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दलमा के बाघ को मिलेगा नया ठिकाना, पलामू टाइगर रिजर्व लाने की है तैयारी

Palamu: दलमा के जंगलों में भटक रहे बाघ को पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) लाने की तैयारी की जा रही है, जिसके लिए वन विभाग ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) से मंजूरी मांगी है. जैसे ही अनुमति मिलेगी, बाघ को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित तरीके से पलामू टाइगर रिजर्व लाया जाएगा. बाघ को दलमा से पलामू लाने की पूरी प्रक्रिया में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट की टीम भी मौजूद रहेगी. इसे भी पढ़ें -बहुबाजार">https://lagatar.in/50-80-rupees-are-collected-every-day-from-those-selling-datuvan-and-dry-greens-in-bahubazar/">बहुबाजार

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कैसे पहुंचा बाघ दलमा?

बाघ मूल रूप से पलामू टाइगर रिजर्व का निवासी माना जा रहा है. लेकिन प्राकृतिक कॉरिडोर के माध्यम से वह दलमा पहुंच गया. पिछले कुछ महीनों से यह बाघ पश्चिम बंगाल के पुरुलिया और झारखंड के दलमा जंगलों में घूम रहा है. पलामू टाइगर रिजर्व की विशेष टीम उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है.

शिकार की कमी के कारण मवेशियों पर निर्भर है बाघ

दलमा वन क्षेत्र मुख्य रूप से हाथियों के लिए उपयुक्त है, लेकिन यहां हिरण, चीतल, नीलगाय और बायसन की संख्या बेहद कम है. इसके कारण बाघ को अपने भोजन के लिए मवेशियों का शिकार करना पड़ रहा है. इसके अलावा दलमा वन क्षेत्र शहरी आबादी से सटा हुआ है, जिससे बाघ की मौजूदगी स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बन गई है.

पलामू टाइगर रिजर्व क्यों सुरक्षित है?

पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) बाघों के लिए एक संरक्षित क्षेत्र है और यह सतपुड़ा जंगल तक फैले टाइगर लैंडस्केप कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है. ओडिशा के सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में हाल ही में इसी प्रकार का एक रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया था.

क्या पलामू में स्थायी रूप से रहेगा बाघ?

विशेषज्ञों के अनुसार, बाघ 400-500 किलोमीटर के दायरे में घूमता है. अब एनटीसीए की मंजूरी और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं. इसे भी पढ़ें -योगी">https://lagatar.in/yogi-said-politics-on-mahakumbh-is-not-right-sp-leaders-know-akbars-fort-but-are-unaware-of-saraswati-well/">योगी

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