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दीपावली पर शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन, सालों भर धन-धान्य से भरा पूरा रहेगा घर

लक्ष्मी पूजन के लिए सिर्फ तीन घंटे का है शुभ मुहूर्त शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन करने से सालों भर घर में रहेगी खुशहाली LagatarDesk :  हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली मनायी जाती है. इस बार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर यानी कल दोपहर 3 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी, जो 1 नवंबर को शाम 6 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में लोग दुविधा में है कि 31 अक्टूबर को दीपावली मनायें या 1 नवंबर. हिंदू मान्यताओं के अनुसार,  इस साल दीपों का त्यौहार 31 अक्टूबर को मनाया जायेगा. क्योंकि अमावस्या तिथि पर प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है. 1 नवंबर को प्रदोष काल में केवल कुछ मिनट ही अमावस्या तिथि रहेगी. ऐसे में लक्ष्मी पूजा का समय नहीं मिल पायेगा. जबकि 31 अक्टूबर को प्रदोष काल व अर्धरात्रि दोनों में अमावस्या की तिथि रहेगी, जिसके चलते दीपावली इसी दिन मनाना उचित होगा.

मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से आती है सुख-समृद्धि 

हिंदू धर्म में दीपावली सबसे महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है. दिवाली मुख्य रूप से भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनायी जाती है. दीपावली पर प्रदोष काल में पूरे विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से सालों भर घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है. यह भी कहा जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से मां जल्दी प्रसन्न होती है और अपने भक्तों पर अपनी कृपा बनाये रखती है. इस दिन मुख्य तौर पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, देवी सरस्वती, महाकाली की पूजा होती है.

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा करने का शुभ मुहूर्त

  1. अमावस्या तिथि प्रारंभ - 31 अक्टूबर दोपहर 3 बजकर 52 मिनट  से
  2. अमावस्या तिथि समाप्त - 1 नवंबर शाम 6 बजकर 16 मिनट तक
  3. दिवाली पूजा करने का शुभ मुहूर्त - 31 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 36 से रात 8 बजकर 11 मिनट तक (प्रदोष काल)

महानिशा काल में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व

दिवाली की रात को महानिशा की रात्रि भी कहते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस रात्रि को महालक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं. ऐसी मान्यता है कि महानिशा काल में जो कोई भी लक्ष्मी जी की पूजा करता है, उसकी प्रार्थना लक्ष्मी जी अवश्य स्वीकृत करती हैं. इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा से पूरे वर्ष धन और समृद्धि मिलती है. महानिशा काल में पूजन का शुभ मुहूर्त 31 अक्टूबर रात 11 बजकर 39 मिनट से लेकर देर रात 12 बजकर 30 मिनट तक.

दिवाली में सफाई रहने से मां लक्ष्मी घर में करती हैं वास

पुराणों के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या की रात को देवी लक्ष्मी स्वयं धरती पर आती हैं और अपने भक्तों के घर विचरण करती हैं. इसलिए लोग दिवाली से पहले घर और आस-पास सफाई करते हैं. दिवाली में सफाई रहने से मां लक्ष्मी वहां ठहर जाती है. दिवाली वाले दिन कुबेर देवता की पूजा भी होती है.

इसी दिन भगवान राम 14 वर्षों का वनवास पूरा कर लौटे थे अयोध्या

दिवाली का त्यौहार 5 दिनों तक मनाया जाता है. यह पर्व धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर खत्म होता है. इस दिन लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को ही भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों का वनवास पूरा करके लौटे थे. इस दिन अयोध्या वासियों ने भगवान राम के आने की खुशी में दीपों से सजाया था. तभी से इस दिन को दिवाली के रूप में मनाया जाने लगा.

मां लक्ष्मी पूजा की विधि

  1. पूजा से पहले पूरे घर की सफाई कर लें. और घर पर गंगाजल का छिड़काव करें.
  2. घर को अच्छे से सजाये और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाये.
  3. जिस स्थान पर पूजा करना है वहां लकड़ी की चौकी रखें. और उसमें लाल रंग का कपड़ा बिछाये.
  4. फिर वहां मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें.
  5. चौकी के पास पानी से भरा मिट्टी का कलश रखें.
  6. मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा पर तिलक लगाये.
  7. प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाये.
  8. दीपक जलाकर उन्हें जल, मौली,गुड़, हल्दी, चावल, फल, अबीर-गुलाल आदि अर्पित करें.
  9. इसके बाद देवी सरस्वती, मां काली, श्री हरि और कुबेर देव की विधि विधान पूजा करें
  10. महालक्ष्मी पूजा के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरणों की पूजा करें.
  11. अंत में माता लक्ष्मी की आरती जरूर करें और उन्हें मिठाई का भोग लगाएं.
  12. प्रसाद घर-परिवार के सभी सदस्यों में बांट दें.

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