Search

होर्मुज में अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत और शर्मनाक चुप्पी

केंद्र की मोदी सरकार पहले भी चुप ही रहती थी. हां अगर मामला पाकिस्तान से जुड़ा हो तो बात अलग है. ताजा मामला ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध का है. खबर है कि तीन दिन में अमेरिका ने तीन भारतीय जहाजों को निशाना बनाया. इसमें तीन भारतीय मारे गये. कई लापता हैं और सरकार चुप है. यह हाल है राष्ट्रवादी सरकार का. सरकार की चुप्पी पर कोई सवाल भी नहीं उठा रहा है. राष्ट्रवाद के नाम पर कोहराम मचाने वाली भीड़ की जुबान बंद हैं और अखबार व टीवी मीडिया में सन्नाटा है.

 

अमेरिकी हमले में सिर्फ भारतीय मारे ही नहीं गए हैं, उस पर अमेरिका ने अफसोस भी नहीं जताया है. उल्टे उसने हमले को सही ठहराते हुए वीडियो भी जारी किया. इन हमलों के खिलाफ ईरान ने भारत के पक्ष में बयान दिया. वहां की मीडिया ने भी स्टोरीज की. और हम क्या कर रहे हैं आम लोगों को यह बता रहे हैं कि कैसे ईरान में ईएमआई पर रोटी बिक रही है.  यह सब शर्मनाक है.

 

ऐसा नहीं है कि पहले ऐसा कुछ नहीं हुआ जब अमेरिका ने दादागिरी की. पहले भी ऐसा हुआ है, लेकिन तब की सरकारें प्रतिक्रिया देती थी. मनमोहन सिंह की सरकार के समय भी भारत के एक अधिकारी के साथ गलत किया गया था. तब भारत सरकार ने ना सिर्फ कड़ा विरोध किया था, बल्कि अमेरिकी दूतावास को मिली सुरक्षा को हटा कर कठोर संदेश दिया था.

 

आपको याद होगा दिसंबर 2013 की वह घटना. तब अमेरिका में भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े को अमेरिकी पुलिस ने गिरफ्तार किया था और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया था. देश में उबाल मच गया था. मीडिया में खबरें थी. टीवी पर बहस चल रही थी.

 

उस वक्त की केंद्र सरकार ने न सिर्फ अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा हटा दी थी, बल्कि अमेरिकी राजनयिकों व उनके परिवार के एयरपोर्ट पास वापस ले लिये थे. उन्हें मिलने वाली तमाम वीआईपी व विशेष सुविधाओं को खत्म कर दिया था. अमेरिकी दूतावास द्वारा दिल्ली में संचालित अमेरिकन एंबेसी स्कूल की आयकर जांच शुरू कर दी थी. भारत के मंत्रियों व सांसदों ने अमेरिकी संसद के प्रतिनिधियों से मिलने तक से इनकार किया था. अमेरिकी सरकार को झूकना पड़ा.

 

इससे भी पहले जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी. सरकार ने ना सिर्फ परमाणु परीक्षण किया. बल्कि अमेरिकी प्रतिबंधों को करारा जवाब दिया. उसे झेला और खुद को मजबूती से साबित किया. उन्होंने तब अमेरिका की एक नहीं सुनी थी. इतिहास में ऐसी अनेकों घटनाएं हैं, जब भारत ने अमेरिका की दादागिरी का करारा जवाब दिया. लेकिन ये सब तो इतिहास की बात है.

 

आज क्या हो रहा है. ऐसा लग रहा है तीन भारतीय जहाजों पर हमले, तीन भारतीयों की मौत और कई के लापता होने की घटना के बाद भी किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. केंद्र सरकार चुप है और मीडिया खामोश. विपक्ष की तरफ से भी कोई बड़ा प्रतिरोध नहीं है. यह सब बहुत ही शर्मनाक है.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

बेहतर अनुभव व ज्यादा खबरों के लिए ऐप पर जाएं

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें
Scan QR Code
Available on App Store & Play Store
Download for Android Download for iOS

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

बेहतर न्यूज़ अनुभव
ब्राउज़र में ही
//