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दलित छात्रों ने लगाया आरोप: पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप को खत्म करना चाहती है केंद्र सरकार

Palamu: दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन, आंबेडकर विचार मंच, आईसा, भोजन का अधिकार अभियान तथा आंबेडकर छात्रावास के छात्रों के द्वारा संयुक्त रूप से नाग लोग उत्सव भवन में प्रेसवर्ता का आयोजन किया गया. प्रेसवार्ता में शामिल छात्रों व बुद्धिजीवियों ने कहा कि  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार आदिवासी एवं दलित छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति बंद करने वाली है. उन्होंने कहा कि 76 साल से जारी इस छात्रवृत्ति में पूरे देश के लगभग 62 लाख गरीब छात्र शामिल हैं. 2017 के फॉर्मुला के अनुसार राशि निर्गत नहीं कर एक तरह से इसे ख़त्म कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए दी जाने वाली राशि में केंद्र एवं राज्य के अनुपात को संशोधित कर रही है. सामाजिक न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा था कि केंद्र एवं राज्य के अंश में बदलाव के बाद इस योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार अपने संसाधनों से करेगी.

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राज्य का हिस्सा 90 प्रतिशत होगा

प्रेस वार्ता के दौरान कहा गया कि मीडिया रिपोर्ट बताती है कि हाल ही में पीएमओ की बैठक में भी यह आकलन किया गया कि केद्र का हिस्सा 10 % एवं राज्य का हिस्सा 90% होगा. 12वें वित्त आयोग के दौरान केंद्र का हिस्सा 60% एवं राज्य का हिस्सा 40% था, लेकिन 14 वें वित्त आयोग द्वारा केंद्र का हिस्सा 10% एवं राज्य का हिस्सा 90% कर दिया गया. अब राज्य के लिए अपने संसाधनों से PMS मद का 90% बोझ उठाना पड़ रहा है. इस मामले मे कई राज्य पहले ही कह चुके हैं कि  कि वे इसके लिए सक्षम नहीं हैं।  पंजाब हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार इस मुद्दे को सामजिक न्याय मंत्रालय में ले जा चुके हैं. इसे भी पढ़ें-  WTO">https://lagatar.in/indian-agriculture-is-also-caught-in-the-web-of-wto/10312/">WTO

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शिक्षा में न्याय की संवैधानिक गारंटी हो सुनिश्चित

प्रेस वार्ता के दौरान झारखंड के छात्र संगठन व छात्र नेता व सामाजिक संगठनों ने कहा कि हम मांग करते हैं कि देश के 62 लाख गरीब दलित एवं आदिवासी छात्रों को शिक्षा में न्याय की संवैधानिक गारंटी सुनिश्चित की जानी चाहिए. PMS के लिए दी जाने वाली राशि में केंद्र एवं राज्य के बीच 60 : 40 के अंश को लागू किया जाए. PMS के लिए प्रति वर्ष दी जाने वाली केन्द्रीय राशि को बढ़ा कर 10 हजार करोड़ किया जाए. सभी आदिवासी एवं दलित छात्रों की छात्रवृति की योग्यता के लिए आय की सीमा 2.5 लाख से बढ़ा कर 8 लाख की जाए. इसे भी पढ़ें- मिर्जापुर">https://lagatar.in/munna-bhaiya-of-mirzapur-changed-his-surname/10325/">मिर्जापुर

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ये रहे शामिल

प्रेस वार्ता को दौरान एनसीडीएआर के राज्य समान्वयक मिथिलेश कुमार, भोजन के अधिकार अभियान व झारखंड नरेगा वॉच के राज्य समन्वयक जेम्स हेरेंज, आईसा के जिला अध्यक्ष दिव्य भगत, राज्य कमेटि सदस्य त्रिलोकीनाथ, आंबेडकर विचार मंच से गणेश रवि,जन संग्राम मोरचा के युगल पाल, झारखंड क्रांति मच के शत्रुध्न कुमार शत्रु, छात्र नेता बेबी कुमारी, रामडालटन, मेघा राम डालटन, अनामिका हेरेंज, अनुराग कुमार, बबलू कुमार रवि, आलोक कुमार, जसवंत कुमार  सहित अन्य शामिल रहे. इसे भी पढ़ें-  मुख्यमंत्री">https://lagatar.in/administration-took-action-as-soon-as-the-chief-minister-took-cognizance-two-soldiers-including-sub-inspector-of-pank-police-station-suspended/10304/">मुख्यमंत्री

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