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पेयजल संकट नहीं के बराबर : अंजना लकड़ा
सिमडेगा जिला के कोलेबिरा प्रखंड मे पेयजल संकट ज्यादा जगह पर नहीं के बराबर है. कोलेबिरा मे पर्याप्त पानी की व्यवस्था दो जल मीनार के माध्यम से किया गया है. इसमें सुबह-शाम पानी का सप्लाई किया जाता है. जिससे कोलेबिरा के हजारों परिवारों की प्यास बुझती है. साथ ही पानी का संकट दूर होता है. प्रतिदिन लगभग साढ़े 3.5 लाख लीटर पानी सप्लाई की जाती है. जिसमें कोलेबिरा डैम स्थित जलमीनार से 2 लाख लीटर और हाईस्कूल स्थित जल मीनार से डेढ़ लाख लीटर पानी की सप्लाई की जाती है. पेयजल व्यवस्था के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर जगह-जगह चापाकल लगाई गई है. यहां प्रत्येक 50 परिवार में एक चापाकल है, जो कोलेबिरा के लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर काम करती है. लेकिन कोलेबिरा के बानो रोड में इक्का-दुक्का चापाकल है. जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लोगों का कहना है कि इस रोड पर कई चापाकल हैं, लेकिन पानी नहीं है. यह ठीक से चले तो पेयजल की समस्या नहीं होगी. इस पर कोलेबिरा पंचायत की मुखिया अंजना लकड़ा ने कहा कि इसके बावजूद भी किन्ही व्यक्तियों को अगर पानी की समस्या आती है तो हमें बताएं. हम वहां पर पेयजल व्यवस्था करा देंगे. साथ ही खराब चापाकल है तो हमें सूचित करें. चापाकाल को तुरंत मरम्मत कर दुरुस्त किया जाएगा. इसमें सबकी सहभागिता जरूरी है.इस गर्मी में गांव की नहीं बूझ सकेगी प्यास
हर-घर, नल योजना का काम है धीमा, 10% ही हो सका है काम इस गर्मी में भी झारखंड के लोगों की प्यास नहीं बूझ पाएगी. केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना हर-घर, नल-जल योजना का काम झारखंड में काफी धीमा है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि झारखंड के 17 जिलों में अब तक काम 26-50 प्रतिशत तक पहुंच पाया है, वहीं तीन जिले में 11-25 प्रतिशत और एक जिले में 10 प्रतिशत ही काम पूरा हो पाया है. जबकि इसे और अधिक होना चाहिए था. योजना की प्रगति पर गौर करें तो कम से कम इस गर्मी में तय 61,18,955 लाख में सभी घरों तक पानी नहीं पहुंच पाएगा. क्योंकि अब तक केवल 19,52,756 घरों तक ही वाटर कनेक्शन दिया जा सका है. यानि की अगले 12 महीने में 41,661,99 घरों तक पानी पहुंचाना होगा. इसके लिए अब शहरी इलाके में टैंकर का सहारा लिया जा रहा है. इसी के भरोसे प्यास बुझाने की कोशिश की जाएगी. इसी पर लोगों की उम्मीद टिकी है.पूरी योजना पर एक नजर
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत हर घर को नल से पानी उपलब्ध कराने के लिए हर घर, नल-जल योजना 15 अगस्त 2019 को पूरे देश के लिए लॉन्च किया था.
- इस योजना के तहत जहां पर सरफेस वाटर (जैसे कोई जलाशय, नदी, तालाब या पोखर) हो, या फिर जहां सरफेस वाटर की व्यवस्था नहीं है, वहां पर बोरिंग करके सोलर प्लेट बेस्ड ओवर हेड टैंक बनाकर और पाइप बिछाकर हर घर तक नल से पानी पहुंचाना लक्ष्य है.
- केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 50-50 प्रतिशत. यानि की पूरी योजना पर केंद्र सरकार 50 और राज्य सरकार 50 प्रतिशत खर्च वहन करेगी. इसे पूरा करने का लक्ष्य मार्च 2024 रखा गया है. जिसमें झारखंड का लक्ष्य 61,18,955 तय किया गया है.
- शेष बचे मार्च 2024 तक यानि की 12 महीने में कुल 41,661,99 घर तक पहुंचना है पानी.
- मार्च 2023 तक झारखंड में 19,52,756 घर तक ही पानी पहुंचा है.
जिलावार काम का प्रगति रिपोर्ट प्रतिशत में
पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, खूंटी, गुमला, रांची, लोहरदगा, लातेहार, गढ़वा, चतरा, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, देवघर, दुमका, साहेबगंज, कोडरमा, रामगढ़, सिमडेगा : 26-50 प्रतिशत सिमडेगाएनओसी नहीं मिलने से वृहद जलापूर्ति योजना फिर अटकी
alt="" width="1080" height="599" /> आदित्यपुर की ढाई लाख आबादी को पाइप लाइन जलापूर्ति का लाभ देने के लिए 395 करोड़ रुपए की आदित्यपुर वृहत जलापूर्ति योजना की नींव 2018 में रखी गई थी. इस योजना को लेकर लोगों में आस जगी थी कि पेयजल की समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यह योजना वन विभाग द्वारा वन भूमि की एनओसी नहीं देने की वजह से अटकी पड़ी है. इस योजना के तहत करीब 500 किलोमीटर पाइप लाइन और दो जगहों पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के साथ 11 जलमीनारों का निर्माण होना है. पाइप लाइन बिछाने का 90 प्रतिशत कार्य हो चुका है. 10 जलमीनारों का कार्य भी प्रगति पर है, लेकिन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट जहां बनना है, वह वन भूमि है. इस पेंच में यह योजना 2 साल से अटकी पड़ी है. योजना के संबंध में नगर निगम के अपर नगर आयुक्त गिरिजा शंकर प्रसाद बताते हैं कि वाटर ट्रीटमेंट के लिए सपड़ा में 60 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण होना है. जिसके लिए वन विभाग की साढ़े 11 एकड़ जमीन की जरूरत थी. वन विभाग को जमीन के बदले साढ़े 11 एकड़ जमीन नीमडीह में उपलब्ध करा दी गई है. अब वन विभाग हस्तांतरित जमीन पर पौधरोपण कर डेवलप करने की शर्त रख दी है, तभी वह जमीन का एनओसी देगा. इसलिए काम रूका है. जामताड़ा
1 लाख 17 हजार घरों तक नहीं पहुंचा नल से जल
alt="" width="1280" height="720" /> जिले की जलापूर्ति योजना (हर घर जल योजना) के तहत 1 लाख 47 हजार घरों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य था. गर्मी के दस्तक और पेयजल संकट की आहट के बाद विभाग की ओर से 30 हजार घरों तक ही नल के जरिए पानी पहुंचने का दावा किया जा रहा है. फिलहाल करमाटांड़ में सिकटिया डैम से पानी पहुंचाने की योजना शुरू हुई है. लेकिन निर्माण कार्य की गति कछुआ को भी मात दे रही है. इधर, 16 साल बीत जाने के बाद भी नारायणपुर वासियों को आज तक एक बूंद पानी नसीब नहीं हो पाया है. नारायणपुर के ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नारायणपुर प्रखंड कार्यालय में 88 लाख की लागत से 50 हज़ार गैलन क्षमता का जलमीनार का निर्माण कराया गया. लेकिन निर्माण पूर्ण होने के बाद भी आज तक इस जल मीनार से एक बूंद पानी की सप्लाई नहीं हो पायी. प्यास बुझाने की बजाय यह जलमीनार सिर्फ शोभा की वस्तु बन कर मुंह चिढ़ा रहा है.
नारायणपुर प्रखंड कार्यालय में शोभा की वस्तु बनी जलमीनार
[caption id="attachment_576202" align="aligncenter" width="1280"]alt="" width="1280" height="576" /> क्या कहते हैं ईई[/caption] पीएचईडी विभाग के कार्यपालक अभियंता राहुल प्रियदर्शी ने कहा कि हर घर जल योजना के तहत करमाटांड़ प्रखंड में कार्य प्रगति पर है. काम किया जा रहा है. गर्मी में पानी के प्रबंध को लेकर चापाकल को दुरूस्त रखने का निर्णय लिया गया है. इससे फायदा होगा. पानी की समस्या नहीं रहेगी. परिवार में एक चापाकल है. यह कोलेबिरा के लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ठीक से काम करती है. पलामू
हुसैनाबाद में तेजी से सूखने लगा है चापानल
alt="" width="1239" height="749" /> गर्मी बढ़ने के कारण हुसैनाबाद प्रखंड क्षेत्र में लगातार वाटर लेवल घट रहा है. गांव में हैंडपंप सूखने की समस्या आने लगी है. कहीं हैंडपंप तेजी से सूखता जा रहा है. पिछले साल मानसून में सामान्य से कम वर्षा हुई थी. जिसका असर अब दिख रहा है. जलस्तर कम होने से गांव में पानी की समस्या आने लगी है. कई हैंडपंपों से पानी नहीं निकलने पर लोगों को पेयजल की समस्या हो रही है. अभी से ही चापाकल पर लंबी लाइन लगनी शुरू हो गई है. हुसैनाबाद, हैदरनगर और मोहम्मदगंज में भी यही स्थिति है. कुल मिलाकर 3300 हैंडपंप लगे हुए हैं. जिसमें 175 खराब हैं. वही पाइप बदली नहीं होने के कारण 250 से अधिक चापानल खराब हैं. बढ़ियाडी में दो हैंडपंप फ्लोराइड युक्त पाए गए हैं. बता दें कि हुसैनाबाद की ग्रामीण जनसंख्या 2011 के जनगणना के अनुसार 133716 है. इन पर जल संकट गहराने लगा है. वहीं हुसैनाबाद, हैदरनगर और मोहम्मदगंज मैं कहीं भी ऐसा जलस्रोत नहीं है, जहां से लिफ्ट कर या फिर टंकी से लोगों को पानी दिया जा सके. अब लोगों की उम्मीद हैंडपंप पर ही टिकी है. 2011 के जनगणना के अनुसार 133716 आबादी है. वहीं इतनी बड़ी आबादी पर हुसैनाबाद व हैदरनगर कहीं भी ऐसा जलस्रोत नहीं है
पानी की पाइपलाइन से 17 हजार घरों को जोड़ने का है लक्ष्य
चाईबासा नगर परिषद क्षेत्र में शहरी जलापूर्ति के तहत घर-घर आपूर्ति का कार्य जोरों पर है. हर-घर जलापूर्ति योजना के तहत पेयजल स्वच्छता प्रमंडल चाईबासा द्वारा शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में 17,000 घरों को पाइप लाइन के माध्यम से पानी का कनेक्शन देना है. इस प्रक्रिया के तहत अब तक 12,500 घरों को कनेक्शन दिया जा चुका है. शेष घरों मे कनेक्शन देने का कार्य जारी है. नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि हर घर जलापूर्ति योजना के तहत लोगों को यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्र में थोड़ी असुविधा हो रही है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस सुविधा को लेने को तैयार नहीं हो रहे हैं. उन्हें समझा-बुझाकर कार्य किया जा रहा है. उम्मीद है कि शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति का कार्य जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा.जिले के 235 गांवों में टैंकर से होगी जलापूर्ति, 750 चापाकल खराब
alt="" width="1600" height="1200" /> भीषण गर्मी में लोगों को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े इसके लिए जिला प्रशासन प्रयत्नशील है. 10 मार्च को समारहणालय सभागार में जल संकट दूर करने को लेकर डीडीसी प्रभात कुमार बरदियार ने मैराथन बैठक की. बैठक में डीडीसी ने कहा कि पिछले वर्ष कम बारिश होने के कारण पहाड़ी एवं मैदानी इलाके में जल संकट से लोगों को जूझना पड़ रहा है. पहाड़ी इलाके के चिह्नित 235 गांवों में टैंकर से जलापूर्ति की जाएगी. इस इलाके में भू जल स्तर नीचे जा चुका है और झरना भी सूख गया है. 272 विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रो में सोलर आधारित पेयजल आपूर्ति की जाएगी. बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता गोविंद कच्छप ने कहा कि जिले में 15 हजार चापाकाल है. जिसमें 750 खराब पड़े हैं. उनकी बातों को सुनकर डीडीसी ने खराब पड़े चापाकलों को ठीक कराने का निर्देश दिया. प्रखंडवार लोगों से अपील की गई है कि अपने प्रखंड के जेई से शिकायत कर चापाकल ठीक करा सकते हैं. इसके लिए प्रखंडवार जेई का मोबाइल नंबर भी जारी किया गया है. जो इस, प्रकार है - साहिबगंज, बोरियो, तालझारी, मंडरो प्रखंड के जेई दिलीप मंडल का मोबाइल नंबर 8789271793. राजमहल उधवा, प्रखंड के जेई लक्ष्मी नारायण सिंह का मोबाइल नंबर 7979764218. पतना, बरहरवा के जेई उमेश मंडल का मोबाइल नंबर 9771513518. बरहेट प्रखंड के जेई संजीव कुमार का मोबाइल नंबर 7903179626. साहिबगंज
एक साल पहले लाखों की लागत से बनाया गया था तालाब
alt="" width="1080" height="580" /> मात्र एक साल पहले लातेहार प्रखंड के तरवाड़ीह पंचायत के लुंडी ग्राम में 12,49,740 रुपये की लागत से अमृत सरोवर बनाया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के दौरान अमृत सरोवर नामक एक अभियान की परिकल्पना की थी. इसका उदेश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सिंचाई एवं दैनिक उपयोग की पानी उपलब्ध कराने की थी. गत वर्ष तीन अप्रैल को इस तालाब निर्माण का कार्य शुरू किया गया था. लेकिन महज एक वर्ष में ही लातेहार में इस अभियान की पोल खुल गयी. इस तालाब में पानी नहीं है. तालाब सूखा है. भूमि संरक्षण विभाग के द्वारा इस तालाब का निर्माण कराया गया था. तालाब का क्षेत्रफल 1.3 एकड़ और गहराई 31 गुणा छह फीट है. हालांकि विभागीय अधिकारी बताते हैं कि गत वर्ष अपेक्षाकृत बारिश नहीं होने और इस वर्ष प्रचंड गर्मी पड़ने के कारण तालाब सूख गया है. आरोप तो यह भी है कि जिस जगह पर इस अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया है वहां पूर्व में भी एक तालाब था. उसी पर अमृत सरोवर का निर्माण करा दिया गया है. रामगढ़
एक लाख से अधिक घरों में पेयजल पहुंचाने का है लक्ष्य
alt="" width="1080" height="596" /> पेयजल समस्या को दूर करने के लिए सरकार की ओर से कई जिलों में पेयजल स्वच्छता विभाग की ओर से जलापूर्ति योजना हर घर जल योजना की शुरुआत की गई है. लेकिन यह योजना कहीं कागजों में सिमटी है तो कहीं योजना की कार्य काफी धीमी गति से चल रही है. रामगढ़ जिले में 6 प्रखंड हैं. इन छह प्रखंडों में हर घर जल योजना के तहत 1,41,536 घरों में जल पहुंचाने का लक्ष्य है. लेकिन मौजूदा समय की बात करें तो अभी तक 85,775 घरों तक की इस योजना का लाभ पहुंच सका है. लगभग 61 प्रतिशत घरों तक इस योजना का कार्य पूरा होना बताया जाता है .मार्च 2024 तक बाकी बचे सभी घरों में जल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित है. फिलहाल जिले के 6 प्रखंडों में कार्य धीमी गति से चल रही है. धनबाद
1800 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना है स्वीकृत, कई लंबित
alt="" width="474" height="302" /> धनबाद के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 1800 करोड़ की जलापूर्ति योजना पर काम चल रहा है. 942.40 करोड़ रुपये की निरसा-गोविंदपुर मेगा जलापूर्ति योजना, 75.75 करोड़ रुपये की बलियापुर जलापूर्ति योजना, और 441 करोड़ रुपए की शहरी जलापूर्ति योजना फेज टू के अलावा झमाडा के पास 310 करोड़ की जलापूर्ति योजना लंबित है. सभी योजनाएं 2 से 4 साल पीछे चल रही हैं. जनवरी 2023 में टहल कंपनी को हटाने के बाद से मेगा जलापूर्ति योजना का काम बंद है. योजना का 50 प्रतिशत, झमाडा जलापूर्ति योजना का 40 प्रतिशत व शहरी जलपूर्ति योजना फेज टू का 45 प्रतिशत काम बाकी है. सभी योजनाओं के पूरा होने से 15 लाख से अधिक आबादी को शुद्ध पानी मिलेगा. फिलहाल एक बड़ी आबादी शुद्ध पानी से वंचित है. नदी, तालाब, कुंआ, जोरिया और चापानल पर आश्रित है.
ज्यादातर चापानल हैं खराब
शहरी क्षेत्र में 3836 चापानल हैं. जिसमें आधा खराब है. निगम ने अभी तक टेंडर नहीं निकाला है. फिलहाल पानी की कमी दूर करने के लिए 25 टैंकर की मरम्मत कराई गई है. वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 16 हजार सरकारी चापानल है. जिसकी मरम्मत के लिए पेयजल विभाग ने जिले के 10 प्रखंड में 11 टीम बनाई है. कुछ स्थानों पर 2207 चापानल की मरम्मत के लिए टेंडर भी निकाला है. जबकि यह पहले ही हो जाना चाहिए था. बेरमोउद्घाटन तो हुआ पर चालू नहीं हो सकी शहरी जलापूर्ति योजना
alt="" width="1152" height="864" /> फुसरो नगर परिषद क्षेत्र के सभी 28 वार्डों की आबादी के लिए 57 करोड़ की लागत से तैयार शहरी जलापूर्ति योजना का उद्घाटन हुए चार महीने बीत गये, पर योजना अब तक चालू नहीं हो सकी. पुरानी योजना से फिलहाल मात्र छह वार्ड में ही नगर परिषद की ओर से जलापूर्ति की जाती है. 22 वार्डों में सीसीएल जलापूर्ति करती है. हर वार्ड की आबादी लगभग तीन हजार है. शहरी जलापूर्ति योजना के तहत बनी जलमीनार
- सभी वार्डों में पाइप बिछाने का काम भी हो चुका है पूरा.
- पांच वर्ष पूर्व नई जलापूर्ति परियोजना का निर्माण कार्य हुआ शुरू
- झारखंड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने डीपीआर की थी तैयार.
- राकड्रिल इंडिया कंपनी को मिला निर्माण का ठेका.
- रुक्मिणी देवी पब्लिक स्कूल फुसरो के निकट दामोदर नदी किनारे लगा है फिल्टर प्लांट
- नवंबर 2022 को शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो और बेरमो विधायक अनूप सिंह ने किया था योजना का ऑनलाइन उद्घाटन.
पार्षदों की चिंताएं
- वार्ड नंबर 25 की पार्षद अनिता कुमारी ने कहा कि फुसरो नगर परिषद में न्यूनतम कनेक्शन चार्ज 7 हज़ार रुपए लिया जा रहा है. नगर परिषद को जनहित में कनेक्शन चार्ज और मासिक शुल्क को न्यूनतम करना चाहिए.
- वार्ड नंबर 21 की पार्षद सुभद्रा कुमारी ने कहा कि फुसरो नगर परिषद क्षेत्र में पानी की भयंकर समस्या है. शहरी जलापूर्ति योजना चालू होने से पानी की समस्या हल होगी. लेकिन कनेक्शन चार्ज ज्यादा है और मासिक शुल्क भी निर्धारित नहीं है. जिसके कारण ये सभी लोगों के लिए संभव नहीं है.
नगर निगम में नौ टैंकर उपलब्ध, 10 टैंकर के हुए हैं टेंडर
alt="" width="1920" height="954" /> गर्मी के दस्तक देते ही शहर में पेजयल की परेशानी बढ़ गई है. शहर में छड़वा डैम का जलस्तर भी गिर रहा है. ऐसे में शहर में एक वक्त ही पेयजलापूर्ति की जा रही है. हजारीबाग के कटकमदाग प्रखंड स्थित लूटा डैम में भी जलस्तर गिरता जा रहा है. इस डैम से लगभग 10 पंचायतों में सिंचाई की व्यवस्था थी. जबकि इस पर बड़ी आबादी निर्भर है. ऐसे में अब नहर के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था भी नहीं हो पाएगी. पेयजल के साथ ही खेत भी प्यासे रहेंगे. साफ-सफाई और गहरीकरण के अभाव में डैम का जलस्तर काफी गिर गया है. इधर पूरे शहर में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से जलापूर्ति की जा रही है. हजारीबाग नगर निगम में 36 वार्ड हैं, लेकिन वर्तमान में टैंकर से पानी सप्लाई की आवश्यकता नहीं पड़ रही है. जब गर्मी के शुरुआत में यह हाल है तो आनेवाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. इसे लेकर लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरनी शुरू हो गयी हैं. हजारीबाग नगर आयुक्त प्रेरणा दीक्षित बताती हैं कि गर्मी को लेकर नगर निगम ने व्यापक इंतजाम कर रखा है. फिलहाल नगर निगम के पास नौ टैंकर हैं. 10 टैंकर की खरीदारी के लिए टेंडर हो चुका है. शहर में गंभीर जलसंकट की स्थिति होने पर टैंकर के माध्यम से विभिन्न वार्डों में पेयजलापूर्ति की जाएगी. बता दें कि कटकमसांडी प्रखंड के कंचनपुर में ग्रामीण जलापूर्ति योजना का शिलान्यास राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने 23 सितंबर 2021 को किया था. इसमें नौ गांवों के 2,936 घरों में नलों से शुद्ध पेयजल मिलना है. इससे 12,413 लोगों को इसका लाभ मिलता. अभी यह योजना धरातल पर नहीं उतरी है. फिलहाल काम चल रहा है. कटकमसांडी प्रखंड के कंचनपुर में ग्रामीण जलापूर्ति योजना धरातल पर नहीं उतरी, लोगों की परेशानी बढ़ी
- हजारीबाग नगर निगम में 36 वार्ड हैं. हर जगह पानी देना है.
- फिलहाल नगर निगम के पास नौ टैंकर हैं. उससे काम होगा.
- नौ गांवों के 2,936 घरों में नलों से शुद्ध पेयजल मिलना है.
- इससे 12,413 लोगों को इसका लाभ मिलता है
alt="" width="1184" height="1144" /> गर्मी के दस्तक के साथ मानगो नगर निगम क्षेत्र में पेयजल की संकट उत्पन्न हो जाती है. इसको ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने इसकी तैयारी पहले से की हुई है. कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव ने निर्देश दिया है कि कहीं पानी के लिए लोग परेशानी में न पड़ें. इसका अधिकारी ध्यान रखें. सिटी मैनेजर राहुल कुमार ने कहा कि जहां पानी का पाइपलाइन नहीं पहुंचा है वहां 6 टैंकरों से नियमित रूप से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है, तकि लोगों को परेशानी नहीं हो. गर्मी ज्यादा बढ़ने पर नदी का जलस्तर भी गिरेगा, तो वैसी स्थिति में जरूरत के अनुसार पानी के टैंकर भाड़े पर लिए जाएंगे.
alt="" width="1175" height="1155" /> उससे सभी जगहों पर जलापूर्ति की जाएगी. किसी भी इलाके में गर्मी में पानी की आपूर्ति फौरन की जाएगी. वर्तमान में कृष्णा नगर, गौड़ बस्ती, पारडीह, सुखना बस्ती, बालीगुमा, शंकोसाई एक नंबर, पांच नंबर, किस्टो नगर, न्यू उलीडीह मुर्दा मैदान, पुराना उलीडीह आदि क्षेत्रों में नियमित रूप से टैंकर से पानी की आपूर्ति की जा रही है. मानगो के जवाहरनगर रोड नंबर 15 में स्थित फिल्टर प्लांट से प्रतिदिन 50 एमएलडी पेयजल की आपूर्ति की जाती है. नगर निगम के इस प्रयास से लोगों को प्यास बुझने की आस है. [wpse_comments_template]

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