बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे डॉ गौंझू- महुआ माजी
डॉ. महुआ माजी ने कहा कि डॉ. गौंझू विलक्षण प्रतिभा के धनी एवं सादगी के प्रतिमूर्ति थे. वे कहानीकार, शोधकर्ता, नाटककार, कवि, लेखक, समीक्षक, अनुवादक, संपादक, रंगकर्मी व कुशल तैराक भी थे. विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि डॉ. गौंझू के व्यक्तिव में झारखंड की सांस्कृतिक छाप झलकती थी. वे एक चलते-फिरते इनसाईक्लोपीडिया थे. मौके पर झारखंड राज्य खुला (ओपन) विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी नाथ साहू ने कहा कि नागपुरी भाषा की जड़ों को सुदृढ़ करने और इस मुकाम तक पहुंचाने में डॉ.गौंझू के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता.कोरोना महामारी ने ले ली थी डॉ. गौंझू की जान
डॉ. गौंझू की धर्मपत्नी सरस्वती गौंझू, महाबीर नायक, डॉ सुखदेव साहू, सबिता केशरी, सागर कुमार, डॉ. अजय नाथ शाहदेव, विक्की मिंज, महेश्वर शारंगी, कृष्ण जीवन पौराणिक, राकेश रमण, सुंदर सुब्रमणियम, रामकुमार नायक, श्रवण कुमार गिरी, अजय कुमार प्रतिज्ञा ने उनकी जीवन शैली पर प्रकाश डाला. रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में विभागाध्यक्ष रहते हुए उन्होंने झारखंड के सभी क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिए पुरजोर प्रयास किया. डॉ. बिसेश्वर प्रसाद केशरी एवं पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा के घनिष्ठ तिकड़ी के आखिरी कड़ी को कोरोना महामारी ने 15 अप्रैल 2021 को चीर निंद्रा में सुला दिया था. इस अवसर पर उनके परिजन सहित साहित्य जगत के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. कार्यक्रम को सफल बनाने में कुमार पीयूष, स्नेह प्रतीक, सुमति कुमारी, अर्चना आईंद ने योगदान दिया. इसे भी पढ़ें – हवा">https://lagatar.in/high-speed-car-fell-in-the-field-after-flying-in-the-air-two-youths-died-3-serious/">हवामें उड़कर खेत में गिरी तेज रफ्तार कार, दो युवक की मौत, 3 गंभीर [wpse_comments_template]

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