- शिक्षकों को छठे वेतन पुनरीक्षण के तहत न्यूनतम प्रवेश वेतन 16290 रुपये नहीं देने का सरकार का आदेश रद्द
- सरकार ने कहा था, यह लाभ केवल झारखंड सचिवालय के सहायक/निजी सहायक कर्मियों पर लागू है
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षकों के वेतन निर्धारण मामले में राजीव रंजन पांडे सहित 80 प्रार्थियों के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें शिक्षकों को छठे वेतन पुनरीक्षण के तहत न्यूनतम प्रवेश वेतन (Entry Pay) 16290 रुपये देने से इनकार किया गया था.
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि 1 जनवरी 2006 से पूर्व नियुक्त मैट्रिक/इंटर प्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों को वित्त विभाग के 28 फरवरी 2009 के संकल्प के अनुसार संशोधित वेतनमान S-12 के तहत 16290 रुपये का न्यूनतम वेतन दिया जाए. सरकार ने 10 जून 2024 के मेमो संख्या 336 के जरिए यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया था कि यह लाभ केवल झारखंड सचिवालय के सहायक/निजी सहायक कर्मियों पर लागू है. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह व अधिवक्ता शशांक कुमार ने पक्ष रखा.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि यही विवाद पहले ही W.P.(S) No. 5897 of 2014 एवं समरूप मामलों में 27 नवंबर 2025 को तय हो चुका है. राज्य सरकार की ओर से भी स्वीकार किया गया कि वर्तमान मामला उसी प्रकार का है.
अदालत ने पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए मेमो संख्या 336 दिनांक 10.06.2024 को रद्द एवं निरस्त कर दिया और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को भी वही लाभ दिया जाए, जो पूर्व के मामलों में शिक्षकों को दिया गया था.
हालांकि राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उक्त फैसले के खिलाफ LPA (Filing) No. 2694 of 2026 दायर किया जा चुका है. इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि डिवीजन बेंच में राज्य सरकार सफल होती है, तो अपील में पारित आदेश इन याचिकाकर्ताओं पर भी लागू होगा. इसी के साथ अदालत ने याचिका और लंबित अंतरिम आवेदन को निष्पादित कर दिया.
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