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रेहान वाड्रा की फोटोग्राफी प्रदर्शनी से जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें हटाये जाने पर विवाद, प्रियंका भड़की

National News : प्रियंका ने मोदी सरकार पर हमलावर होते हुए कहा, अब लोकतंत्र नहीं रहा. युवाओं की आवाज दबायी जा रही है. कहा कि जब कोई ताकतवर इंसान दूसरों की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो उसे पता भी नहीं चलता कि जिस सत्ता को वह बचाने की कोशिश कर रहा होता है, वह उसे पहले ही हार चुका होता है.
 
रेहान वाड्रा (फाइल फोटो)

National News : दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस द्वारा नो आइडिया इज फाइनल शीर्षक से आयोजित होनेवाली सोलो फोटोग्राफी प्रदर्शनी शुरू होने से पहले रेहान वाड्रा की विरोध-प्रदर्शन वाली तस्वीरें हटाये जाने का प्रियंका गांधी वाड्रा ने विरोध किया है.

 

 

प्रियंका ने मोदी सरकार पर हमलावर होते हुए कहा, अब लोकतंत्र नहीं रहा. युवाओं की आवाज दबायी जा रही है. कहा कि जब कोई ताकतवर इंसान दूसरों की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो उसे पता भी नहीं चलता कि जिस सत्ता को वह बचाने की कोशिश कर रहा होता है, वह उसे पहले ही हार चुका होता है.

 

 

कांग्रेस सासंद प्रियंका गांधी वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे और फोटोग्राफर रेहान वाड्रा ने कल बुधवार को जानकारी दी कि बीकानेर हाउस प्रशासन ने उनकी एकल प्रदर्शनी से हाल ही में दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी उनकी कई तस्वीरें हटा दीं. बता दें कि जुलाई माह में वोट चोरी, SIR के खिलाफ जोरदार आंदोलन हुआ था. CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गयी थी. 

  

नो आइडिया इज फाइनल शीर्षक प्रदर्शनी की झलक कल बुधवार को दिखाई गयी थी. प्रदर्शनी आज गुरुवार  से आम लोगों के लिए खोल दी गयी है.  यह रविवार तक जारी रहेगी. रेहान के अनुसार उन्हें बुधवार साढ़े तीन बजे कहा गया कि यदि आपने शाम पांच बजे तक तस्वीरें हटाई तो प्रदर्शनी रद्द कर दी जायेगी.

 

रेहान ने कहा, बीकानेर हाउस मैनेजमेंट ने 105 में से 75 तस्वीरें (विशेषकर जंतर-मंतर और युवा आंदोलनों से जुड़ी तस्वीरें और तिरंगे की फोटो) को आपत्तिजनक करार देते हुए उन्हें हटाने को कहा. 

 

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने आज अपने बेटे रेहान वाड्रा के लिए एक भावुक संदेश शेयर किया. लिखा कि दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित रेहान की फोटोग्राफी प्रदर्शनी से 70 से ज्यादा कलाकृतियां हटा दी गयी, क्योंकि उनमें कथित तौर पर राजनीतिक सामग्री थी.

 

इसी क्रम में कहा, जब सत्ता में बैठा कोई व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है तो उसे शायद इस बात का एहसास नहीं होता, लेकिन वह असल में उसी सत्ता को खो देता है जिसे वह बचाने की कोशिश कर रहा होता है. 
 

    
  

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