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धन विधेयक के मुद्दे पर फैसला जल्द आयेगा, सात न्यायाधीशों की पीठ का गठन किया गया : जयराम रमेश

 
New Delhi : कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट न्यायालय ने सरकार द्वारा प्रमुख विधेयकों को धन विधेयक के तौर पर पारित कराने को चुनौती देने वाली उनकी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पीठ का गठन किया है और उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में जल्द फैसला आयेगा. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संसद के कामकाज पर दूरगामी असर होगा. सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार को कहा कि वह नौ न्यायाधीशों और सात न्यायाधीशों की पीठ के कई मामलों में एक साझा आदेश पारित करेगा, ताकि उन्हें सुनवाई के लिए तैयार किया जा सके. कहा कि इन मामलों में धन संबंधी विधेयक और विधायकों को अयोग्य ठहराने के विधानसभा अध्यक्ष की शक्ति संबंधी मामले भी शामिल हैं. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने सात न्यायाधीशों वाले छह और नौ न्यायाधीशों वाले चार मामलों पर विचार किया.                                                                                                                                             ">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">

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धन विधेयक कानून केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने छह अक्टूबर को कहा था कि वह आधार अधिनियम जैसे कानून को धन विधेयक के रूप में पारित करने की वैधता के मुद्दे पर विचार करने के लिए सात न्यायाधीशों की पीठ का गठन करेगा. इस संबंध में सुनवाई का उद्देश्य धन विधेयक से जुड़े विवाद का समाधान करना है. धन विधेयक कानून का एक हिस्सा है जिसे केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है. और राज्यसभा इसमें संशोधन या इसे अस्वीकार नहीं कर सकती है. उच्च सदन केवल सिफारिशें कर सकता है जिन्हें निचला सदन स्वीकार भी कर सकता है और नहीं भी.

फैसले का संसद के कामकाज पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा

[wpse_comments_template] रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट किया, आखिरकार, उच्चतम न्यायालय ने मेरी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सात न्यायाधीशों की एक पीठ का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं प्रधान न्यायाधीश करेंगे. यह पीठ मेरी उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी जिनमें मोदी सरकार द्वारा प्रमुख विधेयकों को धन विधेयक के रूप में पारित किये जाने को चुनौती दी गयी है. रमेश का कहना था, मैंने इस मुद्दे को संसद में और उसके बाहर सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिकाओं के माध्यम से बार-बार उठाया है. पहली याचिका छह अप्रैल, 2016 को दायर की गयी थी क्योंकि राज्यसभा को प्रमुख कानूनों में संशोधनों पर चर्चा करने या पारित करने के अवसर से वंचित किया गया. उदाहरण के तौर पर इनमें आधार विधेयक, राष्ट्रीय हरित अधिकरण सहित कई न्यायाधिकरणों की शक्तियों को कमजोर करने वाला विधेयक और धन शोधन विरोधी अधिनियम को और अधिक कठोर बनाने वाला विधेयक शामिल हैं. उन्होंने कहा, ‘उम्मीद है कि इस संबंध में अंतिम फैसला जल्द आयेगा और इसका संसद के कामकाज पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा. [wpse_comments_template]
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