की तुलना में वोट प्रतिशत बढ़ने को लेकर अपनी पीठ थपथपा ले, मगर हार के लिए जनता और माहौल कम अपनों की बेरुखी और भीतरघात के मामले सामने आ रहे हैं. प्रदेश प्रभारी और अध्यक्ष ने इसको लेकर बहुत जल्द समेकित रूप से चुनावी समीक्षा होने की बात कही है. मगर इतना तय है कि जिस दिन समीक्षा होगी, उस दिन उठा-पठक की पूरी संभावना है. रांची लोस : रांची लोकसभा को लेकर सुबोधकांत सहाय बहुत अधिक उत्साहित थे. हालांकि गत चुनाव के हिसाब से इस बार एक लाख से अधिक वोटों का इजाफा हुआ. मगर सहाय खेमे को बहुत सारे मामले में अपनों से ही दुख और शिकायत है. मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस के अपने चार मंत्री थे. इसमें एक मंत्री तो रांची में निवास करते हैं. मगर एक दिन भी पार्टी प्रत्याशी के लिए सावर्जनिक कार्यक्रमों में देखे नहीं गए. एक मंत्री प्रियंका गांधी के साथ रांची की चुनावी सभा में केवल नजर आए. न तो इसके पहले ओर न ही इसके बाद वे रांची में अपने समुदाय के वोटों के लिए कोई मीटिंग की और प्रत्याशी के लिए कोई चुनावी सभा और लॉबिंग की. यही हाल अन्य मंत्रियों का भी रहा. पार्टी की ओर से कई वरिष्ठ नेता बोर्ड-निगमों में विराजमान हैं, मगर वे निजी तौर पार्टी प्रत्याशी के लिए रांची में प्रियंका गांधी की चुनावी सभा को छोड़ कहीं भी नजर नजर नहीं आए. प्रदेश अध्यक्ष से लेकर पीसीसी कमेटी में भारी-भरकम पदाधिकारियों की सूची है,मगर कोई भी प्रत्याशी के लिए सार्वजनिक स्थलों पर खुलकर नहीं आए न ही निजी तौर कोई मेहनत की. सहाय खेमे को इस बात का भी मलाल है कि रांची विधानसभा झामुमो की प्रत्याशी रहीं राज्यसभा सांसद डॉ महुआ माजी का भी सहयोग खुलकर नहीं मिला. वे भी प्रियंका गांधी के सभा के दौरान ही एक दिन सार्वजनिक रूप से दिखीं. धनबाद लोस : धनबाद लोकसभा में भी भीतरघात के मामले सामने आ रहे हैं. मिली जानकारी के पूरा चुनाव अनुप सिंह ने अपने कंधे पर लेकर लड़े. धनबाद में किसी भी पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की चुनावी सभा नहीं होने का मलाल अनुप सिंह को है. मिली जानकारी के अनुसार, प्रियंका गांधी का प्रोग्राम शुरू में दो महिला प्रत्याशी यशस्विनी सहाय और अनुपमा सिंह के लिए तय किया जा रहा था. मगर ऐन मौके पर प्रियंका गांधी की चुनावी सभा धनबाद से काटकर गोड्डा कर दी गयी. इसके पीछे की वजह प्रदेश संगठन के अंदरूनी राजनीति को बताया जा रहा है. इसके अतिरिक्त लोकल झामुमो और कांग्रेस इकाई का अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बातें सामने आ रही हैं. गोड्डा लोस : गोड्डा लोकसभा में प्रदीप यादव को तो लोकल कांग्रेस, झामुमो और राजद कमेटी के लोगों का साथ मिला, मगर उन्हें अपने विधायक का ही पूरा साथ नहीं मिला. यह वही विधायक हैं जिन्हें पहले टिकट दिया गया तो और बाद में उनका टिकट वापस करके प्रदीप यादव को दिया गया. संसाधन के रूप में प्रदेश नेतृत्व से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने का मामला सामना आया है. चतरा लोस : सबसे अधिक भीतरघात के मामले चतरा से आ रहे हैं. केएन त्रिपाठी के टिकट मिलने के बाद से ही लोकल राजद टीम उनके खिलाफ हो गया था. उलगुलान रैली में राजद और त्रिपाठी समर्थकों के बीच जबरदस्त मारपीट हुई थी. चतरा में शुरू से ही त्रिपाठी को बाहरी प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था, जो चतरा से नहीं थे. ऊपर से प्रदेश नेतृत्व और लोकल कांग्रेस इकाई के द्वारा भी सहयोग नहीं मिलने के मामले सामने आ रहे हैं. हजारीबाग लोस : हजारीबाग में सीट से करीब-करीब यही मामले सामने आ रहे हैं. हजारीबाग संसदीय सीट के कांग्रेस विधायकों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने और लोकल संगठन इकाई चाहे वह झामुमो हो या फिर कांग्रेस की बेरूखी की बातें सामने आ रही हैं. प्रभारी ने कहा : हारी हुई सीट को लेकर कई तरह की शिकायतें मिल रही हैं. इसकी सामूहिक समीक्षा होनी चाहिए. बहुत जल्द चुनाव की जिम्मेवारी निभा रहे पदाधिकारियों के साथ बैठक परिणामों की समीक्षा होगी. अध्यक्ष ने कहा : कांग्रेस को जिन सीटों पर हार मिली है, उसकी गहराई से समीक्षा होगी. अगर मैं भी जिम्मेवार हूं तो जिम्मेवारी तय होगी. समग्रता से सभी बिंदुओं पर विचार होगा, ताकि पार्टी आगामी विधानसभा की तैयारी में जुट सके. इसे भी पढ़ें -BIG">https://lagatar.in/crpf-jawan-suffers-paralysis-attack-brought-to-ranchi-by-bsf-helicopter/">BIG

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