बच्चों का सृजनात्मक और कलात्मक विकास करना है
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के बाल नाट्य विशेषज्ञ संजय लाल का कहना है कि आज हर बच्चे के हाथ में मोबाइल आ गया है. मोबाइल बच्चों को इतनी तरह की सामग्री उपलब्ध करा देती है जिससे बच्चों के हाथों से और उनके मस्तिष्क से मोबाइल छूटने का नाम ही नहीं लेता. वह इन बातों से अनभिज्ञ रहते हैं कि मोबाइल की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन उनके लिए कितने तरह की घातक बीमारियों का कारण बन सकती है. उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ नाट्य कार्यशाला का उद्देश्य सिर्फ अभिनय और रंगकर्म कराना ही शामिल नहीं है, बल्कि बच्चों का सृजनात्मक और कलात्मक विकास करना है. इसे भी पढ़ें – किसान">https://lagatar.in/farmers-son-prabhakar-and-marble-mistrys-son-bunty-ranchi-topper/">किसानका बेटा प्रभाकर और मार्बल मिस्त्री का बेटा बंटी रांची टाॅपर [wpse_comments_template]
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