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मां छिन्नमस्तिका मंदिर पहुंच भावविभोर हुए मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री के बेटी-दामाद

मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री डॉ हरीश बुद्ध दो बार अपने पैतृक गांव सिमरातरी आ चुके हैं. पहली बार 1986 और दूसरी बार 1991 में पत्नी सरिता बुद्ध के साथ आये थे.
 

Ramgarh : मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री की बेटी सचिता बुद्ध व दामाद अजय बुद्ध शनिवार को रामगढ़ जिले के रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर पहुंचे. उन्होंने मंदिर में मत्था टेका और मां छिन्नमस्तिका से सुख समृद्धि की कामना की. रजरप्पा पहुंचने पर मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री के बेटी-दामाद का बड़कागांव विधायक के पुत्र रितिक चौधरी व रामगढ़ के समाजसेवी पीयूष चौधरी के नेतृत्व में भव्य स्वागत किया गया.


पूर्व उप प्रधानमंत्री की बेटी सचिता बुद्ध ने कहा कि छिन्नमस्तिका मंदिर पहुंचकर काफी अच्छा लगा. यहां काफी शांति हैं. अजय बुद्ध ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ा हूं. सच्ची पहचान और विकास की प्रेरणा है. उन्होंने कहा कि उनके पूर्वज करीब 110 वर्ष पूर्व गन्ने की खेतों में मजदूरी के लिए मॉरीशस गए थे. वहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग बिहार उत्तर प्रदेश से गए थे. मॉरीशस में उन्हें राजनीतिक पहचान मिली.


उन्होंने कहा कि राजनीति में भारतीय मूल के लोगों की मजबूत भागीदारी तब हुई, जब मॉरीशस के उप प्रधानमंत्री पद पर डॉ हरीश बुद्ध आसीन हुए. उनका समाज सुधार व प्रशासनिक सुधरों के समर्थक भारतीय मूल के नेताओं में प्रमुख स्थान रहा. डॉ हरीश बुद्ध के आने से भारत व मॉरीशस के संबंध मजबूत हुए. आज मॉरीशस को छोटा भारत भी कहा जाता है.

 

1991 में अपने पैतृक गांव सिमरातरी पहुंचे थे पूर्व उप प्रधानमंत्री 

मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री डॉ हरीश बुद्ध दो बार अपने पैतृक गांव सिमरातरी आ चुके हैं. पहली बार 1986 और दूसरी बार 1991 में पत्नी सरिता बुद्ध के साथ आये थे. उस समय उन्होंने गांव के विकास के लिए हजारीबाग में एक ट्रस्ट बनाया और बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया. उनकी प्रेरणा से बड़कागांव में बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना हुई. डॉ हरीश बुद्ध के पूर्वज बुद्ध महतो को मात्र 16 वर्ष की आयु में अंग्रेजी सरकार मजदूरी के लिए मॉरीशस ले गयी थी. डॉ हरीश बुद्ध 1982 में मॉरीशस के उप प्रधानमंत्री बने. इसके बाद उन्होंने अपने पूर्वजों का घर खोजा और 1991 में भारत यात्रा के दौरान अपने पैतृक गांव सिमरातरी पहुंचे थे.

 


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