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दलमा वन्यजीव अभयारण्य मामला : झारखंड के मुख्य सचिव और PCCF को CEC ने भेजा नोटिस

Ranchi/Jamshedpur : केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने वन्यजीव अभयारण्य एवं उससे जुड़े वन, पर्यावरण और जैव-विविधता संरक्षण के गंभीर मुद्दों को लेकर पर्यावरण व वन्यजीव कानूनों के खुले उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए झारखंड के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF -वन्यजीव वार्डेन) को नोटिस जारी कर आगामी 09 सितंबर को होने वाली सुनवाई में उपस्थित रहने को कहा है.
 
दलमा वन्यजीव अभयारण्य में बनाया गया टूरिस्ट कॉटेज
  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की अनुमति के बिना 11 करोड़ से पर्यटन लॉज बनाने का मामला
  • विधानसभा में भी विभाग मान चुका है कि नियमों का हुआ है उल्लंघन

Ranchi/Jamshedpur :  दलमा वन्यजीव अभयारण्य (Dalma Wildlife Sanctuary) के अति-संवेदनशील कोर एरिया में नियमों को ताक पर रखकर 11 करोड़ की योजना पास कर बनाए गए टूरिस्ट कॉटेज और लॉज मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (Central Empowered Committee - CEC) ने संज्ञान लिया है.

 

समिति ने वन्यजीव अभयारण्य एवं उससे जुड़े वन, पर्यावरण और जैव-विविधता संरक्षण के गंभीर मुद्दों को लेकर पर्यावरण व वन्यजीव कानूनों के खुले उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए झारखंड के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF -वन्यजीव वार्डेन) को नोटिस जारी कर आगामी 09 सितंबर को होने वाली सुनवाई में उपस्थित रहने को कहा है. 

 

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वनस्पति को नष्ट और वन भूमि को तोड़कर बनाए गए टूरिस्ट कॉटेज व लॉज 

कोर एरिया में तोड़ी गई वन भूमि, 2 अगस्त को हुआ था उद्घाटन 

सुप्रीम कोर्ट में दायर टी.एन. गोदावर्मन वाद (W.P. 202/1995) के तहत सीईसी के समक्ष जमशेदपुर के पर्यावरण कार्यकर्ता व अधिवक्ता प्रतीक शर्मा ने यह याचिका दायर की है. याचिका में साक्ष्यों के साथ बताया गया है कि अभयारण्य के मकलाकोचा और पिंड्राबेरा क्षेत्र में वनस्पति को नष्ट कर और वन भूमि को तोड़कर गैर-वानिकी गतिविधियों के तहत टूरिस्ट कॉटेज व लॉज बनाए गए हैं. मकलाकोचा में नवनिर्मित कॉटेज का विधिवत उद्घाटन भी बीते 2 अगस्त 2026 को कर दिया गया. यह निर्माण पर्यटन विभाग के फंड से वन विभाग द्वारा कराया गया है.

 

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पिंड्राबेरा क्षेत्र में टूरिस्ट कॉटेज व लॉज बनाए गए

NBWL की पूर्व अनुमति अनिवार्य

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 33(1)(ए) के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, किसी भी अभयारण्य के भीतर व्यावसायिक उपयोग के लिए किसी भी प्रकार के टूरिस्ट लॉज (सरकारी लॉज सहित) का निर्माण केवल राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की पूर्व स्वीकृति के बाद ही किया जा सकता है.

 

गौरतलब है कि झारखंड विधानसभा के छठे मॉनसून सत्र के दौरान जमशेदपुर पूर्वी के विधायक द्वारा पूछे गए एक अल्पसूचित प्रश्न के उत्तर में स्वयं वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया था कि इस निर्माण के लिए एनबीडब्ल्यूएल (NBWL) से कोई अनुमति नहीं ली गई है. आवेदन में यह भी बताया गया है कि दलमा क्षेत्र हाथियों सहित अनेक वन्यजीवों का महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है. 

 

वन क्षेत्र में अतिक्रमण, अनियोजित निर्माण, खनन अथवा अन्य व्यावसायिक गतिविधियां, सड़क एवं आधारभूत संरचना का विस्तार तथा मानवीय हस्तक्षेप वन्यजीवों के पारंपरिक कॉरिडोर और पर्यावरणीय तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसी गतिविधियों से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने के साथ-साथ वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन और उनके प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है.

 

प्रबंधन योजना के नाम पर गुमराह करने का आरोप 

याचिकाकर्ता ने सीईसी को बताया कि वन विभाग ने विधानसभा में यह दावा कर गुमराह करने की कोशिश की कि निर्माण 2020-21 से 2029-30 की स्वीकृत प्रबंधन योजना (Management Plan) के तहत हुआ है. जबकि हकीकत यह है कि स्वीकृत प्रबंधन योजना के पैरा 6.3.2.2 और 7.4.2 में केवल पुराने पर्यटक आवासों के सुधार/रख-रखाव का प्रावधान है. किसी भी नए कॉटेज के निर्माण की अनुमति उसमें दर्ज नहीं है. बिना केंद्र की मंजूरी के वन भूमि का ऐसा उपयोग वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम का भी सीधा उल्लंघन है.

 

इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) नियमों की भी धज्जियां उड़ी 

दलमा वन्यजीव अभयारण्य के लिए 29 मार्च 2012 को जारी ESZ अधिसूचना के पैरा 2(5) के तहत अभयारण्य सीमा के 300 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का पक्का कंक्रीट निर्माण पूरी तरह वर्जित है. अधिसूचना के मुताबिक, पर्यटन संबंधी गतिविधियां केवल तभी मान्य हो सकती है, जब राज्य सरकार द्वारा 'जोनल मास्टर प्लान' बनाया गया हो. राज्य में दलमा के लिए आज तक कोई जोनल मास्टर प्लान तैयार ही नहीं हुआ, फिर भी खुलेआम कंक्रीट का जाल बिछा दिया गया.

 

अवैध ढांचे ध्वस्त करने और अफसरों पर अवमानना की मांग 

सीईसी के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगों में अभयारण्य के भीतर बिना वैधानिक मंजूरी के किए गए सभी अवैध निर्माणों को अविलंब रोका जाए. अवैध रूप से खड़े किए गए सभी पर्यटक कॉटेज और ढांचों को तत्काल ध्वस्त (Demolish) करने का आदेश दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों की अवमानना करने और बिना बोर्ड अनुमति के निर्माण कराने वाले दोषी अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी व अवमानना की कार्रवाई की जाए.

 

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