Search

धनबाद-चंद्रपुरा डीसी रेल लाइन पर बरकरार है खतरा !

Dhanbad: खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) ने रविवार को धनबाद स्थित खान सुरक्षा महानिदेशालय के ऑडिटोरियम में अपना 123वां स्थापना दिवस मनाया. कार्यक्रम में सुरक्षा महानिदेशक प्रभात कुमार, उनके निदेशक गण सहित तमाम डीजीएमएस के अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में कोल इंडिया के चेयरमैन पीएन प्रसाद मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए डीजीएमएस के महानिदेशक ने बताया कि खान सुरक्षा महानिदेशालय के प्रयासों का ही फल है कि खदानों में होने वाली दुर्घटनाओं का दर अब 10वें स्थान से भी नीचे है. उन्होंने कहा कि डीजीएमएस हर साल न सिर्फ हजारों मजदूरों की जान बचाती है बल्कि लाखों टन मिनिरल्स का भी संरक्षण करती है.उन्होंने कहा कि आज देश में खनिज की मांग काफी बढ़ गई है जिस वजह से प्रोडक्शन भी कई गुणा बढ़ गया है. ऐसे में डीजीएमएस का काम भी काफी बढ़ गया है ताकि प्रोडक्शन तो बढ़े लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए. इस दौरान उन्होंने धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन पर मंडराते खतरे को एक बार फिर से दोहराया. उन्होंने कहा कि डीसी रेल लाइन पर खतरा है, लेकिन रेलवे, बीसीसीएल, आइएसएम आईआईटी और सिम्फ़र जैसी संस्थाए लगातार इसपर अपनी नजर रखे हुए है और इसका रिपोर्ट भी लगातार डीजीएमएस को भेजा जा रहा है. ताकि समय रहते खतरे को देखते हुए सुरक्षात्मक कदम उठाया जा सके.उन्होंने कहा कि इस दिशा में बीसीसीएल को भी साफ निर्देश दिए गए है कि वो रेल लाइनों की तरफ कोयला उत्खनन का कार्य नही करेगी. वहीं इस मौके पर मौजूद कोल इंडिया के चेयरमैन पीएन प्रसाद ने कहा कि डीजीएमएस एक महान संस्थान है. करीब 1774 से कोल माइनिंग भारत में हो रहा है.ऐसे में पहले कई दुर्घटनाए हुई. जिसको रोकने के लिए 1902 में डीजीएमएस की स्थापना की गई .जिसके बाद से दुर्घटनाओं में काफी कमियां आई है. विकसित राष्ट्रों के तुलना में अब कोल इंडिया कोयले का उत्पादन ज्यादा और सुरक्षित ढंग से कर रहा है.उन्होंने कहा कि वैसे केंद्र सरकार और डीजीएमएस का लक्ष्य जीरो एक्सीडेंट है जो फिलहाल हम उस लक्ष्य को पूरा तो नही कर पा रहे, लेकिन पहले की अपेक्षा अब कोल इंडिया के सभी अंगों में दुर्घटनाए काफी हद तक कम हो गई है. उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भी कोल इंडिया प्रतिबद्ध है. आने वाले अगले तीन वर्षो में तीन गीगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. फिलहाल अभी कोल इंडिया 1.30 गीगावॉट सौरऊर्जा का उत्पादन कर रहा है .कुल मिलाकर आने वाले समय में कोल इंडिया 5 गीगावॉट तक सौरऊर्जा का उत्पादन करने लगेगा. इसके आलवा 22 सौ हेक्टेयर भूमि पर पौधा रोपण का कार्य भी किया गया है. इसके साथ ही एयरकंडीशनर, एलईडी लाइट वगैरह पर भी कार्य किया जा रहा है, ताकि कार्बन उत्सर्जन को कम कर पृथ्वी को ग्लोबल वार्मिंग से बचाया जा सके.उन्होंने कहा कि कोयला क्षेत्रों से विस्थापित होने वाले लोगों के विकास के लिए भी कोल इंडिया कार्य कर रहा है. कोल इंडिया राष्ट्रीय स्किल डेवलपमेंट संस्थान से जुड़ चुका है. अब कोल इंडिया अपने तमाम इकाइयों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोल कर विस्थापितों को ट्रेनिंग देकर रोजगार मुहैया कराने का कार्य करेगी.कोल इंडिया विकसित भारत योजना के तहत भी डिजिटल इंडिया बनाने को लेकर भी कार्य कर रहा है . फिलहाल अभी सभी जगह सरकारी स्कूलों के 12वीं के बच्चों को इससे जोड़ा जा रहा है. कुछ समय बाद आठवीं तक के बच्चों को भी डिजिटल शिक्षा ददी जाएगी .ताकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया का समापन पूर्ण हो सके.

चौंकाने वाला है डीजी का बयान

पिछले दिनों सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी और बाघमारा विधायक ढुलू महतो के आग्रह के बाद रेल मंत्रालय ने डीसी लाईन पर पेसेंजर ट्रेन को पुनः चलाने की मंजूरी देते हुए आगामी 10 जनवरी से डीसी लाईन पर पेसेंजर ट्रेन चलाने की घोषणा की है. ऐसे में डीजीएमए डीजी का बयान चौंकाने वाला है. [wpse_comments_template]  

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

बेहतर न्यूज़ अनुभव
ब्राउज़र में ही
//