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कोरोना संक्रमण : पीएम मोदी पर हमलावर हुई शिवसेना, कहा, हिंदुस्तान कांग्रेस निर्मित व्यवस्था पर टिका हुआ है

इस तरह के संकट पाकिस्तान, रवांडा, कांगो जैसे देशों पर आते थे, लेकिन आज राजनेताओं की गलत नीतियों के कारण ऐसा समय हिंदुस्तान पर आया है

MumbaI : शिवसेना के मुखपत्र सामना में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर जोरदार हमला किया गया हैं. सामना में लिखा गया है कि कोरोना जिस तेजी से हिंदुस्तान में फैल रहा है, उससे पूरा विश्व संकट में आयेगा, इसलिए हिंदुस्तान को कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए देश ज्यादा से ज्यादा मदद करें, ऐसा यूनिसेफ ने कहा है.

सामना के अनुसार इस तरह के संकट पाकिस्तान, रवांडा, कांगो जैसे देशों पर आते थे, लेकिन आज राजनेताओं की गलत नीतियों के कारण ऐसा समय खुद को आत्मनिर्भर कहलाने वाले हिंदुस्तान पर आया है.  पीएम पर तंज कसा गया है कि गरीब देश आत्मनिर्भर भारत की मदद कर रहे हैं, तब भी पीएम सेंट्रल विस्टा का काम रोकने को तैयार नहीं हैं.

हर घंटे 150 लोगों की जान जा रही


सामना ने लिखा, हिंदुस्तान में पिछले 10 दिनों में सबसे अधिक कोरोना से हुई मौतों का वैश्विक रिकॉर्ड है. देश में हर घंटे में 150 लोगों की कोरोना से मौत हो रही है. पिछले 10 दिनों में हिंदुस्तान में 36,110 लोगों की कोरोना से मौत हो गयीहै. यह आंकड़ा धड़कनें बढ़ाने वाला है. अमेरिका, ब्राजील को हमने पीछे छोड़ दिया है. विश्व को अब हिंदुस्तान का भय लगने लगा है. हिंदुस्तान में जाने से लेकर व्यापार-उद्योग करने तक उन देशों ने अपने लोगों को रोक दिया है. हिंदुस्तान में हवाई यात्रा करने पर प्रतिबंध लगाया है.

इसका आर्थिक नुकसान हिंदुस्तान को हो रहा है. फिर भी देश टिका हुआ है तो 70 वर्षों से पंडित नेहरू, शास्त्री, इंदिरा जी, राजीव गांधी, नरसिंहराव, मनमोहन सिंह द्वारा बनाई गयी योजना, परियोजना और आत्मविश्वास पर ही. यह बड़ा पुण्य है. प्रधानमंत्री मोदी को देश संवारने के लिए कठोर परिश्रम और राजनीति रहित राष्ट्रवाद का विचार करना होगा. वैश्विक स्तर पर हिंदुस्तान की स्थिति विकट होना ठीक नहीं.

 

बांग्लादेश ने 10 हजार रेमडेसिवीर वायल दान के रूप में भेजी


सामना में लिखा गया है, बांग्लादेश ने हिंदुस्तान को 10 हजार रेमडेसिवीर वायल दान के रूप में भेजी है. भूटान जैसे देश ने ऑक्सीजन भेजा है. नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका जैसे देशों ने भी आत्मनिर्भर हिंदुस्तान को मदद का हाथ बढ़ाया है. स्पष्ट कहें तो आज भी हिंदुस्तान नेहरू-गांधी द्वारा निर्माण की गयी व्यवस्था पर ही टिका हुआ है. नहीं तो कोरोना की लहर में सवा सौ करोड़ लोग कब के खत्म हो गये होते.

 हिंदुस्तान में जल रही चिताओं का धुंआ अगल-बगल के देशों का दम घोंट रहा है. इस धुएं से कोरोना अपने देश में फैले नहीं, इसके लिए कई गरीब देश भी हिंदुस्तान की दयाभावना से मदद कर रहे हैं.

पीएम  सेंट्रल विस्टा का काम नहीं रोक रहे


सामना में  लिखा गया है,  गरीब देश हमें अपनी हैसियत के हिसाब से छोटी-मोटी सहायता कर रहे हैं, तो भी हमारे सम्माननीय प्रधानमंत्री महोदय 20 हजार करोड़ के महत्वाकांक्षी ‘सेंट्रल विस्टा’ परियोजना को रोकने के लिए तैयार नहीं हैं. दिल्ली में नया संसद भवन, उसमें प्रधानमंत्री का नया-नवेला महल, इन योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपए बर्बाद करना और फिर बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका जैसे देशों से कोरोना निवारण के लिए मदद स्वीकारना, इसका दुख किसी को नहीं, इस पर आश्चर्य होता है.

 

SC कोरोना को लेकर रोज केंद्र सरकार पर हंटर बरसा रहा है

लिखा है कि देश की अवस्था भयावह बनी हुई है. इस भय का सदमा हमारे दिल्लीश्वर ने कितना लिया, ये कहा नहीं जा सकता लेकिन विश्व ने हिंदुस्तान की इस परिस्थिति का बड़ा ही सदमा लिया है. कोरोना की दूसरी लहर के बीच तीसरी लहर का झटका इससे ज्यादा जोर से लगेगा, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है, लेकिन भाजपा के लोग आज भी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीतिक घेराबंदी करने से बाज नहीं आ रहे हैं.

 SC कोरोना को लेकर रोज केंद्र सरकार पर हंटर बरसा रहा है. कोई संवेदनशील या राष्ट्रभक्त सरकार होती तो राजनीतिक हानि-लाभ का विचार किये बिना सभी पार्टियों के प्रमुखों की एक राष्ट्रीय टीम बनाती और इस संकट से कैसे लड़ा जाये. इस पर सलाह-मशविरा करती, लेकिन     केंद्र सरकार मौन हो गयी है.

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