- 30 दिनों में नए इंडस्ट्रीज को उनके क्लेम का लाभ देने पर HPC निर्णय लें
- आदेश का पालन नहीं हुआ तो कमेटी के सदस्यों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती
- HPC के अध्यक्ष (मुख्य सचिव )हैं, स्वयं 12 जून 2026 तक अनुपालन संबंधी शपथपत्र दाखिल करें
Ranchi: झारखंड सरकार के इंडस्ट्रियल पॉलिसी के तहत राज्य में स्थापित नए उद्योगों को जीएसटी (राज्य कर) का लाभ देने में राज्य सरकार की हाई पावर्ड कमेटी (HPC) के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है.
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मौखिक कहा कि इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2016 एवं 2021 के तहत झारखंड के नए उद्योगों को जीएसटी का लाभ देने में सरकार की ढुलमुल नीति सही नहीं है. नए इंडस्ट्री को इंडस्ट्रियल पॉलिसी के तहत अभिलंब उनका क्लेम दिलाया जाए. खंडपीठ ने अंतिम अवसर देते हुए HPC को 30 दिनों का अतिरिक्त समय इंडस्ट्रीज को उनके क्लेम का लाभ देने के लिए निर्णय लेने का निर्देश दिया है.
खंडपीठ ने झारखंड सरकार के मुख्य सचिव, जो HPC के अध्यक्ष हैं, को निर्देश दिया कि वे स्वयं 12 जून 2026 तक अनुपालन संबंधी शपथपत्र दाखिल करें. याचिकाकर्ताओ की ओर से अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया ने पक्ष रखा. खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंपी जा सकती. मामले की अगली सुनवाई 16 जून 2026 को होगी.
HPC ने स्वयं निर्णय लेने के बजाय उद्योग निदेशालय को जिम्मेदारी देकर टालने का किया प्रयास
इससे पहले राज्य की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि HPC मामलों में निर्णय लेगी, लेकिन तथ्यात्मक जांच के लिए उद्योग निदेशालय की सहायता ली गई है. जिसपर खंडपीठ ने कहा की HPC ने स्वयं निर्णय लेने के बजाय उद्योग निदेशालय को याचिकाकर्ताओं के दावों की जांच का निर्देश देकर जिम्मेदारी टालने का प्रयास किया है.
HPC सदस्यों के खिलाफ अवमानना के तहत कार्रवाई पर हो सकता है विचार
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि विस्तारित अवधि के भीतर निर्णय लेकर उसे संबंधित पक्षों को सूचित नहीं किया गया तो अदालत HPC सदस्यों के खिलाफ अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई पर विचार करेगी.
HPC ने तय समयसीमा के भीतर निर्णय नहीं लिया
खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद HPC ने तय समयसीमा के भीतर निर्णय नहीं लिया और न ही समय विस्तार के लिए आवेदन किया. अदालत ने चेतावनी दी कि यदि अब भी आदेश का पालन नहीं हुआ तो कमेटी के सदस्यों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है.
खंडपीठ ने M/s Narsingh Ispat Limited, M/s Multitech Auto Private Limited, M/s Multitech Auto Private Limited Unit-II, M/s Ramkrishna Forgings Limited और M/s Mal Metalliks Private Limited से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की.
यह बता दें कि राज्य सरकार ने झारखंड में नए इंडस्ट्रीज को प्रोत्साहन देने के लिए इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2016 एवं 2021 में यह निर्णय लिया है कि नए इंडस्ट्री द्वारा 5 साल के लिए दी गई राज्य कर (GST) की राशि में से 75% राशि की वापसी इंडस्ट्रीज को कर दी जाएगी. याचिकाकर्ता इंडस्ट्रीज ने इसी राशि का क्लेम राज्य सरकार से किया है.
कमेटी ने न तो आदेश का पालन किया और न ही कोई अनुपालन शपथ पत्र दिया
खंडपीठ ने कहा कि पूर्व में 23 दिसंबर 2025 और 6 जनवरी 2026 को पारित आदेशों में HPC को निर्देश दिया गया था कि वह 31 जनवरी 2026 अथवा 15 फरवरी 2026 तक मामलों में निर्णय लें. इसके बावजूद कमेटी ने न तो आदेश का पालन किया और न ही कोई अनुपालन हलफनामा दाखिल किया.
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अतिरिक्त दस्तावेज मांगने के लिए याचिकाकर्ताओं को अप्रैल 2026 में पत्र भेजा गया, जबकि आदेश का पालन फरवरी 2026 तक होना था. अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया आदेश अनुपालन से बचने और दोष याचिकाकर्ताओं पर डालने की कोशिश बताया.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Leave a Comment