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झारखंड के चारों दिशा में वन्यजीवों के लिए बनेगा कॉरिडोर, एक्शन प्लान तैयार

  • क्षेत्रीय और प्रतिबंधित वन क्षेत्र कॉरिडोर के जरीए वन्य जीवों को मिलेगा संरक्षण
  • कॉरिडोर की कार्य योजना के लिए होगी सलाहकार की नियुक्ति
  • पिछले दो साल में वन क्षेत्र में 109.73 वर्ग किमी की हुई है वृद्धि
Ranchi : झारखंड के चारों दिशा में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कॉरिडोर बनेगा. इसके लिए वन विभाग ने एक्शन प्लान तैयार कर लिया है. इस एक्शन प्लान के तहत क्षेत्रीय और प्रतिबंधित वन क्षेत्रों में कॉरिडोर के जरीए वन्य जीवों को संरक्षण मिलेगा. इस एक्शन प्लान की कार्ययोजना को मूर्त रूप देने के लिए वन विभाग सलाहकार की नियुक्ति करेगा. बताते चलें कि राज्य का कुल अभिलिखित वन क्षेत्र 23,721 वर्ग किलोमीटर है. जो राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 29.76 फीसदी है. कुल दर्ज वन क्षेत्र में से आरक्षित वन 18.58 फीसदी, संरक्षित वन 81.28 फीसदी और अवर्गीकृत वन 0.14 फीसदी है. पिछले दो वर्षों में वन क्षेत्र में 109.73 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है.

कॉरिडोर के लिए होगा सीमांकन और मानचित्रण

कॉरिडोर के लिए सीमांकन और मानचित्रण का काम होगा. यह सीमांकन और मानचित्रण झारखंड की राज्य सीमा की परिधि के साथ मानव आबादी वाले क्षेत्रों में किया जाएगा. यह काम वन्यजीवों को संरक्षण देने के लिए दीर्घकालीन व्यवस्था के तहत की जाएगी. इस कॉरिडोर की खासियत यह भी रहेगी कि इससे सरकारी संसाधनों को बचाने के साथ बेहतर परिणाम भी प्राप्त होगा.

कॉरिडोर को कानूनी रूप से किया जाएगा अधिसूचित

एक्शन प्लान के तहत कॉरिडोर को कानूनी रूप से अधिसूचित किया जाएगा. साथ ही तकनीकी रूप से पहचानने और प्रबंधित किए जाने वाले पारिस्थितिक निकाय भी होंगे. निर्धारित वैज्ञानिक सिद्धांतों के तहत दीर्घकालिक संरक्षण के लिए सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के अनुरूप लोगों की भागीदारी के माध्यम से इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा.

एक्शन प्लान के मुख्य बिंदू

  • वन आवरण का होगा कम नुकसान
  • पसंदीदा गलियारे के रूप में जानवरों की आवाजाही
  • सह-अस्तित्व, पर्यावरण-अनुकूल विकास और हरित बुनियादी ढांचे पर खास ध्यान
  • गलियारा और खंडित को जोड़ने वाले गलियारे क्षेत्र की पहचान करना
  • गलियारों की पहचान और रणनीतिक योजना-रणनीति
  • सुरक्षा के उद्देश्य से गलियारों के लिए कार्य योजना (एसएपीसीसी) की तैयारी
  • प्रादेशिक/प्रबंधित वन प्रभागों में वन्यजीव गलियारों की बहाली और संरक्षण
  • क्षमता और योग्यता निर्माण के लिए एक प्रोटोकॉल की योजना और विकास
  • चिन्हित गलियारों के भीतर और आस-पास रहने वाले समुदायों के लिए कार्यक्रम
  • संरक्षण, प्रबंधन, बहाली के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध को बढ़ावा देना
  • जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के समाधान के लिए विकास तंत्र
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