कांग्रेस पैराशूट उम्मीदवार उतारेगी ! सीपीआई के लिए कांग्रेस छोड़ सकती है सीट भाजपा हजारीबाग में बदलेगी प्रत्याशी ! गिरिडीह छोड़ हजारीबाग सीट पर आजसू कर सकती है दावेदारी Ranchi: हजारीबाग संसदीय सीट पर राजनीतिक दलों ने चुनाव की तेज कर दी है. सभी दल और पार्टियों के संभावित प्रत्याशी आंकड़े, समीकरण और संभावनाओं के हिसाब-किताब में लगे हुए हैं. हजारीबाग में लोकसभा चुनाव को लेकर चार तरह के समीकरण बनते दिख रहे हैं. पहला यह कि कांग्रेस यहां इस बार भी चुनाव लड़ेगी. 2019 में यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य रूप से मुकाबला था. भाजपा जीती और कांग्रेस हार गई. कांग्रेस 1984 से इस सीट पर वनवास झेल रही है. हर बार उम्मीदवार खड़ी करती है, लेकिन वह जीत नहीं पाती. 2019 में कांग्रेस ने से यहां गोपाल साहू को लड़वाया था. पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार कांग्रेस गोपाल साहू को हजारीबाग से चुनाव नहीं लड़वाएगी. वैसे भी वे हजारीबाग में सक्रीय नहीं है. दूसरी तरफ ये भी संकट है कि हजारीबाग में कांग्रेस के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है. कांग्रेस के पास हजारीबाग में मजबूत नेता के रूप में धार्मिक न्यास जयशंकर पाठक, आरसी मेहता, आबिद अंसारी और विजय यादव हैं. अगर पार्टी इनमें से किसी को टिकट नहीं देती है तो फिर उसे यहां पैराशूट उम्मीदवार उतारना पड़ेगा.
35 साल से कांग्रेस झेल रही वनवास
दूसरा समीकरण यह है कि कांग्रेस यहां से चुनाव नहीं लड़ेगी. कांग्रेस यहां से हर बार चुनाव लड़ती है, लेकिन जीत नहीं पाती. 1984 के बाद कांग्रेस हजारीबाग संसदीय सीट से एक भी चुनाव नहीं जीत सकी है. 1989 से भाजपा यहां पर अपना दबदबा बनाये हुए है, लेकिन 2 बार (1991 और 2004) में सीपीआई ने यहां भाजपा का जीत का रथ रोका है. सीपीआई के भुवनेश्वर मेहता दोनों बार चुनाव जीते थे. इस बार भी सीपीआई ने हजारीबाग संसदीय सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है. चर्चा है कि इंडी गठबंधन में सीट बंटवारे में कांग्रेस यह सीट सीपीआई के लिए छोड़ सकती है. चुनाव से पहले पार्टी बदल सकते हैं जयंत !
तीसरा समीकरण यह है कि भाजपा हजारीबाग सीट पर प्रत्याशी बदल सकती है. जयंत सिन्हा 2014 और 2019 में यहां से अच्छे मार्जिन से चुनाव जीते हैं, लेकिन पिछले 2-3 सालों से संगठन में उनकी बहुत ज्यादा गतिविधियां नहीं दिख रही. उन्होंने खुद को हजारीबाग तक ही समेट रखा है. प्रदेश के बड़े नेताओं से भी उनका बहुत ज्यादा मेलजोल नहीं दिखता. प्रदेश के कार्यक्रमों में भी नजर नहीं आते. दूसरी तरफ उनके पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. ऐसे में यह भी संभावना जताई जा रही है कि पिता के बगावत का खामियाजा पुत्र को भुगतना पड़ सकता है और चुनाव से पहले जयंत सिन्हा पार्टी बदल सकते हैं. आजसू के लिए हजारीबाग हो सकता है सेफ सीट
चौथा समीकरण यह है कि आजसू पार्टी हजारीबाग संसदीय सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर सकता है. पिछले चुनाव में भाजपा ने गिरिडीह सीट आजसू को दिया था, लेकिन चुनाव जीतने के बाद आजसू सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी गिरिडीह में एक्टिव नहीं रहे. इसी डर से वे सेफ सीट से चुनाव लड़ना चाहेंगे. हजारीबाग संसदीय सीट पर आजसू की दावेदारी की वजह यह भी होगी कि संसदीय सीट को बड़ा हिस्सा रामगढ़ जिले में पड़ता है और रामगढ़ में चंद्रप्रकाश की जमीन मजबूत है. विधानसभा सीटों के समीकरण में भाजपा मजबूत
हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा सीटें आती है. इनमें से दो (बड़कागांव और बरही) कांग्रेस के कब्जे में है. दो सीटें (मांडू और हजारीबाग सदर) भाजपा के कब्जे में हैं और रामगढ़ सीट भाजपा की सहयोगी आजसू पार्टी के पास है. 2019 के विधानसभा चुनाव में रामगढ़ से कांग्रेस ने चुनाव जीता था, लेकिन इसी साल हुए उपचुनाव में आजसू ने रामगढ़ में कब्जा जमाया. विधानसभा सीटों के समीकरण से हिसाब से फिलहाल भाजपा कांग्रेस से मजबूत दिख रही है. [wpse_comments_template]
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